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ऐ रहनुमा, तेरे ही आसरे है.. .. .. ..

ऐ रहनुमा कहते हैं तो वे ईश्वर को याद नहीं करते। उनके ध्यान में वह परम शक्तिशाली नेता होता है, जिनके भरोसे ही उनकी दुकान चलती है। इंडियन पॉलिटिक्स में फिलहाल सरकार में ऐसा ही चल रहा है। अपवादों को छोड़ दें तो सारे नेता अपने मोदी जी के भरोसे ही हैं। अब खुद मोदी जी को भी अपनी गारंटी पर कितना भरोसा है, यह नहीं कहा जा सकता।

दरअसल प्रधानमंत्री बनने से पहले वह जो कुछ बोल आये हैं, वे पुराने वीडियो जब दोबारा सामने आते हैं तो डाउट होता है कि कहीं मोदी जी अपने लिए तो यह सारी बातें नहीं कह रहे हैं। रुपया क्यों गिर रहा है, महंगाई क्यों बढ़ रही है, रोजगार क्यों नहीं मिल रहा है वगैरह वगैरह। अपनी सिलिंडर रानी तो इस बार चुनाव हारकर किनारे लग गयी है।

अलबत्ता उनकी जगह पर जो दूसरी अभिनेत्री आयी हैं वह टीवी के पर्दे से नहीं बल्कि फिल्मों से आयी हैं। जी हां मैं कंगना रानौत की बात कह रहा हूं। बेचारी का सामान्य ज्ञान और भारतीय राजनीतिक इतिहास का ज्ञान बहुत कम है। सिर्फ मोदी भक्ति के सहारे राजनीति में संसद तक पहुंचने के बाद उन्हें पता चल रहा है कि यहां पर बतौर सांसद कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।

दूसरी तरफ ममता बनर्जी भी नरेंद्र मोदी से अपने पत्र का उत्तर मांग रही है। दरअसल अब ऐसा लगता है कि कोलकाता के डाक्टर बलात्कार कांड को भी भाजपा संदेशखाली की तरह उछालना चाहती है और राज्यपाल उनके साथ ही हैं। किसी तरीके से पश्चिम बंगाल में टीएमसी का शासन खत्म हो जाए, यही मंशा है। अब देखना है कि जो तूफान वह उठाना चाहते हैं वह प्याली की तूफान बनकर ना रह जाए।

यह चिंता इसलिए भी है क्योंकि हाल के दिनों में शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की जांच एजेंसियों को साफ कह दिया है कि सिर्फ आरोप लगाने से कुछ नहीं होता, आरोप को साबित करने लायक सबूत भी अदालत के सामने होना चाहिए।

इसी बात पर सिद्धार्थ मल्होत्रा और रकूल प्रीत सिंह का यह रोमांटिक गीत याद आने लगा है। इस गीत को लिखकर संगीत में ढाला था एम के ने। इसे अश्विनी मछाल ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल इस तरह हैं

इरादा कर लिया यारा तेरे दिल में ही रहने का

इरादा कर लिया यारा तेरे दिल में ही रहने का

गुजारिश है यहीं तुमसे जगह थोड़ी सी दे देना

गवाह ये आसमां तारे तेरी मेरी मोहब्बत के

रब्ते रब्ब बनता ये रिवायत है आज से मेरा सब कुछ है तेरा

मेरी हर चीज पर हक है तेरा तू मेरा है तो रब है मेरा

ऐ रहनुमा!

सफ़र ये मेरा तुझ तक है मेरा मकान दिल का धोखेबाज है तेरा

तू है जहां मेरी हद है वहां

ऐ रहनुमा!

खुशनुमा सी हर घड़ी तेरे साथ होगी

खुशनुमा सी हर घड़ी तेरे साथ होगी

बिन तेरे ना जिंदगी एक बार सोची

मैं तेरा हूं रहूंगा भी ये दुनिया ना रहे चाहे

जो जाउ दूर तुमसे ना साँसें आये

आज से मेरा सब कुछ है तेरा

मेरी हर चीज पर हक है तेरा

तू मेरा है तो रब है मेरा

ऐ रहनुमा!

सफ़र ये मेरा तुझ तक है मेरा मकान दिल का धोखेबाज है तेरा

तू है जहां मेरी हद है वहां ऐ रहनुमा!

अब झारखंड की भी बात कर लें तो अपने कोल्हान टाईगर यानी चंपई सोरेन अब भाजपा के हो गये। अब भाजपा में चले जाने के बाद उनका हश्र क्या होगा, यह बड़ा सवाल है। उनके अपने इलाके के लोग इस फैसले से खुश नहीं हैं और यह कहने से नहीं चूकते कि अपने बेटे को पॉलिटिकली सेट करने के चक्कर में चंपई दादा ने यह गलत फैसला ले लिया।

उनके अपने मतदाता मान रहे हैं कि चंपई दादा की कमाई हुई प्रतिष्ठा पर उनके पुत्र और प्रेस सलाहकार की दुकानदारी भाजपा मे भी चल पायेगी, इस पर संदेह है क्योंकि जिस सीट पर उनके पुत्र बबलू को खड़ा करने की बात हो रही है, वहां भाजपा की टिकट के दावेदार तो पहले से मौजूद हैं। सो चंपई सोरेन के जाने के बाद रामदास सोरेन के मंत्री बनने से  कोल्हान में क्या उलट पलट होगा, यह चुनाव में पता चल जाएगा।

अब दिल्ली के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को याद कर लें, जहां से सीबीआई और ईडी को साफ साफ हिदायत दी गयी है कि जमानत का विरोध करना है तो पक्का सबूत पेश करो। वरना गवाह की गवाही के भरोसे किसी को जेल में बंद रखने का खेल अब आगे नहीं चलेगा।यानी मान सकते हैं कि शीघ्र ही दिल्ली में मोदी सरकार के लिए नई परेशानी खड़ी होने वाली है।जिस दिन अरविंद केजरीवाल और  सत्येंद्र जैन जेल से बाहर निकले, दिल्ली भाजपा के बुरे दिन फिर से शुरु हो जाएंगे।