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नये नेत्र चिकित्सकों ने देखी लाइव सर्जरी, देखें वीडियो

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने नेत्रदान जागरुकता अभियान की सराहना की

  • आधुनिक चिकित्सा विधियों की जानकारी

  • एक्सीलेंस एवार्ड से सम्मानित हुए डॉक्टर

  • ग्लूकोमा से लेकर रेटिना तक की शल्य चिकित्सा

राष्ट्रीय खबर

रांची: आज 3 मई को झारखंड ऑप्थलमोलॉजिकल सोसाइटी के तत्वधान में नेत्र रोग विशेषज्ञों के 21 वें वार्षिक सम्मेलन के पहले दिन डेफर्ड लाइव सर्जरी सत्र का आयोजन कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल, रांची में किया गया। जिसे कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल के सभागार में मौजूद झारखंड के सभी नेत्र चिकित्सकों ने देखा और सर्जनो से सवाल-जवाब किया। डॉ बिभूति कश्यप और डॉ निधि गडकर कश्यप इस डेफर्ड लाइव सर्जरी के संयोजक थे।

देखें इस कार्यक्रम का संक्षिप्त वीडियो

डेफर्ड लाइव सर्जरी के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय नेत्र सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ समर बसाक थे। ज्ञातव्य हो की इस अखिल भारतीय नेत्र सोसाइटी के 82वें वार्षिक अधिवेशन के उद्घाटन सम्मारोह में एजुकेशनल एवं साइंटिफिक गतिविधियों के लिए सर्वश्रेष्ठ स्टेट सोसाइटी के राष्ट्रीय अवार्ड से लगातार दूसरी बार सम्मानित किया गया है।

इस अवार्ड को प्राप्त करने के लिए झारखंड के जिन नेत्र चिकित्स्कों ने मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, नेत्रदान एवं डायबिटिक रेटिनोपैथी के क्षेत्र में जन-जागरूकता अभियान चलाया और जिन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के प्रशिक्षण के लिए कार्य किया, उन्हें अखिल भारतीय नेत्र सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ समर बसाक ने झारखंड एक्सीलेंस अवार्ड से  सम्मानित किया। झारखंड एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित होने वाले संस्थान एवं डॉक्टर्स  निम्नलिखित थे – रियो रिम्स रांची, कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल रांची, सीसीएल रांची, बोकारो जनरल हॉस्पिटल, जमशेदपुर तथा धनबाद नेत्र सोसाइटी, डॉ पिंकी पाल, डॉ प्रीतिश प्रोणोय, डॉ राशि श्याम।

झारखंड नेत्र सोसाइटी की चेयरपर्सन साईंटीफिक कमिटी डॉ भारती कश्यप ने बताया, नेत्र सोसाइटी की वार्षिक कांफ्रेंस के डेफर्ड लाइव सर्जरी सत्र में माइनस पॉवर कम करने के ऑपरेशन से लेकर पलक, ग्लूकोमा, मोतियाबिंद, रेटिना की 11 तरह की नयी-नयी सर्जिकल तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।

डॉ समर बसाक ने कहा कि यह सभी लोगों को पता है कि नेत्रदान से बड़ा और कोई दान नहीं है। बावजूद इसके नेत्रदान की जितनी आवश्यकता है वह पूरी नहीं हो पाती है। इसकी वजह लोगों में जागरूकता की कमी है। लेकिन झारखंड में नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक कराने में कश्यप मेमोरियल आई बैंक और आई डोनेशन अवेयरनेस क्लब ने जितना प्रयास किया है, उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाये, वह कम ही होगी।

लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल रन फॉर विजन का आयोजन और उसमें बड़ी-बड़ी हस्तियों का शिरकत करना, इस प्रयास को चार चांद लगाता है। उन्होंने नेत्रदान पर जोर देते हुए कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले दिनों में भी कश्यप मेमोरियल आई बैंक और आई डोनेशन अवेयरनेस क्लब के संयुक्त प्रयास से अंधे लोगों की आंखों में रोशनी लाने में काफी हद तक सफल होंगे।

डेफर्ड लाइव सर्जरी पहले कैटरेक्ट सत्र में डॉ बी. पी. कश्यप, डॉ राजेंद्र प्रसाद, डॉ अरविन्द मौर्या एवं डॉ पार्थो बिस्वास ने कड़े हो चुके एवं पके हुए सफेद मोतियाबिंद में अलग-अलग नवीन सुरक्षित तकनीकों का प्रदर्शन किया जिसे झारखंड के सभी नेत्र चिकित्सकों एवं सभी शिक्षण संस्थाओं के नेत्र विभाग के छात्रों ने देखा और सिखा।

डेफर्ड लाइव सर्जरी के दूसरे ग्लूकोमा सत्र में डॉ साहेबान सेठी ने ग्लूकोमा सर्जरी की मिनीमली इनवेसिव ग्‍लूकोमा सर्जरी (एमआईजीएस) नई तकनीक को प्रदर्शित किया। यह नई तकनीक भारत में ग्लूकोमा रोगियों के लिए एक क्रांतिकारी आशा की किरण के रूप में उभरी है। यह मौजूदा पारंपरिक ग्लूकोमा सर्जरी की तुलना में अत्यधिक सुरक्षित है, आंख के लिए कम चोटिल और जल्द रिकवरी होती है।

डेफर्ड लाइव सर्जरी के तीसरे रेटिना सत्र में आखों के पर्दे के बीच के भाग मैक्यूला में हुए छेद की जटिल सर्जरी का प्रदर्शन किया गया। डेफर्ड लाइव सर्जरी के चौथे सत्र में झारखंड के प्रख्यात नेत्र सर्जन डॉ बी पी कश्यप के द्वारा आई.पी.सी.एल. के प्रत्यारोपण के तकनीक से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव साझा किया गया, हाई माइनस पावर या पतले कॉर्निया या सूखी आँखों के ऐसे मरीजों में आई.पी.सी.एल. प्रत्यारोपण लाभप्रद होता है जिनका लासिक लेसर के द्वारा माइनस पॉवर कम नहीं किया जा सकता है। डेफर्ड लाइव सर्जरी के पांचवें लीड सर्जरी सत्र में डॉ अक्षय नायर के द्वारा झुकी हुई पलक की आधुनिक एम.एम.सी.आर. सर्जरी का प्रदर्शन किया गया।