Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Bhopal BMC Budget 2026: भोपाल नगर निगम का 3938 करोड़ का बजट, सीवेज टैक्स में भारी बढ़ोतरी; ₹10 हजार ... ग्वालियर में नवरात्रि का 'महंगा' असर! 10% तक बढ़े फलों के दाम; गर्मी के चलते तरबूज की भारी डिमांड, जा... Army Day Parade 2027 Bhopal: भोपाल में पहली बार होगी सेना दिवस की परेड, 15 जनवरी को दिखेगा शौर्य; CM... Jabalpur SAF Salary Scam: करोड़ों का गबन कर क्लर्क फरार, 10 दिन बाद ही धूमधाम से की शादी; जबलपुर पुल... Gwalior Crime News: ग्वालियर में बहू ने ससुर को कमरे में बंद कर बेरहमी से पीटा, बाल पकड़कर घसीटने का... Jabalpur Flyover Stunt: जबलपुर में खतरनाक स्टंट का वीडियो वायरल, पत्नी ने शूट किया पति का जानलेवा खे... रतलाम पुलिस का 'डिजिटल स्ट्राइक'! साइबर ठगों के चंगुल से छुड़ाए 92.5 लाख रुपये; पीड़ितों के चेहरे पर ... भोपाल की जनता पर 'महंगाई' की मार! ₹3938 करोड़ का बजट पेश, कचरा शुल्क से लेकर संपत्तिकर तक कई 'छिपे ह... संसद में गूंजा MP का 'रेत का खेल'! अपनी ही सरकार को बीजेपी सांसद ने दिखाया आईना; बोले—"अवैध खनन से ख... Viral News: साली से इंस्टाग्राम पर करते थे ऐसी बातें, अजनबी के हाथ लगी पर्सनल चैट; जीजा की शादीशुदा ...

कांग्रेस के आरोप के बाद पहली बार चुनाव आयोग ने जानकारी दी

  • इससे संबंधित दस्तावेज भी बाहर आये

  • मशीनों को बदलने की चर्चा पत्र में है

  • आयोग ने पहले इस पर साधी थी चुप्पी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेडा के आरोप के बाद पहली बार चुनाव आयोग ने इस बात को स्वीकार किया है कि उनके वीवीपैट मशीनों में सुधार की जरूरत है। आयोग ने इन्हें खराब मानने से इंकार करते हुए कहा कि सिर्फ 3.4 लाख मशीनों को निवारक रखरखाव की जरूरत है।

वैसे कांग्रेस के आरोपों के बाद आयोग के वे दस्तावेज भी बाहर आ गये हैं, जिनमें कहा गया है कि 6.5 लाख वीवीपैट मशीनें ‘खराब’ हैं और मरम्मत के लिए निर्माता को भेजी जा रही हैं। चुनाव आयोग के दस्तावेजों के अनुसार, ये नवीनतम एम 3  पीढ़ी की मशीनें हैं जिनमें से 37 प्रतिशत दोषपूर्ण थीं। दोषों को सुधारने के लिए इन मशीनों को निर्माता को वापस भेजने की आवश्यकता है।

हालांकि, कुछ जगहों पर, ऐसा प्रतीत होता है कि खराब मशीनों को मरम्मत के बजाय नई मशीनों से बदला जा रहा है। एक राज्य में चुनाव आयोग के अधिकारियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के बीच हुए एक पत्र, स्पष्ट रूप से कहता है कि ये नई मशीनें हैं। वैसे चुनाव आयोग ने अब तक राजनीतिक दलों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी थी, यह बड़ा सवाल खुद चुनाव आयोग के सामने खड़ा हो गया है।

दूसरी तरफ पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने इस स्थिति को गलत माना  है। उनके मुताबिक चुनाव आयोग का काम पूरी पारदर्शिता के साथ हर काम को अंजाम देने का है। इस बीच ईसीआई के सूत्रों ने कहा कि दोषपूर्ण वीवीपीएटी का मतलब है कि वे केवल चुनाव प्रक्रिया के दौरान काम करना बंद कर देते हैं।

यह गलत परिणाम नहीं देता है। चुनाव आयोग की सफाई के बाद भी आयोग के दस्तावेज यह बता रहे हैं कि दरअसल मशीनों को बदला जा रहा है। उदाहरण के लिए, इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद को भेजी जाने वाली मशीनों में कुछ खास सीरिज की मशीनों को दोषपूर्ण माना गया है।

इसी तरह बाकी श्रृंखलाएं भी हैं, अर्थात्, ईवीटीईबी, ईवीटीईसी, ईवीटीईडी, प्रत्येक में 99999 मशीनों का एक बैच शामिल है। ये एम3 मशीनें हैं जिन्हें पहली बार 2018 में पेश किया गया था और 2019 के चुनावों में भी इनका इस्तेमाल किया गया था।

इसे परिप्रेक्ष्य में रखने के लिए, 2019 के लोकसभा चुनावों में कुल 17.4 लाख वीवीपैट को लोकसभा चुनावों और साथ-साथ होने वाले विधानसभा चुनावों के उपयोग के लिए अधिसूचित किया गया था। इसका मतलब यह है कि इन मशीनों में से एक तिहाई (37 प्रतिशत) अब चुनाव आयोग द्वारा खराब पाई गई हैं। दूसरी तरफ इस मामले की जानकारी खुद चुनाव आयोग द्वारा नहीं दिये जाने की वजह से पूरा मामला संदेह के घेरे में आ गया है।