Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Punjab Weather Update: पंजाब के 12 जिलों में बारिश और तूफान की चेतावनी, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्... गौवंश हत्या से दहला इलाका! गौ रक्षकों और ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन; '2 दिन में गिरफ्तारी वरना चक्का... Haryana Primary Education Reform: प्राथमिक स्कूलों में लागू हुआ 'हॉलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड', पास-फेल... Rohtak House Collapse: मकान की छत गिरने से दो महिलाएं मलबे में दबी, गर्भवती की हालत नाजुक; अस्पताल म... Real Hero of Kurukshetra: नहर में डूबते 3 लोगों का 'देवदूत' बना अंकित, जनसेवा दल ने वीरता के लिए किय... Yoga Teacher Blackmailing Case: योग गुरु और पत्नी गिरफ्तार, महिलाओं के निजी वीडियो से करते थे उगाही;... Road Accident News: भीषण सड़क हादसे में दो सगे भाइयों की मौत, तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक को कुचला; पुलि... Pathways School Bomb Threat: पाथवेज स्कूल को मिली 'साफ और गंभीर चेतावनी', बम की खबर से दहशत; पूरे स्... Petrol Pump Theft Busted: पेट्रोल पंप पर लाखों की चोरी, CCTV फुटेज से हुआ खुलासा; पहचान छिपाने के लि... हरियाणा में 'रफ्तार' का रिवोल्यूशन! दिल्ली से करनाल तक दौड़ेगी 'नमो भारत', मेट्रो का भी रास्ता साफ; ...

शीर्ष पंचायत में झूठ बोलने की सजा भी नहीं

शीर्ष पंचायत यानी देश के संसद के अंदर कोई भी झूठ बोलकर साफ बच निकल सकता है। दरअसल नेताओं ने अपनी सुविधा के अनुसार जो नियम बनाये हैं, उसी वजह से वे इस किस्म का गैर जिम्मेदाराना आचरण कर पाते हैं।

वरना पूर्व ब्रिटिश प्रधान मंत्री, बोरिस जॉनसन ने संसदीय जांच के निष्कर्ष के बाद हाउस ऑफ कॉमन्स से इस्तीफा दे दिया कि उन्होंने कोविड -19 लॉकडाउन प्रतिबंधों के उल्लंघन में भाग लेने वाले दलों के बारे में विधायकों से झूठ बोला था।

उनका इस्तीफा इस बात की याद दिलाता है कि भारत, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र – वास्तव में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार लोकतंत्र की जननी, कितना खराब है। जब यह एक मौलिक सिद्धांत की बात आती है सदन के पटल पर झूठ अस्वीकार्य है और होना चाहिए परिणाम के साथ आओ। यह एक अवधारणा है जो भारतीय लोकतंत्र की वास्तुकला में भी अंतर्निहित है।

संसद के सदस्य अन्य सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव ला सकते हैं यदि उन्हें लगता है कि इन विधायकों ने विधायिका से झूठ बोला है या उन्हें गुमराह किया है। यह विचार सरल है और सांसद कई विशेष विशेषाधिकारों का आनंद लेते हैं, जो अन्य बातों के अलावा, उन्हें सदन के अंदर किए गए कृत्यों के लिए मुकदमा चलाने से बचाते हैं।

विशेषाधिकार प्रस्तावों का उद्देश्य उन्हें उन असाधारण छूटों का उपयोग करने के तरीके के लिए जवाबदेह ठहराना है, खासकर जब वे उन लोगों के प्रतिनिधि हैं जिनकी ओर से उनसे बोलने की उम्मीद की जाती है। हाल के दिनों में भारतीय संसद में एक नहीं कई बार इस किस्म के झूठ से पूरे देश को दो चार होना पड़ा है। राज खुल जाने के बाद भी न तो कोई कानूनी जवाबदेही और ना ही कोई नैतिक जिम्मेदारी। बस अपनी बात रखें और चल दिये।

