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कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने हेतु दस हजार करोड़

देश में तिरपन हजार अतिरिक्त रोजगार पैदा करने की तैयारी

केंद्रीय कैबिनेट में प्रस्ताव पारित

परिवहन उद्योग को समर्थन देगी

व्यापार से रोजगार के अवसर बनेंगे

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में घरेलू स्तर पर शिपिंग कंटेनर निर्माण को प्रोत्साहन देने और आयात पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से 10,000 करोड़ रुपये की कंटेनर निर्माण प्रोत्साहन योजना (सीएमपीएस) को मंजूरी दे दी गई है।

इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य लक्ष्य देश की वार्षिक कंटेनर उत्पादन क्षमता को लगभग दस गुना बढ़ाकर 70,000 टीईयू से सीधे 7.5 लाख ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट तक पहुँचाना है। केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित यह योजना वित्तीय वर्ष 2027-28 से 2039-40 तक कुल 13 वर्षों की अवधि के लिए लागू की जाएगी। इसमें शुरुआती 3 वर्ष विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित करने के लिए होंगे और अगले 10 वर्ष उत्पादन प्रोत्साहन सहायता के लिए निर्धारित किए गए हैं।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में वैश्विक स्तर पर कंटेनर निर्माण का 95 प्रतिशत हिस्सा केवल एक ही देश में केंद्रित है। ऐसे में वैश्विक शिपिंग कंपनियां एक मजबूत विकल्प चाहती थीं, और यह योजना भारत को कंटेनर निर्माण के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।

योजना के तहत कुल 10,000 करोड़ रुपये के बजट में से 8,891 करोड़ रुपये परिचालन व्यय सहायता, 859 करोड़ रुपये पात्र ऋणों पर 3 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सब्सिडी, 150 करोड़ रुपये परीक्षण व प्रमाणन सुविधाओं के विकास और 100 करोड़ रुपये योजना प्रबंधन के लिए आवंटित किए गए हैं। अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप 20-फुट के कंटेनर पर 49,500 रुपये और 40-फुट के कंटेनर पर 86,625 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, प्रमुख बंदरगाहों पर भूमि लीज दरों में 75 प्रतिशत तक की छूट देने का भी प्रावधान किया गया है।

केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह पहल मैक इन इंडिया और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के सपनों को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। सरकार का अनुमान है कि इस योजना से देश में लगभग 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही, स्टील, पेंट, लकड़ी और लॉजिस्टिक्स जैसे संबंधित सहायक उद्योगों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा, जिससे 2039-40 तक लगभग 75,000 करोड़ रुपये का आर्थिक उत्पादन हासिल होने की उम्मीद है।