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घोटाले के सबूत आम आदमी को नहीं दिखते

दिल्ली की एक अदालत ने 20 जून को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत दे दी, जिन्हें प्रवर्तन निदेशालय ने 2021-22 की अब समाप्त हो चुकी दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ़्तार किया था। वैसे प्रारंभ से ही आम जनता की नजरों में यह पूरा मामला ही राजनीतिक था क्योंकि पैसे के लेनदेन के साक्ष्य प्रारंभ से ही नहीं मिले थे।

तब से अब तक सिर्फ अन्य तर्को के आधार पर ईडी इसे एक मनी लॉंड्रिंग का मामला बतायी आयी है। राउज एवेन्यू कोर्ट के अवकाश न्यायाधीश न्याय बिंदु ने श्री केजरीवाल और ईडी की लंबी सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। 20 जून की शाम को खुली अदालत में न्यायाधीश ने जमानत आदेश सुनाया।

इस आदेश पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने फिलहाल सुनवाई पूरी होने तक रोक लगा दी है

आदेश सुनाए जाने के तुरंत बाद, ईडी के वकील ज़ोहेब हुसैन ने प्रार्थना की कि क्या जमानत बांड पर हस्ताक्षर करने को 48 घंटे के लिए टाला जा सकता है ताकि केंद्रीय एजेंसी को अपीलीय अदालत के समक्ष चुनौती दी जा सके। अदालत ने इस प्रार्थना को खारिज कर दिया और घोषणा की कि 21 जून को ड्यूटी जज के समक्ष जमानत बांड पेश किया जाएगा। दिल्ली के मुख्यमंत्री को ईडी ने 21 मार्च को गिरफ़्तार किया था। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि श्री केजरीवाल दिल्ली आबकारी नीति घोटाले के सरगना थे। कई सप्ताह जेल में रहने के बाद उन्हें 10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करने के लिए रिहा कर दिया।

2 जून को वे फिर जेल चले गए, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें और राहत देने से इनकार कर दिया था। श्री केजरीवाल ने इस महीने की शुरुआत में राउज एवेन्यू कोर्ट में दो जमानत याचिकाएं दायर की थीं, जिनमें से एक इलाज के लिए सात दिनों की जमानत के लिए थी, जिसे 5 जून को खारिज कर दिया गया था। दूसरी अर्जी नियमित जमानत की थी, जिसे 20 जून को मंजूर कर लिया गया था।

श्री केजरीवाल के खिलाफ मामला दिल्ली के उपराज्यपाल की शिकायत पर सीबीआई द्वारा शुरू में दर्ज की गई एफआईआर पर आधारित था, जिसमें दिल्ली आबकारी नीति-2021-22 में कई अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था, जिसे बाद में राज्य द्वारा वापस ले लिया गया था। सीबीआई के मामले के बाद, ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत एक मामला दर्ज किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि आबकारी नीति के माध्यम से अर्जित धन को हवाला चैनलों के माध्यम से 2022 में गोवा में विधानसभा चुनावों से पहले आप के अभियान पर खर्च किया गया था।

सीबीआई और ईडी ने इस मामले में दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और बीआरएस नेता के कविता सहित कई गिरफ्तारियां की हैं। सुश्री कविता और श्री सिसोदिया जेल में बंद हैं, जबकि श्री सिंह को इस साल की शुरुआत में जमानत मिल गई थी।

वैसे आरोपों के संबंध में ठोस साक्ष्य यानी वाकई पैसे का लेनदेन हुआ है, यह अब तक जनता की समझ से परे ही है। ईडी ने दिल्ली के सीएम की जमानत याचिका का विरोध करते हुए अदालत में कहा था कि आरोपी गोवा में एक सात सितारा होटल में रुके थे, जिसका बिल रिश्वत के पैसे से चुकाया गया था। ईडी ने यह भी कहा कि श्री केजरीवाल ने भले ही अपराध नहीं किया हो, लेकिन वे आप के मामलों के लिए जिम्मेदार हैं और अगर आप किसी अपराध के लिए दोषी है तो वे भी अपराध के लिए दोषी हैं।

ईडी के दावों का जवाब देते हुए श्री केजरीवाल का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी ने कहा कि ईडी ने अपने सभी निष्कर्ष परिकल्पना के आधार पर निकाले हैं और एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोप के अनुसार कोई मनी ट्रेल नहीं है। इस एक जमानत से भी भारतीय राजनीति की दिशा बदल सकती है।

दरअसल पीएमएलए कानून की नींव रखने वाल पूर्व मंत्री पी चिंदावरम खुद स्वीकार कर चुके हैं कि इस कानून का ऐसा भी गलत उपयोग किया जा सकता है, यह उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था।तमाम विपक्ष यह लगातार आरोप लगाता आ रहा है कि ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स के जरिए सरकार विरोधियों को कुचलना चाहती है।

इन्हीं दबावों के आगे अनेक लोग झूक गये और भाजपा के साथ हो गये हैं। कई राज्यों की सरकारों में उठापटक भी इन्हीं एजेंसियों की बदौलत किया गया। अब अरविंद केजरीवाल के जमानत पर बाहर आने के बाद निश्चित तौर पर एक बार फिर से इस कानून के दुरुपयोग पर बहस प्रारंभ होगी, जिसमें अजीब तथ्य यह है कि इसमें अभियुक्त को ही यह साबित करना होता है कि वह निर्दोष है। वरना अन्य भारतीय कानूनों में अभियुक्त को दोषी साबित करना जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी होती है।