Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
अयोध्या, राम मंदिर चंदा विवाद या राजनीति का लंकाकांड एकल कोशिका से 170 अरब कोशिकाएं बनती हैं, देखें वीडियो अब ड्रोन से होगी शार्क की निरंतर निगरानी, देखें वीडियो Mann Ki Baat: 'हरगिला चिड़िया' बनी असम के गांवों की पहचान; PM मोदी ने की 'हरगिला सेना' की जमकर तारीफ स्वच्छ यमुना अभियान: सीएम रेखा गुप्ता का श्रमदान, कहा- "अब यमुना में नहीं गिरेगा बिना ट्रीटमेंट वाला... PM Modi Seychelles Visit: सेशेल्स की नेशनल असेंबली में बोले पीएम मोदी; 'भारत और सेशेल्स को जोड़ता है... Waqf Amendment Act: वक्फ संपत्तियों को कानूनी दर्जा दिलाने की प्रक्रिया तेज; 30 जून तक पूरा करें रिक... Amarnath Yatra 2026: सुरक्षा के कड़े इंतजाम; अमरनाथ यात्रा से पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने की बड़ी मॉक र... हरिद्वार: बीमार पत्नी की संदिग्ध मौत का खुलासा, दवा के नाम पर जहर देकर की पति ने हत्या Jabalpur Crime News: फेसबुक पर हिंदू नाम रखकर की दोस्ती, फिर धर्म परिवर्तन और तस्करी की कोशिश; मामला...

दोनों नेताओं का कद तय करेगा झारखंड

फिजूल के जमा खर्च में जमीनी मुद्दे गोल हो गये चुनाव में

  • जल, जंगल और जमीन पर चर्चा नहीं

  • बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा प्रभावी नहीं

  • मईया और गोगो दीदी दोनों रद्दी की टोकरी में

राष्ट्रीय खबर

 

रांचीः झारखंड के विधानसभा चुनाव के असली मुद्दों को भटकाने की पूरी कोशिश हुई है। इसके बाद भी आम जनता और खास तौर पर आदिवासी समाज अपने जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर ही केंद्रित है। इसी वजह से घुसपैठिया और बांग्लादेशियों का प्रचार अब तक धार नहीं पा रहा है।

इसके बीच ही अलग अलग किस्म की बयानबाजी के बाद मईंया योजना ने भी भाजपा की गोगो दीदी योजना को बस्ते में डालने पर मजबूर कर दिया है। कुल मिलाकर अब तक का जमीनी हकीकत यही है कि खास तौर पर आदिवासी इलाकों में अब तक भाजपा पूर्व की स्थिति को पूरी तरह अपने पक्ष में नहीं कर पायी है।

दूसरी तरफ शहरी इलाकों में अब लोकसभा चुनाव जैसी हालत नहीं है और यह माना जा सकता है कि भाजपा ने अपने जोरदार चुनाव प्रचार से कार्यकर्ताओँ को फिर से जोड़ने में कामयाबी पा ली है। भाजपा खेमा की परेशानी सिर्फ यह है कि इस बार के टिकट वितरण से उपजी नाराजगी क्या गुल खिलायेगी, इसका एहसास भाजपा के लोगों को भी सही तरीके से नहीं हो पा रहा है।

इस बार के झारखंड विधानसभा के चुनाव में इंडिया गठबंधन की कमान हेमंत सोरेन के पास है जबकि भाजपा की तरफ से सेनापति की भूमिका में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा है। तय है कि इन दोनों नेताओं में से जो भी चुनावी सफलता हासिल करेगा, दिल्ली दरबार में उसका राजनीतिक कद और ऊंचा होगा।

वैसे भी भाजपा का एक वर्ग दबी जुबान से यह कह रहा है कि भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री के अगले दोनों दावेदार अभी झारखंड की चुनावी जिम्मेदारी उठा रहे हैं। इस चर्चा का अर्थ पहले शिवराज सिंह चौहान का नाम है और उसके बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की दावेदारी है।

खास तौर पर बांग्लादेश का मुद्दा असम में भाजपा की सफलता का कार्ड रहा है। हिमंता इस बार झारखंड में भी इसे ही आजमाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। चुनाव से पहले हेमंत सोरेन ने प्रदेश में मईया योजना चालू कर महिलाओं के बीच पार्टी की पहुंच को काफी हद तक बढ़ा दिया था। इसे महसूस करते हुए भाजपा की तरफ से भी गोगो दीदी योजना के फॉर्म भरे गये।

अब चुनावी रण तेज होने की वजह से महिलाओं से संबंधित यह दोनों ही मुद्दे शायद रद्दी की टोकरी में डाल दिये गये हैं। प्रधानमंत्री की चुनावी जनसभा में भी घुसपैठ का मुद्दा उभारने की कोशिश हुई है। इसका असर कितना हुआ है, यह बाद में स्पष्ट हो पायेगा। लेकिन इतना तय है कि हेमंत और हिमंता के टक्कर का असर सीधे दिल्ली दरबार तक दिखने लगा है।