दुनिया में शायद अभी और प्रजातियों की खोज बाकी है
शरीर बिल्कुल पारदर्शी हो गया है
इसका नाम एरहाइया दिजिआंग रखा गया
पहाड़ी गुफा के ठंडे पानी में जीवन यापन
राष्ट्रीय खबर
रांचीः चीन की एक गुफा में ताजे पानी के घोंघे (स्नेल) की एक नई प्रजाति की पहचान की गई है। यह खोज वैज्ञानिकों को पूर्वी एशिया के भीतर छिपे अज्ञात जलीय पारिस्थितिक तंत्र को करीब से समझने का एक दुलर्भ अवसर प्रदान करती है। सबट्रेनियन बायोलॉजिकल पत्रिका में प्रकाशित यह खोज इस क्षेत्र के भूमिगत वन्यजीवों को समझने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। अब तक चीन में ताजे पानी की गुफाओं वाले घोंघों का कोई रिकॉर्ड नहीं था और देश के भूमिगत जलीय जीवों पर बहुत कम वैज्ञानिक शोध हुए थे।
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इस नई खोजी गई प्रजाति का नाम एरहाइया दिजिआंग है। इसने पूर्ण अंधकार में रहने के लिए खुद में अनोखे बदलाव किए हैं। पूरी तरह से गुफा में रहने वाला जीव होने के कारण इसकी आंखें पूरी तरह से लुप्त हो चुकी हैं। इस बेहद छोटे घोंघे का खोल शंक्वाकार और लगभग पारदर्शी है। इसका शरीर बिना किसी रंगद्रव्य के बहुत नाजुक है और इसके स्पर्शक लंबे व पतले हैं।
इसके अनोखे रूप के कारण इसका नाम प्राचीन चीनी पौराणिक कथाओं से प्रेरित होकर रखा गया है। शोधकर्ताओं ने क्लासिक ऑफ माउंटेन्स एंड सीज नाम के प्राचीन ग्रंथ में बिना चेहरे वाले देवता दि जिआंग के नाम पर इसका नाम दिजिआंग रखा। यह नाम इस जीव के लिए बिल्कुल उपयुक्त है क्योंकि यह प्रकाश के प्रति बेहद संवेदनशील है। प्रयोगशाला में परीक्षण के दौरान, रोशनी पड़ते ही यह घोंघा पत्थरों के नीचे अंधेरे में छिप जाता था।
यह खोज जिस स्थान पर हुई, वह भी उतना ही आश्चर्यजनक है जितना कि यह जीव। वैज्ञानिकों ने इसको 2,062 मीटर की ऊंचाई पर खोजा है। यह एरहाइडे परिवार में अब तक का सबसे अधिक ऊंचाई पर दर्ज किया गया गुफा का घोंघा है। इस खोज से साबित होता है कि ताजे पानी के गुफा घोंघे 2,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित चूना पत्थर की गुफा प्रणालियों में भी रह सकते हैं।
अपने भूमिगत आवास में यह घोंघा एक मीटर से भी कम गहरे पानी में बजरी और टूटी चट्टानों के बीच रहता है। गुफा का तापमान लगभग 20 डिग्री सेंटीग्रेड पर स्थिर रहता है, जो इन सूक्ष्म जीवों को अनुकूल वातावरण देता है। प्रयोगशाला के अवलोकनों से इनके भोजन का भी पता चला है। ये घोंघे पत्थरों पर उगने वाली सूक्ष्म शैवाल और शोधकर्ताओं द्वारा दिए गए मछली के भोजन को खाते हुए देखे गए।
अगस्त 2025 में की गई जांच के दौरान शोधकर्ताओं को सिर्फ 3 जीवित वयस्क घोंघे और 1 खाली खोल मिला। एक भी छोटा घोंघा न मिलने से वैज्ञानिकों का मानना है कि इनकी आबादी बेहद कम है और इनके संरक्षण का भविष्य आशावादी नहीं है। शोधकर्ता अब गुफाओं के संरक्षण के लिए त्वरित कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
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