Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
अत्यधिक ताप सहने वाला नया चिप तैयार Bengal Election 2026: ममता बनर्जी को बड़ा झटका, इस सीट से TMC उम्मीदवार का नामांकन रद्द; जानें अब कि... Mathura Boat Accident Video: मौत से चंद लम्हे पहले 'राधे-राधे' का जाप कर रहे थे श्रद्धालु, सामने आया... पाकिस्तान: इस्लामाबाद में अघोषित कर्फ्यू! ईरान-यूएस पीस टॉक के चलते सुरक्षा सख्त, आम जनता के लिए बुन... Anant Ambani Guruvayur Visit: अनंत अंबानी ने गुरुवायुर मंदिर में किया करोड़ों का दान, हाथियों के लिए... पश्चिम बंगाल चुनाव: बीजेपी का बड़ा दांव! जेल से रिहा होते ही मैदान में उतरा दिग्गज नेता, समर्थकों ने... Nashik News: नासिक की आईटी कंपनी में महिलाओं से दरिंदगी, 'लेडी सिंघम' ने भेष बदलकर किया बड़े गिरोह क... EVM Probe: बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, पहली बार दिया EVM जांच का आदेश; जानें मुंबई विधानसभा ... Rajnath Singh on Gen Z: 'आप लेटेस्ट और बेस्ट हैं', रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने Gen Z की तारीफ में पढ... SC on Caste Census: जाति जनगणना पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, याचिकाकर्ता को फटकार लगा CJI...

झारखंड के खिलाड़ी नंबर वन रहे हैं हेमंत सोरेन

बाहर और अंदर की चुनौतियों को झेलते हुए चला रहे गाड़ी


  • भाजपा कुछ मुद्दों पर पीछे हट गयी

  • ईडी की जांच का सही सामना कर लिया

  • अफसरशाही की जाल को हावी नहीं होने दिया


राष्ट्रीय खबर

रांचीः झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बीत रहे वर्षों में राजनीतिक कलाबाजियां दिखाई है। इस दौरान उन्हें एक नहीं अनेक किस्म की चुनौतियों से जूझना पड़ा है पर वह इन तमाम चुनौतियों से अपनी सत्ता की गाड़ी को आगे ले जाने में कामयाब रहे हैं। वर्ष के प्रारंभ में ही भाजपा के कड़े विरोध के साथ साथ केंद्रीय एजेंसियों का दबाव बनने लगा था।

दरअसल पिछले दरवाजे से राज्य के विभिन्न प्रखंडों में नौकरी पाये भाजपा के नौजवानों ने उनके तथा उनके परिवार के खिलाफ दस्तावेजी साक्ष्य एकत्रित करने का काम किया। इसी वजह से सबसे पहले खनन में उनके खिलाफ लाभ के पद का मामला उठा। यह अलग बात है कि खुद भाजपा इस राजनीतिक मुद्दे को आगे नहीं बढ़ा सकी क्योंकि इसी आरोप के तहत भाजपा के कई नेता भी उनके साथ कतार में खड़े थे।

झारखंड की राजनीतिक जमीन पर स्थानीयता हमेशा से ही एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। इसी मुद्दे पर राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी भी डोमिसाइल की आंच को सही तरीके से झेल नहीं पाये थे। राज्य में यह मुद्दा भी हेमंत सोरेन की सरकार को विधानसभा के अंदर और बाहर परेशान करता रहा। कभी राजभवन तो कभी उच्च न्यायालय की अड़चनों के बीच से सरकार की गाड़ी को निकाल ले जाना कोई आसान काम नहीं था।

इसके बीच ही पूरे देश में हो रहे ऑपरेशन लोट्स की जद में झारखंड भी आ गयी। ईडी की कार्रवाई के दौरान कई बार यह सरकार उलटने की स्थिति में नजर आयी। यहां तक कि झामुमो के अंदर भी हेमंत के बदले किसे सत्ता की चाभी मिलेगी, इसकी चर्चा होने लगी। बावजूद इसके ईडी की पूछताछ में एक बार शामिल होने के बाद हेमंत सोरेन ने अपनी बाजीगरी दिखायी और सत्ता पर और मजबूत पकड़ बनाये रखी।

झारखंड के गठन के बाद से एक गड़बड़ी अफसरशाही की रही है। यहां की व्यूरोक्रेसी पर नकेल कोई भी मुख्यमंत्री नहीं कस पाया था। किसी को भी खास निर्देश पसंद नहीं आये पर अथवा किसी मामले में उसके फंसने का अंदेशा होने पर वह आनन फानन में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में चला जाता है।

यह प्रथा आज भी जारी है इसलिए यह माना जाता है कि हेमंत सोरेन भी इस कमी को पूरी तरह दूर नहीं कर पाये हैं। इसकी वजह से ब्यूरोक्रेसी में कई किस्म विवाद भी उत्पन्न हुई हैं। इनमें पुलिस कोटा के क्वार्टर का किसी वरीय आईएएस को आवंटन भी शामिल है। जिस बारे में कई कोने से यह चर्चा होती रही है कि इस क्वार्टर के जरिए वह अधिकारी सुदेश महतो को साधने का काम भी करता है।

हाल के दिनों में राज्य के मुख्य सचिव को हटाया जाना अप्रत्याशित था जबकि अंदर की खबर रखने वालों के मुताबिक ऐसा होना तय था क्योंकि कई अवसरों पर अफसरों की आपसी खींचतान की वजह से भी मुख्यमंत्री अपनी योजनाओं को तेजी से आगे नहीं बढ़ा पा रहे थे।

अब लोकसभा चुनाव के करीब आने के बीच साल के अंतिम दिन तक कुर्सी पर मजबूती से टिके हेमंत सोरेन की अगली चाल क्या होगी, इससे बहुत कुछ तय होगा। गांव देहात से मिल रही सूचनाओं के मुताबिक झामुमो के लोग हर सीट पर चुनाव लड़ने की गुपचुप तैयारी कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है कि निश्चित तौर पर वह इंडिया गठबंधन से बाहर रहेंगे और झारखंड में भाजपा की जीत का रास्ता प्रशस्त हो जाएगा।

इस चर्चा के ठीक विपरीत यह भी कहा जा रहा है कि साल के बीत जाने के बाद राजनीतिक माहौल में बहुत कुछ बदल जाएगा और भाजपा के जो लोग ईडी के भरोसे झारखंड पर राज करने की दावेदारी कर रहे हैं, वे भी शांत बैठ जाएंगे। राजनीति के गर्भ में क्या छिपा है, यह कह पाना कठिन है। इसलिए माना जा सकता है कि सत्ता संतुलन को बनाये रखने में हेमंत सोरेन खिलाड़ी नंबर वन साबित हुए हैं।