Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
West Bengal Update: बंगाल के युवाओं और किसानों की चांदी! ममता सरकार देगी हर महीने भत्ता, जानें कैसे ... Jaipur Mystery: जयपुर में गायब हुए 2 जापानी टूरिस्ट; रेस्टोरेंट से हुए लापता और सीधे पहुँच गए जापान,... Rail Safety Crisis: ट्रेन में यात्री भगवान भरोसे! वेंडरों ने बेरहमी से पीट-पीटकर यात्री को किया अधमर... Assam Voter List: असम की फाइनल वोटर लिस्ट जारी; ड्राफ्ट सूची से 2.43 लाख नाम बाहर, अब 2.49 करोड़ मतद... Cyber Fraud Update: साइबर ठगों की अब खैर नहीं! CBI और I4C का चलेगा 'हंटर', अमित शाह ने दी देश के दुश... Delhi Govt Scheme: दिल्ली की बेटियों के लिए खुशखबरी! 'लखपति बिटिया' योजना का आगाज, अब लाडली की जगह म... Exam Special: ड्रोन कैमरे का कमाल! 12वीं के बोर्ड पेपर में दीवार फांदकर नकल कराते दिखे अभिभावक, कैमर... Peeragarhi Mystery: काला जादू या सोची-समझी साजिश? पीरागढ़ी केस में 'तांत्रिक' कनेक्शन से हड़कंप, कार... Budget 2026: लोकसभा में बजट पर बहस का आगाज़! राहुल और नरवणे की किताब पर विवाद के बीच विपक्ष ने सरकार... Delhi Crime: दिल्ली में खेल-खेल में मची चीख-पुकार! 18 साल के बेटे से गलती से चली गोली, मां की मौके प...

इशारों इशारों में दिल लेने .. … …

इशारों इशारो में भारतीय राजनीति में बहुत कुछ कहा जाता है। कई बार तो बिना किसी इशारे के भी लोग कुछ न कुछ समझ ही लेते हैं। आखिर यह इंडियन पॉलिटिक्स है भाई साहब और यह चुनाव का सीजन चल रहा है। यहां रस्सी भी सांप बन सकता है और सांप को भी लोग रस्सी समझकर उठाकर फेंक देते हैं। सब टैम टैम की बात है। लगता है अपने मोदी जी का भी टैम ठीक नहीं चल रहा है। इसलिए जो भी चाल चल रहे हैं, उसका असर उल्टा हो रहा है। उधर बेचारे अडाणी जी। पश्चिम बंगाल में निवेश का एलान कर आने के बाद भी ममता बनर्जी की चेली महुआ मोइत्रा को चुप नहीं करा पा रहे हैं। भला एथिक्स कमेटी के लोग भी यह नहीं जानते थे क्या कि वे जिंदा बम को हाथ में लेने जा रहे हैं। अपने गोड्डा वाले दुबे बाबा तो साइड से बोलकर खसक जाते हैं। अब एथिक्स कमेटी के चेयरमैन बेचारे झेल रहे हैं।

वैसे भाजपा सांसद निशिकांत दुबे आजकल भविष्यवक्त हो गये हैं। उन्हें घटित होने वाली तमाम गोपनीय सूचनाओं की पूर्व भविष्यवाणी करने का रिकार्ड हासिल है। ऐसा सिर्फ अभी नहीं हो रहा है बल्कि झारखंड में ईडी की छापामारी के दौरान भी कुछ ऐसा ही उनका बयान रहा है। उनका आरोप है कि महुआ मोइत्रा ने अपना लॉग इन और पासवर्ड दर्शन हीरानंदानी को देकर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला है। यह बात समझ से परे है कि लोकसभा में सवाल पूछने से राष्ट्रीय सुरक्षा को कैसे खतरा होता है।  इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल कैसे जुड़ रहा है, यह तो निशिकांत दुबे ही बता सकते हैं। वैसे इस दौर में कथित गोदी मीडिया और खास कर अडाणी के स्वामित्व वाले मीडिया घरानों का आचरण शर्मनाक है जो कथित तौर पर एथिक्स कमेटी मे हुए अपमानजनक प्रश्नों का जायज बताने अथवा महुआ मोइत्रा के आचरण को गलत ठहराने में व्यस्त हैं।

