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महंगाई डायन खाये जात है.. .. ..

भारत का मैंगो मैन बहुत एहसान फरामोश है। इतनी तकलीफ से रसोई गैस के दाम दो सौ रुपये कम किये। उसके बाद भी वे पता नहीं क्यों खुश नहीं है। ऊपर से मुंबई में गुपचुप मीटिंग कर इंडिया वालों ने जो चाल चली वह तो सरकार के माथे पर शिकन लाने के लिए काफी है। वैसे यह मानना पड़ेगा कि मेन स्ट्रीम मीडिया को दरकिनार कर सीधे अपनी बात जनता तक पहुंचाने का हुनर इंडिया वाले सीख गये हैं। बदलते समीकरणों से मीडिया वालों का भी टेंशन बढ़ गया है क्योंकि वह भी जानते हैं कि अगर सरकार बदली तो उनकी भी दुकानदारी बंद हो जाएगी। इनमें से कितने लोग जेल के अंदर होंगे, यह बात की बात है। फिर भी मौका देखकर चौका लगाना कौन भला छोड़ता है।

इंडिया वालों को मिल रही सफलता में दरअसल मोदी जी का ही हाथ है। उन्होंने ही जता दिया कि मेन स्ट्रीम मीडिया पर उनका कब्जा है। इसलिए भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी ने पहली बार जब नया दांव आजमाया तो बाकी लोगों की आंखें खुल गयी। अब तो मोदी समर्थक चैनल और अखबार वालों से कोई विरोधी नेता बात भी नहीं करता।

अब इंडिया की बैठक में भी जो बातें निकल कर आयी है, उससे साफ हो गया है कि इंडिया गठबंधन ने मान लिया है कि सोशल मीडिया के जरिए ही सीधे जनता तक पहुंचना है। इसका परिणाम है कि भाजपा समर्थकों द्वारा पीएम का चेहरा कौन, विपक्ष में टकराव जैसे प्रचार अब जगह नहीं बना पा रहे हैं। ऊपर से भाजपा आईटी सेल का प्रचार भी धार खो चुका है। कुल मिलाकर साफ होता जा रहा है कि इस किसिम की सम्मिलित चुनौती ने मोदी सरकार को डरा दिया है। ऊपर से सिलिंडर रानी ने फिर से बयान देकर जनता को जख्मों को कुरेदने का काम किया है।

इसी बात पर फिल्म पिपली लाइव का यह गीत फिर से चर्चा में आ गया है। इस गीत को कभी चुनाव में भाजपा वालों ने कांग्रेस के खिलाफ आजमाया था। अब दो सौ रुपये गैस सिलंडर का दाम कम करने के बाद भी खुद भाजपा इसकी जाल में फंसी हुई है। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

सखी सैयां तोह खूब ही कमात है, महंगाई डायन खाए जात है
सखी सैयां तोह खूब ही कमात है महंगाई डायन खाए जात है
हर महीने उछले पेट्रोल डीजल का उछला है रोले
शक्कर बाई के काहे बोल

हर महीने उछले पेट्रोल डीजल का उछला है रोले
शक्कर बाई के काहे बोल
उस्सा बाँस माटि दांग मरि जात है महंगाई डायन खाए जात है
सखी सैयां तोह खूब ही कमात है महंगाई डायन खाए जात है
सोया बीन का का बेहाल गर्मी से पिचके हैं गाल
घिर गए पट्टे
अरे सोया बीन का का बेहाल गर्मी से पिचके हैं गाल
घिर गए पट्टे
और मक्का जी जी भी खाये गयी मात है महंगाई डायन खाए जात है
सखी सैयां तोह खूब ही कमात है महंगाई डायन खाए जात है
सखी सैयां तोह खूब ही कमात है महंगाई डायन खाए जात है
अरे कडू की हो गयी बरमार ककडी ने करगे हाहाकार
मटर भी तोह लागो प्रसाद अरे कडू की हो गयी बरमार
ककडी ने करगे हाहाकार मटर भी तोह लागो प्रसाद
और आगे का कहुँ काहे नहिं जात है महंगाई डायन खाए जात है
सखी सैयां तोह खूब ही कमात है महंगाई डायन खाए जात है
सखी सैयां तोह खूब ही कमात है महंगाई डायन खाए जात है
ए सइयां, मोरे सइयां रे खूब कमाएं
अरे कमा कमा के मर गए सइयां
पहले तकड़े तकड़े थे अब दुबले पतले हो गए सइयां
अरे कमा कमा के मर गए सइयां

मोटे सइयां पतले सइयां अरे सइयां मर गए
हमारे किसी आये गए में महंगाई डायन मारे जात है
सखी सैयां तोह खूब ही कमात है महंगाई डायन मारे जात है
सखी सैयां तोह खूब ही कमात है महंगाई डायन खाए जात है
महंगाई डायन खाए जात है।

अब संसद के बिना एजेंडा वाले सत्र में क्या कुछ होगा नहीं पता लेकिन यह तय है कि इंडिया वाले इस मौके पर भी अडाणी मुद्दे पर सरकार पर हमला बोलेंगे क्योंकि उन्हें पता है कि यह एक ऐसा कमजोर नस बन गया है, जिसे दबाने से सरकार बिलबिलाने लगती है। सरकार की मसल पॉवर भी पंद्रह सितंबर के बाद कैसे रहेगा, यह तय नहीं पर अब तो इंडिया खेमा के लोग इस ईडी को ही चुनौती देने लगे हैं। हर कोई मान रहा है कि इसके पीछे का पॉलिटिकल एजेंडा क्या है और किसे निशाने पर लेने की तैयारी है। फिर भी राहुल गांधी ने यह बोलकर टेंशन बढ़ा दिया है कि इंडिया की बैठक में जुटे लोग भारतवर्ष की साठ प्रतिशत आबादी वाले इलाके का प्रतिनिधित्व करते हैं। अब किसमें कितना दम है, यह आजमाने की तैयारी चल रही है।