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उच्च न्यायालय ने केजरीवाल की याचिका खारिज की

अदालती फैसले के पहले ही आप और भाजपा के बीच बयान युद्ध


  • अब शीर्ष अदालत तक जाएगा यह मामला

  • आप को को इसी फैसले की उम्मीद थी

  • भाजपा ने कहा चोर पकड़ा जा चुका है


राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिका खारिज किए जाने के बाद आज आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच तीखी नोकझोंक प्रारंभ हो गई। आप ने दिल्ली और पंजाब में आप सरकारों को नष्ट करने के लिए एक राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया, भाजपा ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में सत्तारूढ़ पार्टी बेनकाब हो गई है और श्री केजरीवाल सरगना हैं। आप ने कहा है कि वह फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा एकत्र की गई सामग्री से पता चलता है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपराध की आय को छिपाने में सक्रिय रूप से शामिल थे। केजरीवाल ने आरोपियों से सरकारी गवाह बने लोगों के बयानों पर सवाल उठाया था, जिसके बारे में उन्होंने दावा किया था कि यह ईडी द्वारा उनके खिलाफ पेश किया गया एकमात्र सबूत है। तर्क पर विस्तार से विचार करते हुए, न्यायालय ने टिप्पणी की कि अभियोजन में सरकारी गवाहों के संबंध में कानून 100 वर्षों से अधिक समय से अस्तित्व में है, और यह एक वर्ष पुराना नहीं है। सरकारी गवाह के बयान दर्ज करने के तरीके पर संदेह करना अदालत और न्यायाधीश पर आक्षेप लगाने के समान होगा। कोर्ट ने कहा, ऐसा नहीं कहा जा सकता कि यह कानून केजरीवाल को फंसाने के लिए बनाया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि देश में किसी मुख्यमंत्री के लिए अलग से कोई कानून नहीं है।

अदालत ने आज इस आरोप पर भी विचार किया कि केजरीवाल के खिलाफ बयान देने वाले दो सरकारी गवाह भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं। मामले में केजरीवाल को कथित रिश्वत से जोड़ने वाले तीन बयानों में से दो व्यवसायी सरथ चंद्र रेड्डी और उनके पिता मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी, जो भाजपा की सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी के लोकसभा उम्मीदवार हैं, के थे।

केजरीवाल के वकील ने रेड्डी के बयान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया था, यह देखते हुए कि उनकी कंपनी अरबिंदो फार्मा ने चुनावी बांड के माध्यम से भाजपा को करोड़ों रुपये का भुगतान किया था।

इस अदालत की राय में, कौन किसे चुनाव लड़ने के लिए टिकट देता है या कौन किस उद्देश्य के लिए चुनावी बांड खरीदता है, यह इस अदालत की चिंता का विषय नहीं है। अदालत की राय है कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसकी गिरफ्तारी और रिमांड की जांच कानून के मुताबिक की जानी चाहिए, न कि चुनाव के समय के मुताबिक। न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि न्यायालय का संबंध संवैधानिक नैतिकता से है, न कि राजनीतिक नैतिकता से।

फैसले के तुरंत बाद भाजपा सांसद और दिल्ली में पार्टी के प्रमुख नेता मनोज तिवारी ने एक्स पर पोस्ट किया, अपराधी तो अपराधी होता है। भाजपा प्रवक्ता शाजिया इल्मी ने कहा कि मनी ट्रेल स्थापित हो चुका है और आप नेताओं के खिलाफ बहुत सारे सबूत हैं। भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि उच्च न्यायालय के फैसले ने तथ्यात्मक आधार पर आप के घमंड को चकनाचूर कर दिया है।

आप नेता और दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने पलटवार करते हुए कहा कि ईडी और सीबीआई को एक रुपया भी नहीं मिला। गवाहों पर अपने बयान बदलने और वही कहने के लिए दबाव डाला गया है जो ईडी उनसे कहना चाहती है। उन्होंने कहा, यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग का नहीं है। यह भारत के इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक साजिश है। वैसे अदालत का फैसला आने के पहले ही आप ने यह संकेत दे दिया था कि इस अदालत से केजरीवाल के खिलाफ ही फैसला आयेगा।