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अब जर्मनी से वायु रक्षा प्रणाली पाने की तैयारी में पाकिस्तान

ऑपरेशन सिंदूर ने चीनी रक्षा तकनीक की धज्जियां उड़ा दी

बर्लिनः क्या भारत के ब्रह्मोस के डर से पाकिस्तान चीनी कवच ​​उतार कर बर्लिन कवच से अपना चेहरा ढक लेगा। ऑपरेशन सिंदूर में चीनी रक्षा तकनीक के पूरी तरह विफल होने के दौरान ब्रह्मोस ने पलक झपकते ही 11 पाकिस्तानी वायु सेना ठिकानों को नष्ट कर दिया है। इस्लामाबाद के हाथों में चीन निर्मित जुड़वां वायु रक्षा प्रणाली बुरी तरह विफल रही हैं।

चीनी रक्षा उपकरण मिसाइल के आने का पता नहीं लगा सके। और इसलिए इस बार पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर जर्मनों की शरण में हैं। जर्मन सेना ब्रह्म जैसी क्रूज मिसाइलों के हमलों को रोकने के लिए आईआरआईएस-टी (इन्फ्रारेड इमेजिंग सिस्टम-टेल) नामक एक वायु रक्षा प्रणाली का उपयोग करती है

इसे जमीन से दागे जाने वाले लांचर या एसएलएम (सरफेस लॉन्च मिसाइल ) से दागा जा सकता है और यह दुश्मन की क्रूज मिसाइलों को आसानी से नष्ट कर सकता है। जर्मनी 2005 से बड़े पैमाने पर आइरिस का इस्तेमाल कर रहा है। इसके अलावा अमेरिका के नेतृत्व वाले यूरोपीय गठबंधन उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के कई देशों के पास भी यह वायु रक्षा प्रणाली है।

यूक्रेन में पिछले तीन साल से चल रहे युद्ध में इस वायु रक्षा प्रणाली ने अपनी उपयोगिता साबित की है। कई रूसी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने के बाद यह इस समय बर्लिन के कवच के तौर पर चर्चा में है। पिछले साल इरिस-टी एसएलएम की कई इकाइयां मिस्र से उड़ाई गई थीं। बाद में जर्मन सरकार ने इन्हें यूक्रेनी सेना को आपूर्ति की।

नतीजतन यूक्रेन को देश के आसमान को अभेद्य कवच से ढंकने का मौका मिल गया पिछले साल रूसी ‘पी-800 ओनिक्स’ क्रूज मिसाइल यूक्रेनी सेना के बर्लिन कवच को भेदने में विफल रही थी। वे मास्को के इस हथियार को ब्रह्मोस के बराबर मानते हैं। और इसीलिए माना जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना जर्मन कवच पर अपना कब्ज़ा जमाने की कोशिश कर रही है। हालांकि इस्लामाबाद ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इस बारे में कुछ नहीं कहा है। दूसरी ओर, बर्लिन भी इस मामले में चुप है।