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तेरे मासूम सवालों से परेशान हूं मैं.. .. .. ..

विश्वगुरु को अमेरिका में उस परेशानी का सामना करना पड़ गया, जिससे वह लगातार बचते चलते हैं। जी हां बिना लाग लपेट के साफ कर देता हूं कि नरेंद्र मोदी जी की बात कर रहा हूं। वह दिल्ली की कुर्सी पर बैठने के बाद से ही कड़वे सवालों से भागते फिर रहे हैं।

इंडिया में तो यह चाल अब तक कामयाब रही है पर अमेरिका में और वह भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में उनसे वही सवाल पूछ लिया गया, जिसपर वह इंडिया में चुप्पी साधे रहते हैं।

अब यह मत कह देना कि उन्होंने प्रेस को इंटरव्यू नहीं दिये हैं पर उनमें पूछा गया सवाल क्या था, यह पब्लिक अच्छी तरह जानती है। अब अगर अभिनेता अक्षय कुमार उनसे आम खाने के बारे में पूछने लगे तो यह मीडिया का सवाल तो नहीं हो सकता। जो चंद मीडिया वाले उनके करीबी हैं, उन्होंने भी सवाल पूछने की औपचारिकता भर पूरी की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरबपति गौतम अडाणी के खिलाफ अमेरिकी अभियोजकों द्वारा लगाए गए रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोपों के बारे में पूछे गए सवाल को टाल दिया, विपक्ष ने उनकी चुप्पी पर सवाल उठाए।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में पीएम मोदी ने कहा कि उनकी द्विपक्षीय बैठक के दौरान ऐसे व्यक्तिगत मामलों पर चर्चा नहीं हुई। प्रधानमंत्री ने कहा, भारत एक लोकतंत्र है और हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम है, हम पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हैं।

मेरा मानना ​​है कि हर भारतीय मेरा है। और जब ऐसे व्यक्तिगत मामलों की बात आती है, तो दो देशों के दो नेता इस विषय पर एक साथ बैठकर किसी व्यक्तिगत मामले पर चर्चा नहीं करेंगे।

इस मुद्दे पर चुप्पी बनाए रखने के लिए विपक्ष ने उन पर हमला किया, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका में भी अडाणी के भ्रष्टाचार को छुपाया। देश में सवाल पूछने पर चुप्पी साध ली जाती है। विदेश में इसे व्यक्तिगत मामला माना जाता है! अमेरिका में भी मोदी ने अडाणी के भ्रष्टाचार को छुपाया।

कांग्रेस सांसद ने कहा, जब मोदी के लिए दोस्तों की जेब भरना राष्ट्र निर्माण है, तो रिश्वतखोरी और देश की संपत्ति लूटना व्यक्तिगत मामला बन जाता है। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब एक पत्रकार ने अडाणी पर सवाल पूछा तो प्रधानमंत्री गुस्से में और घबराए हुए दिखाई दिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री पर भारत में स्क्रिप्टेड साक्षात्कार करने का भी आरोप लगाया। गोखले ने ट्वीट किया, पीएम मोदी को अमेरिका में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए मजबूर किया जाता है – ऐसा कुछ जो उन्होंने भारत में 11 सालों में नहीं किया है। यही कारण है कि वह भारत में कभी भी प्रेस के सवालों का जवाब नहीं देते हैं। यही कारण है कि भारत में उनके ‘साक्षात्कार’ पूरी तरह से स्क्रिप्टेड होते हैं। वह इतने गुस्से में और घबराए हुए हैं।

इसी बात पर एक फिल्मी गीत याद आ रहा है। वर्ष 1983 में एक फिल्म बनी थी मासूम। इस फिल्म के इस गीत को लिखा था गुलजार ने और संगीत में ढाला था आर डी वर्मन ने। इस गीत को लता मंगेशकर और अनूप घोषाल ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

हा.. तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी
हैरान हूँ मैं, हो हैरान हूँ मैं
तेरे मासूम सवालों से
परेशान हूँ मैं, हो परेशान हूँ मैं
तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी
हैरान हूँ मैं, हो हैरान हूँ मैं
जीने के लिए सोचा ही नहीं
दर्द संभालने होंगे
जीने के लिए सोचा ही नहीं
दर्द संभालने होंगे
मुस्कुराये तो मुस्कुराने के
क़र्ज़ उतारने होंगे
मुस्कुराऊं कभी तो लगता है
जैसे होंठों पे क़र्ज़ रखा है
तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी
हैरान हूँ मैं, हो हैरान हूँ मैं
आज अगर भर आई है
बूंदे बरस जाएंगी
आज अगर भर आई है
बूंदे बरस जाएंगी
कल क्या पता इनके लिए
आँखें तरस जाएगी
जाने कब गुम हुआ, कहाँ खोया
इक आंसू छुपा के रखा था
तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी
हैरान हूँ मैं, हो हैरान हूँ मैं
तेरे मासूम सवालों से
परेशान हूँ मैं, हो परेशान हूँ मैं
परेशान हूँ मैं..

लेकिन मसला सिर्फ मोदी जी का ही नहीं है। अब तो भाजपा के दूसरे नेताओं में भी यह बीमारी बर्ड फ्लू जैसी फैलती जा रही है। कड़वे सवालों से भागने से वे सवाल और उनका सामाजिक औचित्य कभी खत्म नहीं होता। इसी वजह से हर नेता का पसंदीदा मीडिया का एक समूह पैदा हो चुका है। अब सवाल तो अनंत काल तक आकाश और वातास में मंडराते ही रहते हैं। सोशल मीडिया का जमाना है तो उत्तर नहीं देने के बाद भी वे खत्म तो नहीं हो जाते।