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भाजपा की चाल कहीं उल्टी ना पड़ जाए

दिल्ली के मुख्यमंत्री को आबकारी घोटाले में सीबीआई ने पूछताछ के लिए बुलाया है। वह पूरे तामझाम के साथ वहां जाने वाले हैं। दूसरी तरफ उनके आने की घोषणा के बाद दिल्ली पुलिस के करीब एक हजार जवानों को सीबीआई कार्यालय के आस पास सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है। यह सभी सामान्य बातें हैं।

इसमें देखने वाली बात है कि लगातार घोटाला और पैसे का गबन का आरोप लगने के बाद भी सीबीआई अथवा ईडी कोई ऐसा साक्ष्य सामने नहीं ला पायी है, जो जनता को भरोसेमंद लगे। इस वजह से यह आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है कि मोदी सरकार दरअसल अपने विरोधियों के दमन के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस तरीके से दुरुपयोग कर रही है।

ऊपर से अरविंद केजरीवाल ने राजधानी के शराब नीति मामले में सीबीआई द्वारा तलब किए जाने के एक दिन बाद आज कहा कि अदालतों को झूठ बोला जा रहा है, गिरफ्तार लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है और किसी भी गलत काम का कोई सबूत नहीं है।

उन्होंने दावा किया कि एजेंसियों ने झूठा दावा किया है कि 14 फोन नष्ट कर दिए गए, हलफनामों में अदालतों में झूठ बोलना, झूठे कबूलनामे निकालने के लिए संदिग्धों को प्रताड़ित करना और कल देखेंगे कि आपकी बेटी कल कॉलेज कैसे जाती है जैसी घिनौनी धमकियां दे रही हैं। जाहिर सी बात है कि यह मुद्दे अगर सही हैं तो अदालत में सीबीआई और ईडी को भी संदेह के घेरे में खड़ा कर देंगे।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महीनों की जांच और उनके पूर्व डिप्टी मनीष सिसोदिया सहित दर्जनों गिरफ्तारियों के बावजूद, एजेंसियों को अवैध रूप से अर्जित संपत्ति का एक पैसा भी नहीं मिला है, जिसका दावा है कि तथाकथित शराब घोटाले से इकट्ठा किया गया था। श्री केजरीवाल के मुताबिक जब उन्हें छापे में कुछ नहीं मिला, तो उन्होंने कहा कि पैसा हमारे गोवा चुनाव अभियान में लगाया गया था।

इसका सबूत कहां है? हमारे सभी भुगतान चेक के साथ किए गए थे। मुझे 100 करोड़ रुपये का एक रुपया दिखाओ, जिसका तुम दावा करते हो कि हमें मिल गया। साथ ही उन्होंने प्रतिप्रश्न किया कि अगर मैं बिना सबूत के कहूं कि मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 17 सितंबर की शाम 7 बजे 1,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया है, तो क्या आप उन्हें गिरफ्तार कर लेंगे।

केजरीवाल ने कहा दिल्ली की वही आबकारी नीति को पंजाब में लागू किया गया। इसके परिणामस्वरूप वहां के राजस्व में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह एक गेम-चेंजिंग और पारदर्शी नीति थी। सीबीआई इन आरोपों की जांच कर रही है कि पिछले साल दिल्ली सरकार द्वारा लागू की गई शराब नीति, जिसने राजधानी में शराब की बिक्री पर सरकारी नियंत्रण को समाप्त कर दिया, ने निजी खुदरा विक्रेताओं को अनुचित लाभ दिया।

श्री केजरीवाल की सरकार के उच्चतम स्तर की ठगी में शामिल होने का आरोप लगाते हुए, एजेंसी ने दावा किया है कि पॉलिसी में एहसान के लिए करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया था और पिछले साल गोवा में उनकी पार्टी के चुनाव अभियान में फ़नल लगाया गया था।

फरवरी में मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी इस मामले में अब तक की सबसे हाई प्रोफाइल गिरफ्तारी थी। श्री केजरीवाल को समन, जिनका राजनीतिक करियर 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के साथ शुरू हुआ, जिसने देश को बहलाया, उनकी 10 साल पुरानी पार्टी के रूप में आता है, जिसे हाल ही में एक राष्ट्रीय संगठन का दर्जा दिया गया है।

इसलिए इस बात से अब इंकार नहीं किया जा सकता है कि वाकई आम आदमी पार्टी अब एक मजबूत राजनीतिक विकल्प है और अपने दिल्ली मॉडल की बदौलत उसने जनता को नई उम्मीद देने का काम किया है। दिल्ली नगर निगम का चुनाव परिणाम इस बात का प्रमाण है कि वहां की जनता को अब भी केजरीवाल के विकास मॉडल पर भरोसा है।

दूसरी तरफ यह बात भी जोर पकड़ती जा रही है कि लोकसभा चुनाव के पहले जिस दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग भाजपा की तरफ से भी किया जा रहा है, वह मांग अब गायब क्यों हो गयी है। आम लोग इस बात को अच्छी तरह समझ रहे हैं कि अगर दिल्ली की पुलिस केजरीवाल की सरकार के अधीन आ गयी तो भाजपा वालों की शामित आ जाएगी।

वैसे दिल्ली के बाद पंजाब और गुजरात में संतोषजनक वोट प्रतिशत पा लेने के बाद अन्य राज्यों में यह पार्टी जिस तरीके से फैल रही है, वह भाजपा के लिए जाहिर तौर पर चिंता का विषय बनता जा रहा है। इसमें भाजपा की तरफ से जो गलती हो रही है वह यह है कि इस पार्टी को भी अन्य राजनीतिक दलों की तरह भ्रमित करने की कोशिश हो रही है। इस सबसे नई राष्ट्रीय पार्टी में उच्च शिक्षित लोगों की भरमार होने की वजह से यह सारा प्रयास उल्टा पड़ता जा रहा है।