सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद मध्यप्रदेश सरकार सतर्क
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कर्नल सोफिया कुरैशी पर बयान देकर फंसे
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हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने को कहा
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राज्य सरकार ने आनन फानन में टीम बनायी
राष्ट्रीय खबर
भोपालः कर्नल सोफिया कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह और विदेश सचिव विक्रम मिस्री के साथ पाकिस्तानी आतंकवादी शिविरों पर भारत के जवाबी हवाई हमलों, ऑपरेशन सिंदूर पर प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एक जाना-माना चेहरा बन गई थीं। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर और कर्नल कुरैशी पर अपनी टिप्पणी के बाद मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया।
इससे पहले, शाह को एक वायरल वीडियो में कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया था, जिन्होंने हमारी बेटियों के सिंदूर उड़ाए थे…हमने उनकी बहन भेजकर उनकी ऐसी की तैसी करवायी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने शाह द्वारा की गई अशिष्ट और अनुचित टिप्पणियों को लेकर राज्य सरकार की खिंचाई की थी। उससे पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। एफआईआर देखकर हाईकोर्ट और भी नाराज हो गया था क्योंकि इस प्राथमिकी में मंत्री को बचाने की साजिश की गयी थी। इस बीच खुद बयान देने वाले मंत्री ही सुप्रीम कोर्ट की शरण में चले गये।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार ने कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ शाह की विवादास्पद टिप्पणी की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। जिसमें तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शामिल हैं। 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी वर्मा वर्तमान में सागर रेंज के महानिरीक्षक (आईजी) के रूप में कार्यरत हैं।
अपने अनुशासन और सख्त प्रशासनिक शैली के लिए जाने जाने वाले वर्मा को नक्सल विरोधी अभियानों और साइबर अपराध जांच का व्यापक अनुभव है। उन्हें गृह मंत्रालय द्वारा विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है। विशेष सशस्त्र बल में डीआईजी के पद पर तैनात 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी कल्याण चक्रवर्ती भोपाल में पुलिस मुख्यालय से काम करते हैं।
उन्होंने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर काम किया है और जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्हें कानून और व्यवस्था प्रबंधन की गहरी समझ के लिए व्यापक रूप से जाना जाता है। एसआईटी की एकमात्र महिला सदस्य, 2014 बैच की आईपीएस अधिकारी वाहिनी सिंह वर्तमान में डिंडोरी जिले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) हैं।
बाल तस्करी और मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए जानी जाने वाली सिंह को डिजिटल साक्ष्य और अदालती कार्यवाही में इसके कानूनी सत्यापन में भी विशेषज्ञता हासिल है। उनके खोजी ट्रैक रिकॉर्ड ने उन्हें एसआईटी में जगह दिलाई।