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त्रिपुरा के दो उग्रवादी गुटों के साथ शांति समझौता

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहल और मौजूदगी में कार्रवाई

  • तीन दशक से जारी था यह संघर्ष

  • दोनों गुटों ने हथियार डाल दिये हैं

  • पूर्वोत्तर का विकास प्राथमिकता है

नयी दिल्ली: त्रिपुरा में तीन दशक से अधिक समय से चल रहे उग्रवादी हिंसा और संघर्ष से निजात पाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत बुधवार को यहां केन्द्रीय गृह मंंत्री अमित शाह की उपस्थति में राज्य के दो गुट-नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी) तथा आॅल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (एटीटीएफ) ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये।

गृह मंत्री ने इस समझौते को त्रिपुरा में विकास और शांति के लिए एक महत्वूपर्ण समझौता बताया है और कहा कि यह पूर्वोत्तर के विकास के लिए मोदी सरकार के संकल्प को पूरा करने में मील का पत्थर है।

गृह मंत्रालय में आयोजित हस्ताक्षर समरोह में उपस्थित एनएलएफटी और एटीटीएफ के पदाधिकारियों का स्वागत करते हुए श्री शाह ने कहा कि यह आनंद का विषय है कि आपने 35 साल द्वंद्व और संघर्ष को समाप्त करने के लिए हथियार डालकर आप मुख्यधारा में शामिल हुए है और समस्त त्रिपुरा के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

श्री शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद पूर्वात्तर में शांति स्थापना और विकास के लिए बातचीत का रास्ता अपनाने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली और पूर्वाेत्तर के बीच फासले को रेल, सड़क और विमान के जरिये किया ही किया, साथ ही उन्होंने दिलों को जोड़ने का भी काम किया है।

उन्होंने इस संदर्भ में अष्ट-लक्ष्मी और पूर्वाेदय जैसी प्रधानमंत्री के पहल का भी उल्लेख किया। हस्ताक्षर समारोह में मणिपुर के मुख्यमंत्री डॉ माणिक शाह और पूर्व मुख्यमंत्री विप्लव देव, केन्द्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और खुफिया ब्यूरो (आईबी) के निदेशक तपन डेका तथा केन्द्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री के उग्रवाद, हिंसा और संघर्ष से मुक्त, विकसित पूर्वोत्तर के सपने को साकार करने की दिशा में गृह मंत्रालय निरंतर प्रयास कर रहा है। मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर में शांति और समृद्धि बहाल करने के लिए अब तक 12 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें से तीन त्रिपुरा राज्य से संबंधित हैं।

गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि पूर्वोत्तर में शांति स्थापना के लिए पिछले 10 वर्षों में उग्रवादियों के साथ हुए समझौतों में 10 हजार लोग हथियार छोड़ कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए।