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प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर अड़े हुए हैं दोनों पक्ष

  • इसके बीच ही दो विधेयक पारित किये गये

  • आसन की बातों का अब कोई असर नहीं

  • अध्यक्ष पर विपक्ष की अनदेखी का आरोप

नईदिल्लीः लोकसभा में मणिपुर मुद्दे पर सदन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वक्तव्य की मांग को लेकर मंगलवार को विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही शाम पांच बजे तक स्थगित कर दी गयी। पीठासीन अधिकारी राजेन्द्र अग्रवाल ने एक बार स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही दो बजे जैसे से शुरू करवाई विपक्षी सदस्य सदन के बीचोबीच आकर नारेबाजी करने लगे।

विपक्षी सदस्यों ने मणिपुर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के सदन में आकर वक्तव्य देने के मांग को लेकर शोरगुल करते रहे। पीठासीन अधिकारी ने हंगामे के बीच जरूरी कागजात सभा पटल पर रखवाये। पीठासीन अधिकारी ने विपक्षी सदस्यों ने अपने- अपने स्थान पर जाने और चर्चा में हिस्सा लेने का आग्रह किया लेकिन विपक्षी सदस्य अपनी मांगों पर अडे रहे।

हंगामे की बीच ही जैविक विविधता (संशोधन) विधेयक 2022 को ध्वनिमत से पारित किया गया और सदन की कार्यवाही को शाम पांच बजे तक स्थगित कर दी गयी। इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जैसे ही प्रश्नकाल आरंभ किया विपक्ष के सदस्य हंगामा करते हुए आसन के सामने आ गये और नारेबाजी करने लगे। अध्यक्ष ने प्रश्नकाल चलाने का प्रयास किया लेकिन विपक्षी सदस्य हंगामा करते रहे। हंगामा बढ़ता देख सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक स्थगित कर दी थी।

दूसरी तरफ राज्यसभा में मंगलवार को विपक्ष के मणिपुर की स्थिति पर जबकि सत्तापक्ष के राजस्थान, छत्तीसगढ़ तथा पश्चिम बंगाल में महिलाओं के उत्पीड़न पर चर्चा कराने की अपनी-अपनी मांगों पर अड़े रहने के चलते तीखी नोकझोंक हुई जिसके कारण सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। सुबह कार्यवाही शुरू होने पर भी दोनों पक्षों के अपने अपने रुख पर अड़े रहने के कारण सभापति को कार्यवाही बारह बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी थी।

सभापति जगदीप धनखड़ ने जैसे ही प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू की विपक्ष के सदस्यों ने मणिपुर पर चर्चा कराने की मांग करते हुए जोर-जोर से नारेबाजी शुरू कर दी। सभापति ने शोर-शराबे के बीच ही प्रश्नकाल चलाने का प्रयास किया तथा कुछ सवालों के जवाब भी हंगामे के बीच ही दिए गए।

इसके बाद सभापति ने कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य पी चिदंबरम द्वारा आसन के खिलाफ की गई टिप्पणी को अनुचित करार देते हुए कहा कि सदन के वरिष्ठ सदस्य को आसन से तल्ख़ लहजे में बात नहीं करनी चाहिए। श्री चिदंबरम ने इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह यह कहना चाहते थे कि जब 51 सदस्य एक मुद्दे पर चर्चा के लिए नोटिस दे रहे हैं तो सभापति उसे छोड़ कर तीन दिन पहले दिए गए नोटिस का संज्ञान कैसे ले सकते हैं।

विपक्ष के नेता मलिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष के अनेक सदस्य पिछले चार दिन से नियम 267 के तहत मणिपुर की स्थिति पर चर्चा करने के लिए नोटिस दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मणिपुर की स्थिति बेहद चिंताजनक है और प्रधानमंत्री ईस्ट इंडिया की बात कर रहे हैं। सदन के नेता पीयूष गोयल ने कहा कि देश में कहीं भी महिलाओं पर अत्याचार दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मुद्दा है और इस पर किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। नेता सदन ने कहा कि गृहमंत्री कह चुके हैं कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है लेकिन अनेक सदस्यों ने राजस्थान, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी महिलाओं पर अत्याचार तथा वहां कानून व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा कराने के लिए नोटिस दिए हैं। सरकार चाहती है कि इन पर भी चर्चा हो।

इसी हंगामे के बीच छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजातियों की सूची में 12 और जातियों को शामिल करने से संबंधित संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक 2022 को मंगलवार को विपक्ष के बहिर्गमन के बीच राज्यसभा ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। दूसरी तरफ लोकसभा में जैविक विविधता (संशोधन) विधेयक, 2022 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।