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दिल्ली हाईकोर्ट के जज के घऱ से नकदी का मामला उजागर, देखें वीडियो

सुप्रीम कोर्ट ने पूरी रिपोर्ट और वीडियो ही अपलोड किये वेबसाइट पर

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: जज के घर की अलमारी में 15 करोड़ रुपए थे। दिल्ली उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के घर में आग लगने से नकदी का एक बड़ा भंडार बरामद हुआ। इतना सारा पैसा कहां से आया? वह बेहिसाब धन जज के घर में क्यों रखा गया है? इस बार सुप्रीम कोर्ट ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है।

पिछले सप्ताह 14 मार्च को दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के घर में आग लग गई। अग्निशमनकर्मियों ने आग बुझा दी। फिर, जैसे ही वे घर में दाखिल हुए, उनकी आँखें चौड़ी हो गईं। जैसे ही अलमारी खोली गई, उसमें से जले और मुड़े हुए नोटों का बंडल निकला।

देखें इसका वीडियो

सिर्फ एक या दो बंडल नहीं, बल्कि पूरी अलमारी लगभग 15 करोड़ रुपये से भरी हुई थी। इस घटना के प्रकाश में आने के बाद सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने न्यायाधीश का तबादला इलाहाबाद उच्च न्यायालय कर दिया। शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने जज के घर की जांच की रिपोर्ट भी सार्वजनिक की।

रिपोर्ट के साथ दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और आरोपी न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का पत्र भी भेजा गया है। जांच में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह सब सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। वहीं, कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जिनमें जज के घर में जले हुए पैसों के बंडल पड़े दिखाई दे रहे हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से घटना की विस्तृत जांच कराने का अनुरोध किया है।

दूसरी ओर, न्यायमूर्ति वर्मा का दावा है कि वह पूरी तरह निर्दोष हैं। उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है। उसने नोटों के सुव्यवस्थित बंडल को नहीं देखा। नौकरों से लेकर माली तक, यहां तक ​​कि सरकारी सफाईकर्मी भी उस घर का दौरा करते थे जहां पैसा मिलता था। हालाँकि, दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश इस तर्क को स्वीकार करने में अनिच्छुक हैं।

14 मार्च, 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के आवास पर लगी आग में बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई, जिसके बाद न्यायपालिका में संभावित भ्रष्टाचार की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने जांच शुरू की।

सर्वोच्च न्यायालय ने 22 मार्च, 2025 को एक जांच रिपोर्ट जारी की, जिसमें जले हुए नोटों की तस्वीरें और वीडियो शामिल थे, जिन्हें दिल्ली पुलिस आयुक्त ने साझा किया, जिसमें अवैध नकदी के पैमाने पर प्रकाश डाला गया। दूसरी तरफ दमकल विभाग के प्रमुख ने इससे पहले नकदी बरामद होने अथवा नजर आने की बातों का खंडन किया था।

जनता और न्यायिक प्रतिक्रिया बढ़ गई है, आलोचकों का तर्क है कि वर्मा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय – उनकी मूल अदालत – में स्थानांतरित करना अपर्याप्त है, क्योंकि न्यायिक पारदर्शिता और अनिवार्य संपत्ति घोषणाओं पर बहस तेज हो गई है। वैसे अब तीन हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की एक टीम इस मामले की आगे की जांच करेगी।