Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Tamil Nadu Politics: चेन्नई से दिल्ली तक हलचल; एक्टर विजय ने सरकार बनाने के लिए क्यों मांगा कांग्रेस... Delhi Air Pollution: दिल्ली के प्रदूषण पर अब AI रखेगा नजर; दिल्ली सरकार और IIT कानपुर के बीच MoU साइ... West Bengal CM Update: नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण से पहले कोलकाता पहुंचेंगे अमित शाह; 8 मई को विधाय... West Bengal CM Race: कौन होगा बंगाल का अगला मुख्यमंत्री? सस्पेंस के बीच दिल्ली पहुंचीं अग्निमित्रा प... Crime News: पत्नी से विवाद के बाद युवक ने उठाया खौफनाक कदम, अपना ही प्राइवेट पार्ट काटा; अस्पताल में... Bihar Cabinet Expansion 2026: सम्राट कैबिनेट में JDU कोटे से ये 12 चेहरे; निशांत कुमार और जमा खान के... UP News: 70 साल के सपा नेता ने 20 साल की युवती से रचाया ब्याह; दूसरी पत्नी का आरोप- 'बेटी की उम्र की... प्लास्टिक के कचरे से स्वच्छ ईंधन बनाया MP Govt Vision 2026: मोहन सरकार का बड़ा फैसला; 2026 होगा 'कृषक कल्याण वर्ष', खेती और रोजगार के लिए 2... Wildlife Trafficking: भोपाल से दुबई तक वन्यजीवों की तस्करी; हिरण को 'घोड़ा' और ब्लैक बक को 'कुत्ता' ...

पलामू और वाम मोर्चा का भविष्य महत्वपूर्ण है

कई सीटों पर गठबंधन के बीच ही संघर्ष और दोस्ताना नहीं

  • कांग्रेस और राजद में टक्कर

  • परंपरागत विरोधी मोर्चे पर डटे

  • झामुमो और माले के बीच टक्कर

राष्ट्रीय खबर

रांचीः झारखंड विधानसभा चुनाव में अब यह नहीं कहा जा सकता कि इंडिया गठबंधन एकजुट है। इस निष्कर्ष की खास वजह पलामू की वे सीटें हैं, जहां कांग्रेस और राजद के प्रत्याशी एक साथ खड़े हैं। इसलिए पलामू का चुनावी महत्व भी बढ़ता हुआ दिखने लगा है।

दूसरी तरफ एकजुट रहने का दावा करने वाला वाम मोर्चा भी पूरी तरह एकजुट नहीं है क्योंकि कई सीटों पर उनके अपने घटक दलों के बीच ही मुकाबला है। वैसे इस चुनाव के अब तक के घटनाक्रमों ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी और नेता अपनी जमीन बचाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं, जिसकी वजह से कई चुनावी मुकाबले दोस्ताना लहजे में नहीं लड़े जाएंगे।

भवनाथपुर सीट इसलिए अधिक ध्यान देने योग्य हैं क्योंकि वहां पर दो परंपरागत विरोधी भानू प्रताप शाही और अनंत प्रताप देव एक दूसरे के खिलाफ है। पार्टी कुछ भी हो पर इन दोनों की अदावत का असली मैदान कुछ और ही है। इसलिए प्रत्याशियों का पार्टी बदलना यहां अधिक मायने नहीं रखता है। गठबंधन के तहत विश्रामपुर सीट राजद के हिस्से में आई थी।

कांग्रेस ने भी यहां से सुधीर कुमार चंद्रवंशी को अपना प्रत्याशी बना दिया। इससे नाराज राजद ने कांग्रेस कोटे की छतरपुर सीट पर भी अपना प्रत्याशी दे दिया है। वैसे इस सीट पर बदलाव का माहौल इसलिए भी है क्योंकि भाजपा के कद्दावर नेता रामचंद्र चंद्रवंशी ने काफी पहले से इस बार चुनाव नहीं लड़ने का माहौल बना रखा था।

यहां से राजद ने विजय राम को उतारा है। यहां से पूर्वमंत्री राधाकृष्ण किशोर कांग्रेस के प्रत्याशी है। श्री किशोर का राजनीतिक दौरा कई दलों से होकर गुजरा है और उनके साथ अजीब संयोग है कि वह एक बार चुनाव जीतते हैं तो दूसरी बार पराजित हो जाते हैं।

कुछ ऐसी ही स्थिति भाकपा माले और झारखंड मुक्ति मोर्चा के हिस्से वाली सीटों पर भी पैदा हुई है। धनवार सीट पर भाकपा माले ने राजकुमार यादव को टिकट दिया है, जबकि मोर्चा ने यहां से निजामुद्दीन अंसारी को प्रत्याशी बनाया है। दोनों नामांकन भी दाखिल कर चुके हैं। ऐसे में इंडिया गठबंधन यहां भी आपस में भी टकराता दिख रहा है।

यह भी उल्लेखनीय है कि धनवार से पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी चुनाव मैदान में हैं। मोर्चा और माले के बीच तालमेल नहीं होने का सीधा लाभ उन्हें मिलेगा।

इंडिया गठबंधन की सहयोगी पार्टी राजद के तीन प्रत्याशियों ने अपनी-अपनी सीटों पर गुरुवार को नामांकन दाखिल किया। इनमें कोडरमा सीट पर पार्टी प्रत्याशी सुभाष यादव, विश्रामपुर सीट पर नरेश प्रसाद सिंह व हुसैनाबाद सीट पर संजय कुमार सिंह यादव ने अपना नामांकन दाखिल किया है।

एक दिन पहले चतरा में राजद प्रत्याशी रश्मि प्रकाश ने नामांकन दाखिल किया था। इस प्रकार अब तक चार सीटों पर राजद के प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल कर दिया है। इन घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि कई नेता और दलों के साथ साथ वाम मोर्चा के घटक भी अपनी जमीन बचाये रखने की कोशिशों में जुटे हैं। इस वजह से इन सीटों पर गठबंधन धर्म का पालन नहीं हो रहा है।