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बीपी कश्यप के अंडर करंट का एहसास अभी कम है

अब रांची सीट पर सारे पुराने समीकरण बदल सकते हैं

  • समाज सेवा और लोकप्रियता में स्थापित

  • सभी दलों के वोटबैंक में होगा बिखराव

  • सीपी सिंह के खिलाफ दो भाजपायी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः रांची विधानसभा सीट पर दो पुराने प्रतिद्वंद्वियों के बीच मुकाबला दिख रहा है। पिछले चुनाव में भी भाजपा के सीपी सिंह के खिलाफ झामुमो की महुआ मांझी ने चुनाव लड़ा था। दोनों दलों ने इस बार भी अपने इन्हीं दो प्रत्याशियों को दोबारा आजमाने का फैसला किया है। इस रोचक मुकाबले के बीच ही कई नये प्रत्याशियों के सामने आने की वजह से सारे पुराने समीकरण बिगड़ सकते हैं।

वैसे अब तक दोनों प्रमुख दलों को शायद इस अंडर करंट का एहसास भी हो पर राजनीतिक मजबूरी की वजह से वे सार्वजनिक तौर पर इसका खुलासा करने से परहेज ही करेंगे। भाजपा खेमा के दो चेहरे निर्दलीय प्रत्याशियों के तौर पर मैदान में हैं।

कभी सत्ता परिवर्तन के खेल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संदीप वर्मा और पूजा संबंधी गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले चुनमुन राय जाहिर तौर पर भाजपा के वोट बैंक में ही सेंधमारी करेंगे। अब इन दोनों के पीछे भी अदृश्य चेहरे हैं या नहीं यह भाजपा वाले बेहतर समझ सकते हैं। लेकिन इतना तय है कि इन दोनों के होने से सीपी सिंह की चुनावी गाड़ी कुछ खास इलाकों में फंस सकती है।

रांची सीट पर सबसे अधिक उलटफेर प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ बीपी कश्यप के मैदान में आने की वजह से होने की उम्मीद है। आम मतदाताओं को प्रभावित करने लायक व्यक्तित्व और लोकप्रियता पहले से ही उनके पास है। इस नये प्रत्याशी के मैदान में आने की उम्मीद किसी को नहीं थी पर पुराना ट्रैक रिकार्ड यही बताता है कि चुनावी राजनीति में जबर्दस्त प्रभाव छोड़ने के सारे गुण और उपलब्धियां पहले से ही उनके पास मौजूद हैं।

भाजपा और झामुमो के अलावा दोनों प्रमुख निर्दलीय प्रत्याशियों के अपने अपने वोट बैंक के इलाके स्थिर हैं जबकि डॉ कश्यप के लिए लाभ की स्थिति यह है कि वह मूल रुप से झारखंडी होने के साथ साथ विधानसभा ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वी भारत में अपनी चिकित्सा की वजह से ख्यातिप्राप्त हैं।

अतिरिक्त लाभ की स्थिति यह है कि उनकी पत्नी डॉ भारती कश्यप समाज सेवा के क्षेत्र में एक स्थापित नाम है, जिन्होंने अंधापन नियंत्रण के अलावा महिलाओं के सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में भी बड़ा काम किया है।

विधानसभा चुनाव के लिहाज से बात करें तो पूरे इलाके में उन्हें जानने वाले मौजूद हैं और सभी के साथ उनका सीधा रिश्ता रहा है। ऐसे में पारंपरिक चुनावी राजनीति से अलग रहने वाले पढ़ा लिखा वर्ग भी उनके परिचित हैं, जिनमें डाक्टरों के अलावा वकील, प्रोफेसर और अन्य मेधा संबंधी कारोबार से जुड़े लोग हैं।

अपनी पेशा की वजह से वह व्यापारी वर्ग से भी सीधे परिचित हैं और इसी वजह से वह किसी भी अन्य प्रत्याशी के लिए अंडर करंट जैसी चुनौती पैदा कर सकते हैं क्योंकि उनका मानसिक तौर पर समर्थन करने वालों का समर्थन सिर्फ मतदान केंद्रों में ही नजर आयेगा।