उन बातों का देश की जनता पर क्या असर हुआ, इस पर सोचने तक का फुर्सत नहीं है क्योंकि अब सत्ता में बने रहना ही शीर्ष प्राथमिकता है। भले ही इसके लिए हजार झूठ क्यों ना बोलना पड़े। फिर भी व्यवहार में, यह एक ऐसा सिद्धांत है जिसका नियमित रूप से उल्लंघन किया जाता है। नवंबर 2019 में, तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने संसद को बताया कि अनुच्छेद 370 को रद्द करने से जम्मू-कश्मीर में पर्यटन पर कोई असर नहीं पड़ा है।

लेकिन सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत एक अनुरोध से पता चला कि मंत्री ने वास्तव में कश्मीर में अधिकारियों से पर्यटन में गिरावट का स्पष्ट रूप से डेटा प्राप्त किया था, जिससे यह सुझाव दिया गया कि उन्होंने जानबूझकर संसद को गुमराह किया। 2019 में, केंद्रीय गृह मंत्री, अमित शाह ने संसद को एक विवादास्पद अखिल भारतीय नागरिक रजिस्टर की योजना के बारे में बताया।

हफ्तों बाद, श्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने कभी भी इस तरह की राष्ट्रव्यापी परियोजना पर चर्चा नहीं की है। या तो श्रीमान मोदी या श्री शाह सच्चाई से मितव्ययिता कर रहे थे। स्पष्ट होने के लिए, जानबूझकर झूठ बोलने या गुमराह करने के सभी आरोप उचित जांच की जांच के विरुद्ध नहीं रहेंगे। चिंताजनक बात यह है कि इस बात की पारदर्शी, स्वतंत्र जांच का अभाव है कि क्या सांसदों ने संसद को गुमराह किया होगा।

इसमें भारत अकेला नहीं है: संयुक्त राज्य अमेरिका की कांग्रेस में, निराधार साजिश के सिद्धांतों को आमतौर पर आवाज उठाई जाती है। एक हफ्ते में जब भारत और अमेरिका के नेता मिल रहे हैं, दोनों ब्रिटेन से एक दुर्लभ सबक सीख सकते हैं, जिस लोकतंत्र के खिलाफ कभी उनके देश लड़े थे। इसके अलावा अगर बात करें तो पेगासूस के जरिए देश के नागरिकों की गैर कानूनी जासूसी के मुद्दे पर भी झूठ बोला गया था। संसद के अंदर इस किस्म के मिथ्या बयान का देश पर क्या असर होता है, इसे लोग अच्छी तरह समझते हैं।

दुर्भाग्य से शीर्ष पंचायत में बैठे नेताओं की प्राथमिकता अब जनता नहीं अपनी गद्दी है। इसलिए सभी ऐसे झूठ से एक दूसरे का बचाव भी करते हैं। लेकिन देश की आम जनता को अब यह समझने की जरूरत है कि इस किस्म के झूठ से आखिर देश का कितना नुकसान हो रहा है। हाल के दिनों में पूरे देश ने अडाणी प्रकरण में झूठ का पुलिंदा भी देखा है।

दरअसल इस मुद्दे पर जेपीसी की जांच से बचने के लिए सरकार की तरफ से लगातार न सिर्फ झूठ बोले गये बल्कि संसद की कार्यवाही को भी सिर्फ इसलिए बाधित किया गया ताकि विपक्ष इस मुद्दे पर रिकार्ड में कुछ बोल नहीं सके। राहुल गांधी ने सदन के अंदर काफी कुछ कहा तो उसे रिकार्ड से हटा दिया गया। यह समझने वाली बात है कि इस किस्म के राजनीतिक आचरण से हम राजनीति की अगली पीढ़ी को कौन सी विरासत छोड़कर जा रहे हैं। ऐसे झूठ की बुनियाद पर टिका भारतीय लोकतंत्र क्या सुरक्षित रह पायेगा।