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मोदी के आवास पर उच्च स्तरीय बैठक आयोजित

अंतिम समय में डीजीएमओ की आपसी बैठक का समय बदला गया

  • तमाम सैन्य उच्चाधिकारी मौजूद थे इसमें

  • किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इस पर खामोशी

  • जनता के सवालों से घिरी है मोदी सरकार

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः डीजीएमओ स्तर पर भारत और पाकिस्तान की बैठक को अंतिम समय में टाल दिया गया। यह बैठक संभवतः आज रात को होगी। दूसरी तरफ इस वार्ता से पहले दिल्ली में मोदी के आवास पर उच्च स्तरीय बैठक, राजनाथ, जयशंकर, डोभाल, मिसरी भी मौजूद थे। पहले से पता था कि युद्ध विराम के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच दूसरे दौर की वार्ता सोमवार को होनी है।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली स्थित अपने आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक की। मिली जानकारी के मुताबिक सोमवार 7 को लोक कल्याण मार्ग पर हुई बैठक में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर मौजूद रहे। इसके अलावा बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और भारत की तीनों सेनाओं के प्रमुख भी मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री ने उनके साथ लंबी चर्चा की। भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच सोमवार को दोपहर 12 बजे हॉटलाइन पर बातचीत होनी थी। उस चर्चा के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है। रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि वह दोपहर 2:30 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा।

सोमवार को प्रधानमंत्री के साथ बैठक में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और नौसेना प्रमुख दिनेश के त्रिपाठी मौजूद थे। माना जा रहा है कि डीजीएमओ की बैठक में क्या चर्चा होगी, भारत का रुख क्या होगा, इस पर प्रधानमंत्री आवास पर हुई बैठक में चर्चा हुई। पिछले शनिवार दोपहर को भारत और पाकिस्तान ने युद्धविराम की घोषणा की।

विदेश सचिव मिसरी ने कहा कि उस दिन दोनों देशों के डीजीएमओ ने बातचीत की थी। इसके बाद भारत और पाकिस्तान युद्धविराम पर सहमत हो गये। अगली चर्चा सोमवार को दोपहर 12 बजे होगी। माना जा रहा है कि सोमवार की चर्चा में दोनों देशों के बीच कई मुद्दे उठ सकते हैं। क्योंकि उस दिन केवल युद्धविराम पर ही चर्चा हुई थी। कोई अन्य विषय नहीं उठाया गया। दूसरे दौर की चर्चा भी डीजीएमओ स्तर तक ही सीमित रखी जा रही है। भारत की ओर से डीजीएमओ राजीव घई पाकिस्तान के साथ वार्ता में शामिल होंगे।

दूसरी तरफ यह चर्चा है कि अचानक के इस युद्धविराम का एलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किये जाने की वजह से सरकार अपने ही देश में सवालों से घिर गयी है। अनेक लोगों ने इसे भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया है। दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप यानी अमेरिका द्वारा इस युद्धविराम की असली शर्तें क्या हैं, इस पर अभी कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है क्योंकि इसका कोई लिखित दस्तावेज नहीं बना है।

मोदी सरकार की परेशानी यह है कि अब तो कई वरीय और पूर्व सैन्य अधिकारी भी अचानक के इस युद्धविराम से भारत को क्या फायदा हुआ, यह सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना है कि यह सही फैसला था कि पहली बार आतंकी सांप के सर पर डंडा मारा गया है और पहले से ज्ञात आतंकी अड्डे ध्वस्त कर दिये गये हैं।

इसके बाद जब आतंकियों के समर्थन में पाकिस्तानी सेना आयी तो उसे भी अच्छा खासा सबक सीखाया गया है। फिर भी सैनिकों और आम नागरिकों की जान जाने के बाद भारत को अचानक के इस युद्धविराम का फायदा क्या है, यह जनता को बताना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।