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पूर्व नौकरशाहों के बयान के बाद राहुल ने नया राज खोला

दो सौ अफसर अब खबरें पहुंचा रहे है

प्रेस  कांफ्रेंस कर इसकी जानकारी दी गयी

ज्ञानेश कुमार के पास गवाह बनने का मौका

उनके पीछे दिमाग किसी और का रहा है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः वोट चोरी और असंविधानिक गतिविधियों के आरोपों के बीच, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की मांग को लेकर सोमवार को विपक्षी दलों के मंच इंडिया गठबंधन ने दिल्ली में सुप्रिम कोर्ट चलो आंदोलन का आह्वान किया था। आंदोलन शुरू होने से ठीक पहले, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य निर्वाचन कमिश्नर पर तीखा हमला बोला।

सुप्रिम कोर्ट चलो मार्च से पहले सोमवार दोपहर कांग्रेस मुख्यालय में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसी दौरान उन्होंने दावा किया कि देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश डर के मारे रात को सो नहीं पा रहे हैं। राहुल ने यह भी दावा किया कि वे इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को खुद देख रहे हैं।

राहुल ने कहा, ज्ञानेश कुमार डरे हुए हैं। उनकी रातों की नींद उड़ चुकी है। इसी के साथ राहुल ने एक बहुत ही सनसनीखेज टिप्पणी करते हुए कहा, संदेश आ रहा है। वह (ज्ञानेश) खुद भी यह प्रेस कॉन्फ्रेंस देख रहे हैं। पत्रकारों द्वारा यह पूछने पर कि वह ज्ञानेश को क्या संदेश देना चाहते हैं, राहुल ने कहा, सरकारी गवाह बन जाइए। इस्तीफा दे दीजिए। यही आपकी सच्ची देशभक्ति होगी। आपने (ज्ञानेश) अपराध किया है, लेकिन सच कहें तो आप मुख्य अपराधी नहीं हैं। आपने गलती की है, लेकिन इस गलती के पीछे आपका दिमाग नहीं है। हम जानते हैं कि आप कितना अधिक दबाव झेल रहे हैं।

राहुल का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उद्योगपति गौतम अडाणी ज्ञानेश कुमार पर दबाव बना रहे हैं। रायबरेली से कांग्रेस सांसद ने यह चेतावनी भी दी कि यदि ज्ञानेश ने इस्तीफा नहीं दिया और देश की चुनावी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा। राहुल के शब्दों में, संविधान खतरे में है। यह प्रतिरोध केवल एक दिन का नहीं है। हम रुकने वाले नहीं हैं। यह जारी रहेगा। यह एक बड़ा जनआंदोलन बनेगा।

राहुल ने यह भी दावा किया कि मोदी सरकार के कम से कम 200 अधिकारी उनके संपर्क में हैं और उन्हें गुप्त जानकारियां दे रहे हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, मैं प्रधानमंत्री मोदी से कहना चाहता हूं कि आपकी सरकार के 200 अधिकारी हमारे संपर्क में हैं। वे लगातार हमारे हाथों में पुख्ता दस्तावेज और जानकारियां सौंप रहे हैं।

राहुल का यह भी दावा था कि लगभग 50 प्रतिशत पुलिस अधिकारियों ने माना है कि विपक्ष जो कर रहा है, वह बिल्कुल सही है और उन्हें अपना यह विरोध प्रदर्शन जारी रखना चाहिए। इसके साथ ही उनकी यह महत्वपूर्ण टिप्पणी भी सामने आई— शायद आपको लग रहा है कि हमारे सामने बहुत बड़ी चुनौती है क्योंकि पुलिस हम पर लाठियां भांज रही है। लेकिन जिस तरह आप थके हुए हैं, वे (पुलिसकर्मी) भी उतने ही थके हुए हैं। पुलिसकर्मी खुद यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर हम ज्ञानेश कुमार जैसे चोर को क्यों बचा रहे हैं? इसलिए हमें अपनी इस मांग पर अडिग रहना होगा। हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। इसमें चाहे जितने दिन, हफ्ते, महीने या एक साल का समय क्यों न लगे, हम इसकी परवाह नहीं करते।

सोमवार शाम को, एसआईआर में कथित अनियमितताओं के खिलाफ राहुल गांधी सहित 11 विपक्षी नेताओं ने बस यात्रा और एक बड़ी रैली के रूप में सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर एक जनहित याचिका दायर की (हालांकि रास्ते में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने इस मार्च को रोक दिया था)। याचिका दायर करने वाले प्रमुख नेताओं में राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव, उद्धव ठाकरे गुट के शिवसेना नेता संजय राउत, सीपीएम महासचिव एम.ए. बेबी, सीपीआई महासचिव डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की नेत्री महुआ माजी, शरद पवार गुट की राकांपा नेत्री सुप्रिया सुले और आईएमएल नेता ई.टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं। मंगलवार को शीर्ष अदालत में इस जनहित याचिका पर सुनवाई होने की संभावना है।

दूसरी ओर, केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिश और उसके नियंत्रण वाली दिल्ली पुलिस के निर्देश के बाद, कॉकरोच जनता पार्टी को जंतर-मंतर पर ज्ञानेश विरोधी विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जंतर-मंतर के स्थान पर राजधानी में तीन अन्य जगहें निर्धारित की गई हैं— रामलीला मैदान, बुरारी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडीडब्लयू ग्राउंड। अब से विरोध प्रदर्शन इन्हीं तीन जगहों पर किए जा सकेंगे। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए अनुमति मांगने सोमवार को कॉकरोच प्रतिनिधि थाने गए थे, और इसी रस्साकशी के बीच सोमवार को यह निर्देश सामने आया। इसके तुरंत बाद कॉकरोच पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपक ने दावा किया कि अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बन जाएगा।

सोमवार दोपहर दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं की एक बैठक हुई। इस बैठक में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव सहित कई नेता शामिल हुए। बैठक के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार पर तीखा तंज कसा। इसके बाद सभी विपक्षी नेता एक बस में सवार होकर यात्रा के लिए निकले। उस बस में वामपंथी छात्र संगठन आइसा की नेत्री नेहा बोरा भी मौजूद थीं। बस के पीछे हजारों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ता पैदल मार्च निकालते हुए आगे बढ़ रहे थे। कुछ देर बाद बाराखंबा के पास बस से उतरकर राहुल, प्रियंका गांधी वाड्रा, नेहा बोरा और अन्य नेता कार्यकर्ताओं के साथ पैदल चलने लगे। भगवान दास मार्ग के पास पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने इस विपक्षी मार्च को रोक दिया और वहां सुरक्षाकर्मियों ने एक मजबूत मानव श्रृंखला बनाकर रास्ता सील कर दिया। अंततः शाम करीब 6:30 बजे राहुल और अन्य नेता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और वहां से सीधे मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास के लिए रवाना हो गए, जहां गठबंधन के नेताओं की एक और दौर की बैठक हुई।