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अधिकांश इलाकों में सरकारी मदद की जरूरतः प्रेम वर्मा

  • गरीब लोग रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं करा सकते

  • पुराने खराब बोरिंग को चालू कर इस्तेमाल हो

  • सरकार पहल करेगी तो शेष लोग खुद कर लेंगे

राष्ट्रीय खबर

रांचीः रांची के जिन इलाकों को अधिक जलसंकट का क्षेत्र माना जाता है, वे आर्थिक तौर पर अधिक सक्षम आय वर्ग के नहीं है। दूसरे शब्दों में कहें तो यहां वैसे लोग नहीं बसते, जिनकी आय अपने घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अथवा बोरिंग कराने की है। इन इलाकों की संकरी गलियों में सरकारी योजना के तहत आसानी से बोरिंग भी नहीं हो सकती क्योंकि वहां तक बोरिंग का गाड़ी की पहुंच नहीं हो सकती।

ऐसे इलाकों में भूगर्भस्थ जलस्तर को बेहतर बनाने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास की आवश्यकता है। दूसरी तरफ यह भी सच है कि अगर इन इलाकों के जलस्तर में फिर से सुधार होने लगा तो तीन वर्षो में इस समस्या के स्थायी रूप से समाधान होने का एहसास भी रांची को होने लगेगा। दूसरी तरफ इसे सिर्फ एक जलसंकट नहीं माना जा सकता है क्योंकि अधिक संकट के वक्त यह कई बार विवाद से बढ़कर विधि व्यवस्था की समस्या के स्तर तक पहुंच जाता है।

इस बारे में हरमू रोड इलाके के सामाजिक कार्यकर्ता एवं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य प्रेम वर्मा का तर्क है कि गरीब इलाकों में सरकार को इसके लिए मदद करनी चाहिए। उनके मुताबिक कई प्रमुख लोगों को उन्होंने इसका सुझाव भी दिया है। उन्होंने कहा कि हरमू हाउसिंग कॉलोनी से लेकर पहाड़ी और हरमू के इलाके में अधिकांश गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार बसते हैं।

श्री वर्मा के मुताबिक मधुकम, स्वर्णजयंती नगर, न्यू मधुकम का पूरा इलाका, श्रीनगर, भवानीनगर, आनंद नगर, इरगू टोली, शिवशक्ति नगर, किशोरगंज, गंगा नगर, विद्यानगर, पुरानी रांची, विराटनगर, हरमू हाउसिंग कॉलोनी सहित अन्य इलाकों में भी हर साल ऐसा जलसंकट हो जाता है। उस वक्त इन इलाकों में रहने वाली आबादी नगर निगम के टैंकरों सो होने वाली जलापूर्ति पर निर्भर हो जाती है।

यही आर्थिक और सामाजिक हालत पुरानी रांची के इलाकों की भी है। हर साल की गर्मी में सबसे अधिक जलसंकट इन्हीं इलाकों में होता है। हरमू हाउसिंग कॉलोनी में रहने वाले आर्थिक तौर पर सक्षम लोग बोरिंग करा चुके हैं। इसके बाद भी हर साल वहां के बोरिंग हर गर्मी में फेल कर जाते हैं। वह बताते हैं कि जल संकट वाले इलाकों में लोगों को पानी के लिए कई किलोमीटर तक चलना पड़ता है और रात ऱात पर टैंकर का इंतजार करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि कई बार वह प्रशासन से इस  बात की गुहार लगा चुके हैं कि इन इलाकों में जो पुराने बोरिंग फेल हो चुके हैं, उनकी मरम्मत कर उनके जरिए जमीन के अंदर पानी भेजने का इंतजाम किया जाए। गरीब इलाकों के लोग अपने पैसे से तो यह काम नहीं कर सकते। अब अगर सरकार बोरिंग को रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए चालू कर देगी तो ऐसे इलाकों के लोग सामूहिक तौर पर अपने घरों की छतों का पानी इस बोरिंग तक पहुंचाने का इंतजाम भी कर लेंगे। इसलिए इसमें सरकारी पहल की आवश्यकता है। (जारी)