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मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को लगा पलीता

  • बड़ा सवाल कि टाईगर बढ़े,  चीते घटे क्यों?

  • 11 महीने में बीमारी से मरे लाये गये 9 चीते

  • कई अफसर अब बोलने से भी कतरा रहे हैं

डॉ नवीन आनंद जोशी

भोपालः हाल ही में केंद्र सरकार ने बाघों की गणना करते हुए मध्य प्रदेश को फिर से टाईगर स्टेट का ताज पहनाया है, वहीं दूसरी तरफ राज्य के कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीका से लाए गए चीते बीमारी के चलते एक-एक करके दम तोड़ रहे हैं। संयोग देखिये कि टाइगर स्टेट के दर्जा मिलने पर मप्र सरकार बल्लियां  उछल रही है और चीतों की मौत पर जिम्मेदारों के घड़ियाल आंसू भी नहीं निकल पा रहे  है।

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है कूनो नेशनल पार्क में चीतों का विचरण। 17 सितंबर 2022 को नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन के दिन नामीबिया से आठ चीते बड़ी उम्मीद के साथ छोड़े थे ,उसके बाद इस साल 18 फरवरी को 12 और चीते बाड़े में उतारे गए। कुल जमा 20 चीतो में से अब तक 9 की मौत हो चुकी है।

इसे प्रबंधन की नाकामी कहें या वातावरण का दुष्प्रभाव केवल 11 महीने के अल्पकाल में ही 9 सीटों ने अभ्यारण को अलविदा कह दिया। जानकारी के अनुसार कल 6 वयस्क और तीन शावक चीतों की मौत अब तक हो चुकी है। सबसे पहले चीते की मौत 26 मार्च को हुई थी यह मादा चीता साशा भारत में लाने के बाद किडनी इन्फेक्शन का शिकार हुई थी। इसके अगले ही दिन एक और मादा ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया और दुनिया से चल बसी।

23 अप्रैल 2023 को नर चीता उदय की मौत हार्ट अटैक से हुई। मप्र के वाइल्ड लाइफ वार्डन जे एस चौहान के मुताबिक खून का बहाव रुकने से उदय की मौत हो गई। यही नहीं 9 मई  2023 को चीता दक्षा की मेटिंग के दौरान मौत हो गई । पुरुष चीता ने पंजा मारकर दक्षा को घायल कर दिया। 23 में 2023 को ज्वाला की संतान एक शावक मादा की मौत हो गई।  भीषण गर्मी और लू के थपेड़े ने डिहाईड्रेशन की वजह से उसे लील लिया।

इसके 1 दिन बाद 25 मई को दो और शावकों की मौत ज्यादा तापमान के कारण हो गई। जानकारों के अनुसार कूनों का तापमान इन चीता के बच्चों के लिए ठीक नहीं था। 11 जुलाई 23 को नर चीता तेजस की गर्दन पर घाव देखा गया, बाद में ज्ञात हुआ कि दूसरे चीतों के साथ आपसी संघर्ष में उसकी जान चली गई। बीते महीने 14 जुलाई को एक अन्य न चिता सूरज का शव मिला उसकी मौत के बाद यह तय हो गया की कोनो में 1 साल के अंदर अंदर नौ चितों ने अपनी जान गवां दी है। प्राणियों की आपसी क्रूरता, वन प्रबंधन की कमी और वातावरण की प्रतिकूलता के चलते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट ने दम तोड़ दिया है।

सूत्रों के मुताबिक कूनो अभ्यारण में अभी कुल 14 चीते और एक शावक बचा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण सवालों के घेरे में हैं। अभ्यारण में विदेशी चीतों की मौत पर डीएफओ प्रकाश कुमार वर्मा कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं ,अन्य कोई अधिकारी भी अपनी जुबान से चीतों की मौत की वजह नहीं बता पा रहा है।

दूसरी तरफ सरकार ने 785 बाघों के साथ देश में दूसरी बार अपने टाईगर स्टेट का तमगा कायम रखा है, और उसको लेकर मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे वन प्राणियों के संरक्षण में वन विभाग के अधिकारियों के अथक प्रयासों का परिणाम बताया है।

मध्य प्रदेश में केन्द्र सरकार से प्रभारी बनाकर भेजे गए मंत्री भूपेंद्र यादव ने टाइगर स्टेट बनने पर  मध्य प्रदेश राज्य को बधाई दी और सरकार के तंत्र की पीठ थपथपाई है, उन्होंने कहा है कि 4 साल में यहां पर 259 बाघों के बढ़ने से कर्नाटक को पछाड़ दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी बाघों के बढ़ने से खुश हैं, लेकिन चीतों के घट जाने पर कोई सार्वजनिक बयान देने से बच रहे हैं।

चीतों की जल्दी-जल्दी हो रही मौतों ने वन महकमें के अधिकारियों में हड़कंप मचा दिया है। केंद्र सरकार की नजर कूनो अभ्यारण पर लगी हुई है, क्योंकि  अरबो रुपए के इस प्रोजेक्ट ने अफ्रीकन एक्सपर्ट्स के आगे भारत सरकार को शर्मसार कर दिया है। बावजूद इसके दक्षिण अफ्रीका से 10 चीते और लाया जाना प्रस्तावित है ,लेकिन अब यह नहीं तय हो पा रहा है कि इन्हें भारत में कहां रखा जाएं..?