दूसरी तरफ भाजपा के पप्पू करार दिये गये राहुल गांधी ने तो नाक में दम कर रखा है। बता भी दिया है कि सरकार बदलने पर क्या कुछ हो सकता है। इसे सुनकर कई लोगों के दिल की धड़कनें तेज होने लगी हैं। वे भी जानते हैं कि अगर सरकार बदली तो उन्हें तो ससुराल जाना ही पड़ेगा। अभी तक तो भाजपा की वाशिंग मशीन की वजह से बचे हुए हैं।

इसी बात पर एक पुरानी सुपर हिट फिल्म कश्मीर की कली का एक गीत याद आने लगा है। इस गीत को लिखा था एस एच बिहारी ने और संगीत में ढाला था ओ पी नय्यर ने। इसे आशा भोंसले और मोहम्मद रफी ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल इस तरह हैं।

इशारों इशारों में दिल लेने वाले

बता ये हुनर तूने सीखा कहाँ से

निगाहों निगाहों में जादू चलाना

मेरी जान सीखा है तुमने जहाँ से

मेरे दिल को तुम भा गए

मेरी क्या थी इस में खता

मेरे दिल को तड़पा दिया

यही थी वो ज़ालिम अदा, यही थी वो ज़ालिम अदा

ये राँझा की बातें, ये मजनू के किस्से

अलग तो नहीं हैं मेरी दास्तां से

मुहब्बत जो करते हैं वो

मुहब्बत जताते नहीं

धड़कने अपने दिल की कभी

किसी को सुनाते नहीं, किसी को सुनाते नहीं

मज़ा क्या रहा जब की खुद कर लिया हो

मुहब्बत का इज़हार अपनी ज़ुबां से

माना की जान-ए-जहाँ

लाखों में तुम एक हो

हमारी निगाहों की भी

कुछ तो मगर दाद दो, कुछ तो मगर दाद दो

बहारों को भी नाज़ जिस फूल पर था

वही फूल हमने चुना गुलसितां से

अब दिल्ली के अपने केजरीवाल भी ईडी के खिलाफ मोर्चा बांध चुके हैं। लगता है उन्हें यह हिम्मत झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिली है, जिन्होंने अब ईडी की समन को भी पोस्ट ऑफिस की चिट्ठी मान लिया है। बेचारे ईडी वाले भी क्या करें। राजस्थान में गहलोत को घेरने गये थे तो उनके ही दो अफसर घूसखोरी में गिरफ्तार हो गये। अब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल पर पैसा लेने का आरोप लगा है, ऐसा गोदी मीडिया कह रही है। यह किस अफसर के द्वारा दी गयी जानकारी है, इसका पता नहीं है। सूत्रों के हवाले से पूरी कहानी ऐसा बयां कर रहे हैं मानों वे भी वहां मौजूद थे। इन तमाम कहानियों को पढ़ने से ऐसा लगता है कि इसका मूल लेखक एक ही है, जिन्होंने अपनी रचना के कुछ कुछ पन्ने सभी में बांट दिये हैं।

खैर अब चुनावी बॉंड की बात कर लें क्योंकि इसमें मोदी सरकार ने कहा है कि इस चंदे के बारे में पूरी जानकारी का अधिकार जनता को ही नहीं है। कमाल है, जिसका देश, जो सरकार चुने, उसे ही जानने  का अधिकार नहीं। अब देखते हैं चुनाव आयोग से क्या रिकार्ड निकलता है। बंद लिफाफे से भी कहीं अडाणी बम निकला तो लेने के देने पड़ जाएंगे, यह तो तय है।