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केरल सरकार के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी

सतर्कता शाखाओं को आरटीआई से बाहर करने का निर्णय

दो शाखाओँ पर विशेष आपत्ति है

अफसरों की जानकारी रखती हैं

इन्हें छिपाने का विरोध किया गया

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः आरटीआई केरल फेडरेशन ने सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (वीएसीबी) की दो महत्वपूर्ण शाखाओं को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के दायरे से बाहर करने के राज्य सरकार के निर्णय को केरल उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता जोस अब्राहम के माध्यम से दायर इस याचिका में सरकार द्वारा टी1 और टी2 शाखाओं को छूट देने के कदम पर सवाल उठाए गए हैं, जो गोपनीय रिकॉर्ड और संवेदनशील सतर्कता जांच से जुड़ी सूचनाओं का निपटारा करती हैं।

यह छूट 22 अक्टूबर को केरल राजपत्र के एक असाधारण संस्करण के माध्यम से अधिसूचित की गई थी, जब राज्य विधानसभा का सत्र चल रहा था। वीएसीबी की टी1 शाखा मंत्रालयिक, कार्यकारी और कानूनी कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) के साथ-साथ संवेदनशील व्यक्तिगत फाइलों और अति-गोपनीय दस्तावेजों का रख-रखाव करती है। इसके अलावा, यह शाखा गोपनीय सत्यापन और उच्च स्तरीय सतर्कता जांच को भी संभालती है।

दूसरी ओर, टी2 शाखा सतर्कता अधिकारियों की साप्ताहिक डायरियों को संसाधित करती है, स्रोत रिपोर्टों सहित खुफिया जानकारियों को एकत्र और विश्लेषित करती है, समर्पित गोपनीय टेलीफोन हॉटलाइन के माध्यम से प्राप्त सार्वजनिक शिकायतों का प्रबंधन करती है और औचक निरीक्षणों का समन्वय करती है।

फेडरेशन ने अदालत में तर्क दिया है कि इन दोनों महत्वपूर्ण वर्गों को आरटीआई के दायरे से बाहर करने से पारदर्शिता और सूचना तक जनता के अधिकार पर गंभीर असर पड़ सकता है, खासकर वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़ी भ्रष्टाचार की जांच से संबंधित रिकॉर्ड तक पहुंच बाधित हो सकती है। सरकार के इस कदम ने आरटीआई अधिनियम से सतर्कता विभाग की टी शाखा को मुक्त करने के 7 फरवरी 2006 के पुराने फैसले की चिंताओं को भी एक बार फिर ताजा कर दिया है। हालांकि, उच्च न्यायालय में कानूनी कार्यवाही के बाद सरकार ने 2022 में उस पुराने आदेश को वापस ले लिया था और शाखा को पुनः आरटीआई अधिनियम के दायरे में ले आई थी।

याचिका में इस बात को रेखांकित किया गया है कि आरटीआई अधिनियम की धारा 24(4) निर्दिष्ट खुफिया और सुरक्षा संगठनों के मामले में भी भ्रष्टाचार और मानव अधिकारों के उल्लंघन के आरोपों से संबंधित जानकारी के संदर्भ में स्पष्ट सुरक्षा उपाय प्रदान करती है। फेडरेशन ने सतर्कता जांच की गोपनीयता बनाए रखने और सूचना के वैधानिक अधिकार की रक्षा के बीच संतुलन बनाने की पुरजोर मांग की है।