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वक्फ मामले की सुनवाई अब पंद्रह मई से

पूरे देश का ध्यान देश के इस चर्चित मामले पर लगी है

  • सीजेआई खन्ना ने लिया ऐसा फैसला

  • अपने उत्तराधिकारी को सौंपा काम

  • मामला गंभीर है इसलिए टालेंगे नहीं

नईदिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने  वक्फ संशोधन अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं के कुछ विवादास्पद मुद्दों को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए कहा कि पूरे मामले को नामित मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ 15 मई को सुनवाई करेगी।

मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार तथा न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की अध्यक्षता वाली पीठ ने विवादास्पद मुद्दे को स्वीकार करते हुए कहा कि सरकार द्वारा देश की वक्फ संपत्तियों के रूप में पेश किए गए 3921236.459 एकड़ भूमि के आंकड़े पर सर्वोच्च न्यायालय विचार करेगा, जिस पर दूसरे पक्षों द्वारा आपत्ति की जा रही है।

हालांकि, 13 मई को सेवानिवृत्त होने वाले न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि वह अंतरिम चरण में भी इस मामले में फैसला सुरक्षित नहीं रखना चाहेंगे, इसलिए मामले की सुनवाई 15 मई को होगी। नामित मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गवई की अध्यक्षता वाली पीठ मामले की सुनवाई करेगी। पीठ ने वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाले मामलों पर सुनवाई शुरू करते हुए कहा,  हमने जवाबी और जवाबी दलीलों पर गौर किया है।

हां, पंजीकरण और कुछ आंकड़ों पर कुछ मुद्दों पर सवाल उठाए गये हैं, और याचिकाकर्ताओं ने आपत्तियां दर्ज की हैं। इन पर विचार किए जाने की जरूरत है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, इस मामले की सुनवाई किसी भी उचित दिन होनी चाहिए। यह मेरे समक्ष नहीं होगा। हम इसे न्यायमूर्ति गवई की पीठ के समक्ष रखेंगे। शीर्ष अदालत के समक्ष केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘‘हम पीठ से बात करने की कोशिश करेंगे, क्योंकि हर दलील का जवाब होता है, लेकिन वह मुख्य न्यायाधीश को उलझन में नहीं डालेंगे, क्योंकि समय नहीं है।

वक्फ संशोधन अधिनियम का बचाव करते हुए सरकार ने कहा था कि निजी संपत्तियों और सरकारी संपत्तियों पर अतिक्रमण करने के लिए वक्फ प्रावधानों का दुरुपयोग किए जाने की खबरें आई हैं। केंद्र सरकार ने अपने एक हलफनामे में कहा, ‘‘यह जानना वाकई चौंकाने वाला है कि वर्ष 2013 में लाए गए संशोधन (वक्फ कानून में) के बाद वक्फ के क्षेत्रफल में 116 फÞीसदी की वृद्धि हुई है।  मुगल काल से पहले, स्वतंत्रता पूर्व युग और स्वतंत्रता के बाद के युग में, भारत में बनाए गए वक्फों की कुल भूमि 18,29,163.896 एकड़ थी। चौंकाने वाली बात यह है कि 2013 के बाद वक्फ भूमि में 20,92,072.536 एकड़ की वृद्धि हुई है।