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हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई शीघ्र होगी

कोलकाता से रांची तक है रामगढ़ के निलंबन का असर


  • फोन टैपिंग का मामला चर्चा में आया

  • राज्यसभा हार्स ट्रेडिंग की भी चर्चा हुई

  • जांच बाहर गयी तो कई फंस जाएंगे


राष्ट्रीय खबर

रांचीः झारखंड उच्च न्यायालय में दायर एक मामला कई गड़े मुर्दे उखाड़ रहा है। रांची के एक अधिवक्ता को कोलकाता में गिरफ्तार किये जाने के बाद से इस मामले के पेंच खुलने लगे थे।

अब एक अन्य मामले में अगर अदालत ने किसी दूसरी एजेंसी से जांच कराने का आदेश दे दिया तो कई चेहरे बेनकाब होंगे, ऐसा लोगों का मानना है। वैसे दानिएल दानिश को धमकाने की सीडी भी अदालत में दाखिल है और उसमें जो कुछ कहा गया है, वह अब सार्वजनिक डोमेन में है।

लिहाजा इस केस में अदालत का एक फैसला भी झारखंड में भूचाल ला सकता है। दरअसल इस मामले को गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि रांची पुलिस ने इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है।

इसी से जुड़ा राज्यसभा हार्स ट्रेडिंग का मामला भी रांची पुलिस ने बंद कर दिया है। जिसमें बाबूलाल मरांडी ने ही सीडी  जारी कर रघुवर दास के पक्ष में एक पुलिस अधिकारी तथा रघुवर दास के प्रेस सलाहकार के खिलाफ दबाव बनाने का आरोप लगाया था।

अब कनीय अफसरों ने अपने ऊपर के अधिकारी के खिलाफ कौन सी जांच की, यह सवाल नीचे से ऊपर तक पुलिस विभाग को परेशान कर रहा है क्योंकि कानून के जानकार मानते हैं कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी किसी दूसरी एजेंसी को दे दी जाती है। अब रांची के जिम्मैदार आईपीएस अफसर इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से पीछा कैसे छुड़ा सकेंगे, यह बड़ा सवाल है। अदालत में सुनवाई के दौरान जाहिर तौर पर उपलब्ध साक्ष्यों को नजरअंदाज किये जाने पर उठने वाले सवाल भी रांची पुलिस को परेशान में डालने वाले होंगे।

वैसे पूरे घटनाक्रम में रामगढ़ थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अजय साहू का निलंबन भी कई मामलों को जिंदा कर गया है। वैसे तो एक एएसआई पर दबाव बनाने को लेकर इंस्पेक्टर निलंबित किये गये हैं। फिर भी सरयू राय द्वारा उठाया गया मुद्दा फिर से बहस के केंद्र में है। विधायक सरयू राय ने ही फोन टैपिंग का मामला उठाया था, जिसकी जांच की गयी थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सीआईडी के तत्कालीन डीएसपी ने डोरंडा थाना में फोन टैपिंग का यह मामला दर्ज कराया था। इस मामले में सीआईडी की तकनीकी शाखा के अफसरों के द्वारा पुलिस अफसरों और स्पेशल ब्रांच के पुलिसकर्मियों के मोबाइल फोन टैप किये जाते थे।

फोन टैपिंग के मामले में सीआईडी ने तत्कालीन तकनीकी सेल प्रभारी इंस्पेक्टर अजय कुमार साहू समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी थी। अब नये सिरे से यह घटना फिर से गड़े मुर्दे की तरफ उखड़ गया है। मामले की जद में आने वाले कई अफसर अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं और इसके तार कोलकाता से रांची तक  जुड़े होने की वजह से ही रामगढ़ का मामला पूरे झारखंड के पुलिस विभाग की नजरों में है। कई सेवानिवृत्त अधिकारी इसंमे जातिगत समीकरणों पर भी ध्यान देने की बात कह रहे हैं।