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रांची में भू-माफियाओं का बढ़ता आतंक: ग्रामीण इलाकों में तनाव और हिंसा

लगातार शिकायत के बाद अब पुलिस का माथा ठनका

  • लापुंग में ग्रामीणों का सड़क जाम: न्याय की मांग

  • बंधन उरांव हत्या: भू-माफिया के नेक्सस का पर्दाफाश

  • कई अन्य ऐसे ही मामलों में हुई है हत्याएं

राष्ट्रीय खबर

रांचीः राजधानी के ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि हड़पने वाले गिरोहों का बढ़ता आतंक स्थानीय समुदायों के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है। ये शातिर समूह अब बड़ी-बड़ी संपत्तियों को निशाना बना रहे हैं और अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए महिलाओं सहित स्थानीय ग्रामीणों को भड़का रहे हैं।

पुलिस का कहना है कि इन गिरोहों का मकसद या तो जमीन पर अवैध कब्जा करना है, या फिर वास्तविक मालिकों को धमकाकर उन्हें अपनी जमीन बेचने के लिए मजबूर करना है। इन भू-माफियाओं का प्रभाव केवल रांची तक सीमित नहीं है, बल्कि लातेहार, सिमडेगा और गढ़वा जैसे पड़ोसी जिलों में भी इनकी सक्रियता देखी जा रही है।

हाल के दिनों में लापुंग और बेड़ो में भूमि विवाद को लेकर पुलिस बल पर हुए हमले ने इन गिरोहों की कार्यप्रणाली को उजागर किया है। इन घटनाओं की गहन जांच से पता चला है कि इन हिंसक झड़पों के पीछे इन्हीं भू-माफियाओं का हाथ था। बेड़ो के एसडीपीओ अशोक राम ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, ये समूह अपने काम में उग्रवादियों की शैली अपना रहे हैं। वे खासकर कंपनियों और अन्य बड़े भूखंडों की जमीनों को निशाना बना रहे हैं। यह दर्शाता है कि इन गिरोहों की योजनाबद्ध तरीके से काम करने की क्षमता और उनके पास मौजूद संसाधनों का स्तर काफी बढ़ गया है।

मंगलवार को लापुंग में भूमि विवाद को सुलझाने के लिए बुलाई गई एक बैठक के दौरान तीन पुलिसकर्मी और दो ग्रामीण घायल हो गए थे। इस घटना के विरोध में, गुरुवार को लापुंग के ग्रामीणों ने बेरो के परीडीह गांव में सड़क जाम कर दिया। उनकी मुख्य मांग घायल हुए दो ग्रामीणों के बेहतर इलाज की व्यवस्था करना थी।

इस प्रदर्शन के दौरान तनाव काफी बढ़ गया था, लेकिन बेरो एसडीपीओ के नेतृत्व में पुलिस ने सूझबूझ से काम लेते हुए भीड़ को शांत करने में सफलता पाई। लगभग तीन घंटे बाद, शाम करीब छह बजे, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पुलिस के आश्वासन पर प्रदर्शनकारी शांत हुए और उन्होंने सड़क से जाम हटा दिया। यह घटना दर्शाती है कि ग्रामीण समुदाय अपनी जमीनों को लेकर कितने संवेदनशील और एकजुट हैं।

इसी बीच, 31 मई को हुए बंधन उरांव हत्याकांड में पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है, जिसने भू-माफिया के खतरनाक नेक्सस का पर्दाफाश किया है। एसपी (ग्रामीण) प्रवीण पुष्कर ने गुरुवार को बताया कि इस मामले में रातू थाना क्षेत्र के विभिन्न इलाकों से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान छोटू कच्छप, अघनु मुंडा, अमन लकड़ा और कैलाश उरांव के रूप में हुई है।

पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। बंधन उरांव ने अपनी डेढ़ एकड़ जमीन छोटू कच्छप के साथ 1.7 लाख रुपये प्रति डिसमिल की दर से बेचने का समझौता किया था। छोटू ने अग्रिम के रूप में 2.30 लाख रुपये का भुगतान किया, लेकिन उसका इरादा जमीन खरीदने का नहीं, बल्कि हड़पने का था। जब बंधन ने इस पर आपत्ति जताई और पूरी बकाया राशि की मांग की, तो छोटू और अघनु ने एक शातिर योजना बनाई। उन्होंने सुपारी किलर अमन और कैलाश को बुलाया, जिन्होंने मिलकर बंधन की उसके घर में ही गला घोंटकर हत्या कर दी। बंधन की पत्नी बिरसी की एफआईआर के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।