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ईरान में नोबेल पुरस्कार विजेता की गिरफ्तारी

मानवाधिकारों की प्रमुख पैरोकार हैं नरगिस मोहम्मदी

तेहरानः ईरान में मानवाधिकारों की प्रमुख पैरोकार और हाल ही में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित नरगिस मोहम्मदी को एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया गया है। मोहम्मदी, जो ईरानी जेलों में महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों और मौत की सज़ा के खिलाफ अपनी अथक लड़ाई के लिए जानी जाती हैं, उन्हें एक शोक सभा में शामिल होने के कारण हिरासत में लिया गया। यह घटना ईरान के कठोर शासन के तहत असंतोष की आवाज को दबाने के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।

नरगिस मोहम्मदी को अक्टूबर में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, लेकिन वह इस समय भी जेल में थीं और पुरस्कार लेने के लिए ओस्लो नहीं जा पाई थीं। उनके परिवार ने उनकी ओर से पुरस्कार स्वीकार किया था। उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक समुदाय ने उन्हें रिहा करने के लिए ईरान पर दबाव बढ़ा दिया था। शोक सभा, जिसमें मोहम्मदी शामिल होने गई थीं, संभवतः किसी राजनीतिक कैदी या शासन विरोधी प्रदर्शन में मारे गए व्यक्ति के सम्मान में आयोजित की गई थी।

उनकी बार-बार की गिरफ्तारी और लंबी जेल की सज़ाएँ दिखाती हैं कि ईरान का धर्मशासित शासन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विरोधियों के प्रति कितना असहिष्णु है। मोहम्मदी ने ईरान में महिलाओं के अधिकारों के लिए, अनिवार्य हिजाब कानूनों के खिलाफ और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए वर्षों से संघर्ष किया है। उन्हें पहले भी कई बार जेल भेजा गया है और उन पर राज्य के खिलाफ प्रचार करने और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करने जैसे अस्पष्ट आरोप लगाए गए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और नोबेल समिति ने उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है। उनकी गिरफ्तारी अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और मानवाधिकारों के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। मोहम्मदी की कहानी ईरान में विरोध की आवाज़ों की दुर्दशा का प्रतीक है, जहाँ शांतिपूर्ण विरोध या सामाजिक सक्रियता के लिए भी गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। यह घटना विश्व समुदाय को यह याद दिलाती है कि ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति कितनी गंभीर बनी हुई है।