धरती के आंतरिक रहस्यों को खोजने की दिशा में नई पहल
चलता फिरता प्रयोगशाला है यह
धरती की गहराई जानने का काम
ग्यारह किलोमीटर तक ड्रिल करेगा
राष्ट्रीय खबर
रांचीः मानव इतिहास में अंतरिक्ष की गहराइयों को टटोलने की होड़ तो हमेशा से रही है, लेकिन हमारे पैरों के नीचे मौजूद धरती के गर्भ में क्या छिपा है, यह रहस्य आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बना हुआ है। इस बीच, विज्ञान जगत में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर स्थापित करते हुए चीन ने एक ऐसा अत्याधुनिक महासागरीय ड्रिलिंग जहाज तैयार किया है, जो पृथ्वी की क्रस्ट को चीरते हुए सीधे इसके आंतरिक भाग यानी मेंटल तक पहुँचने की क्षमता रखता है। मेंग शियांग नाम के इस विशालकाय जहाज को चीनी भाषा में स्वप्न कहा जाता है, जो वास्तव में वैज्ञानिकों के सदियों पुराने सपनों को सच करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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लगभग 42,600 टन विस्थापन क्षमता वाले इस जहाज की लंबाई 179.8 मीटर और चौड़ाई 32.8 मीटर है। यह दुनिया का पहला ऐसा अनूठा पोत है जो महासागरीय वैज्ञानिक ड्रिलिंग, तेल और गैस अन्वेषण तथा प्राकृतिक गैस हाइड्रेट्स की खोज जैसी कई जटिल प्रणालियों को एक साथ एकीकृत करता है। मेंग शियांग समुद्र तल से नीचे लगभग 11 किलोमीटर (36,000 फीट) तक ड्रिल करने में पूरी तरह सक्षम है। इसके पास 15,000 समुद्री मील की एक लंबी रेंज है और यह बिना किसी अतिरिक्त आपूर्ति के लगातार 120 दिनों तक गहरे समुद्र में रहकर काम कर सकता है। यह पोत भीषण तूफानों और महासागरों की सबसे विकट परिस्थितियों का सामना करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इस मिशन का सबसे रोमांचक और वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण पहलू पृथ्वी के क्रस्ट और मेंटल के बीच की सीमा यानी मोहरोविकिक असंतुलन तक पहुँचना है। आज तक कोई भी देश इस परत को पार करके सीधे मेंटल के नमूनों को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल पाया है। मेंग शियांग पर लगे विशेष टाइटेनियम मिश्र धातु के ड्रिल रॉड और अत्याधुनिक डायमंड बिट्स इस अत्यधिक उच्च तापमान और दबाव वाले क्षेत्र में काम करने के लिए विशेष रूप से इंजीनियर किए गए हैं। मेंटल के इन मूल नमूनों के मिलने से टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने, भूकंपों के आने के सटीक कारणों और हमारी पृथ्वी की उत्पत्ति के इतिहास को बेहद बारीकी से समझा जा सकेगा।
इस जहाज को केवल एक ड्रिलिंग मशीन कहना कम होगा, क्योंकि इसके भीतर 3,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में नौ अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं। इन लैबों में भूविज्ञान, भू-रसायन विज्ञान, सूक्ष्म जीव विज्ञान और पेलियोमैग्नेटिज्म से जुड़ी आधुनिक तकनीकें मौजूद हैं, जो समुद्र से निकाले गए कोर नमूनों का परीक्षण तुरंत जहाज पर ही करने की सुविधा देती हैं। इसमें एक स्वचालित सैंपल स्टोरेज सिस्टम भी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मेंग शियांग का यह अभियान पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करेगा, जिससे भविष्य में ग्रह की संरचना को नए सिरे से परिभाषित करने में मदद मिलेगी।
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