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ईडी की छापामारी से पुलिस मुख्यालय में बढ़ी हलचल

  • अफसरों के मनमुटाव का कारण रहा है

  • मामला और खुला तो कई और नपेंगे

  • शराब नहीं कोयला घोटाला भी खुलेगा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः ईडी की कार्रवाई में योगेंद्र तिवारी निशाने पर आते ही पुलिस मुख्यालय में चर्चा का बाजार गर्म हो गया है। दरअसल पुलिस मुख्यालय में खास तौर पर पैरवी करने वाले सुधीर सिंह को योगेंद्र तिवारी का करीबी समझा जाता है। पुराने अफसरों की मानें तो पैरवी और अलग अलग किस्म की दलाली करने वाला यह व्यक्ति योगेंद्र तिवारी के यहां ही रहा करता था। इसके अलावा कई और नाम इसी वजह से चर्चा में आ गये हैं। लोगों का आकलन है कि योगेंद्र तिवारी पर छापामारी दरअसल हेमंत सोरेन पर घेराबंदी है पर इसमें पुलिस के कई अधिकारी भी लपेटे में आ सकते हैं।

सुधीर सिंह के बारे में कहा जाता है कि वह पहले भी कई पूर्व डीजीपी का करीबी रह चुका है लेकिन पिछली बार किसी विवाद की वजह से मुख्यालय में उसके आने जाने पर पाबंदी लगा दी गयी थी। हाल के दिनों में उसे फिर से पुलिस मुख्यालय में देखा जा रहा है। इस वजह से योगेंद्र तिवारी के साथ उसका नाम जुड़ रहा है। इस कड़ी में कई और नाम भी चर्चा में आ गये हैं। इनमें हजारीबाग के किसी प्रधान के अलावा केडिया और संथालिया भी हैं। सुधीर सिंह के बारे में पता चला है कि उसकी वजह से कई अधिकारियों के बीच भी पिछले दिनों जबर्दस्त मनमुटाव जैसी स्थिति आने के बाद दोनों तरफ से जमकर पत्राचार भी हुआ था। यह मामला भले ही अभी ठंडे बस्ते में है लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक यहां पहले से ही वरीय अधिकारियों के बीच तालमेल की भीषण कमी है। इस कमी को दूर करने का प्रयास मुख्यमंत्री के स्तर पर होना था जो नहीं किया गया। इसकी वजह से कई विभागों में नीचे से ऊपर तक अफसर दो खेमों में बंट गये हैं। पुराने लोगों के मुताबिक यह ऐसी कोई सूचना नहीं है, जिसकी जानकारी विभाग में नीचे से ऊपर तक के लोगों को नहीं थी। किस अधिकारी का कौन सा दलाल है, यह जगजाहिर बात है। लेकिन अब योगेंद्र तिवारी पर हुई छापामारी के बाद शराब के साथ साथ कोयला का राज भी अगर खुल गया तो एसपी रैंक के कई अफसरों पर भी शामत आ सकती है।

ईडी की कार्रवाई के बारे में पुलिस के कनीय अफसर मानते हैं कि दरअसल अब हेमंत सोरेन के घेरने की तैयारी है लेकिन अगर इसमें दूसरी जानकारियों को भी ईडी ने खंगालना प्रारंभ कर दिया तो इसकी चपेट में झारखंड पुलिस के दो दर्जन से अधिक अफसर आ जाएंगे, जिसे लेकर तरह तरह की बातें चल रही है।