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अमेरिकी आरोप के बाद सफाई का दौर

अमेरिका ने निखिल गुप्ता नामक एक भारतीय पर खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया। संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा आरोपी भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता (52) के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं दिखाया गया है। गुप्ता, जो इस समय दूसरे देश में है, अमेरिका में प्रत्यर्पण का इंतजार कर रहा है।

इसके बीच ही गुजरात पुलिस के डीजीपी की तरफ से यह बताया गया है कि, हमने निखिल गुप्ता नाम के व्यक्ति के बारे में पूछताछ की है। प्रथम दृष्टया जांच में उसके खिलाफ कोई मामला नहीं मिला। मैंने गुजरात में सभी चार आयुक्तालयों से पुष्टि की है। शहर के सभी डीसीपी ने पुष्टि की कि उन्हें नहीं पता कि निखिल गुप्ता कौन था।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने बुधवार, 29 नवंबर को कहा था कि गुप्ता को कुछ महीने पहले न्यूयॉर्क में की गई कथित हत्या की साजिश में सुपारी हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया था। अमेरिकी कानून प्रवर्तन अधिकारियों के अनुसार, गुप्ता ‘साजिश’ को अंजाम देने के लिए तब सहमत हुए जब उन्हें भारत सरकार के एक अधिकारी, जिसका कोडनेम सीसी 1 था, ने आश्वासन दिया कि गुजरात में उनके खिलाफ दर्ज एक मादक द्रव्य मामले का ध्यान रखा जाएगा।

अमेरिकी संघीय अधिकारियों ने यह भी कहा कि अधिकारी ने गुप्ता को उनके और गुजरात के एक पुलिस उपायुक्त के बीच एक बैठक आयोजित करने की पेशकश की। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, गुप्ता ने सीसी-1 और अन्य के साथ अपने संचार में अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी में अपनी संलिप्तता का वर्णन किया है।

दूसरी तरफ गुजरात पुलिस ने अपनी ओर से कहा कि उसे हथियारों या नशीली दवाओं की तस्करी या हस्तक्षेप से संबंधित किसी भी मामले में निखिल गुप्ता नाम का कोई संदिग्ध व्यक्ति भी नहीं मिला है। य़ह विवाद कनाडा के साथ बिगड़े रिश्तों से प्रारंभ हुआ। सितंबर महीने में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के आरोपों के बाद कूटनीतिक तकरार के दौरान तोड़ लिये गये थे। ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि भारत सरकार के एजेंटों ने एक खालिस्तानी नेता की हत्या की साजिश रची थी।

भारत ने पिछले महीने कुछ खास श्रेणियों के वीजा बहाल कर दिये थे, लेकिन खालिस्तानी समूहों से भारतीय राजनयिकों को खतरे के चलते ई-वीजा और पर्यटक वीजा निलंबित रखे गये। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के मुताबिक, कनाडाई नागरिकों के लिए वीजा की बहाली हालात ज्यादा सुरक्षित होने की वजह से की गयी। हालांकि, इस कदम का मतलब यह नहीं है कि सामान्य संबंध बहाल हो ही गये हैं।

भारत द्वारा सख्ती किये जाने के बाद कनाडा ने अपने 40 से ज्यादा राजनयिकों और उनके परिवारों को भारत से निकाल लिया था और वीजा जारी करने की अपनी क्षमता भी घटा ली थी। दोनों पक्षों द्वारा वीजा में कटौती का खमियाजा कारोबारी और निवेश संबंधों को भी भुगतना पड़ा। खासकर इसलिए कि कनाडा ने खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत को पहले ही निलंबित कर दिया था।

जयशंकर और कनाडाई विदेश मंत्री ने सितंबर में अमेरिका में एक दूसरे से मुलाकात की, लेकिन राजनीतिक संबंधों पर वस्तुत: विराम ही लगा रहा। इसके बाद एक नया विवाद वाशिंगटन ने खड़ा किया है। यह विवाद एक रिपोर्ट से खड़ा हुआ है जिसमें कहा गया है कि भारत सरकार की एजेंसियां निज्जर की तर्ज पर अमेरिका में एक और खालिस्तानी नेता, सिक्ख्स फॉर जस्टिस के नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू को निशाना बनाने की साजिश रच रही थीं।

दोहरी नागरिकता वाला पन्नू भारतीयों और भारतीय राजदूतों के खिलाफ हिंसा को उकसाने और 19 नवंबर के बाद एयर इंडिया की उड़ानें नहीं लेने के लिए यात्रियों को हाल में ‘चेतावनी’ जारी करने की खातिर भारत में वांछित है। यह धमकी भरा बयान 1985 में, मॉन्ट्रियल के पास एयर इंडिया की उड़ान संख्या 182 में बम विस्फोट किये जाने की याद दिलाता है, जिसमें विमान में सवार सभी 329 लोग मार गये थे।

यह इस बात का संकेत है कि क्रमश: अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ वार्ता में पश्चिमी साझेदारों संग नयी दिल्ली की बातचीत, और जयशंकर के ब्रिटेन के हालिया दौरे के बावजूद, अलगाववादियों को लेकर चल रहा मुद्दा अभी खत्म होने वाला नहीं है। हालिया अतीत के ठीक उलट, जिस सरकार ने कनाडा के आरोपों को बकवास और प्रेरित बता कर खारिज किया था, उसी सरकार ने आश्चर्यजनक ढंग से अमेरिकी आरोपों को स्वीकार किया है।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया कि भारत अमेरिकी इनपुट की जांच कर रहा है और वह उसके बाद आवश्यक कदम उठायेगा। ये निस्संदेह राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि सरकार अपनी इन दोहरी प्रतिक्रियाओं के इर्द-गिर्द कायम गोपनीयता दूर करने के लिए कुछ करे और ज्यादा सुसंगत ढंग से भविष्य की अपनी कार्यवाही की दिशा तैयार करे। साफ है कि कूटनीतिक संबंधों में इतने पर्देदारी है कि आम जनता को इसका खामियजा भुगतना पड़ता है।