कई बड़ी घटनाओँ के बाद अब लोगों का ध्यान इधर गया है
गृह मंत्रालय का विशेष आदेश है
दूसरे राज्य में नहीं लाया जाएगा
इस विशेष आदेश का औचित्य क्या
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: देश और दुनिया की सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ाने वाले कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की गतिविधियां और उसका दायरा भले ही जेल की सलाखों के पीछे सिमट गया हो, लेकिन उसके नाम से जुड़े अपराधों और धमकियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में एक नया मामला सामने आया है जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले एक सक्रिय समूह ने बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई गोलीबारी की घटना की खुली जिम्मेदारी ली है। इस हाई-प्रोफाइल मामले और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सामने आ रहे गंभीर घटनाक्रमों के बावजूद, बिश्नोई के लिए देश की अलग-अलग राज्यों की पुलिस चाहकर भी उससे आसानी से पूछताछ नहीं कर पा रही है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के सख्त और स्पष्ट आदेशों के कारण लॉरेंस बिश्नोई अहमदाबाद की उच्च सुरक्षा वाली साबरमती सेंट्रल जेल के भीतर बेहद कड़े पहरे में बंद है। स्थिति यह है कि अन्य राज्यों की पुलिस को किसी भी मामले के सिलसिले में उससे पूछताछ करने से पहले संबंधित न्यायालय से विशेष अनुमति लेनी पड़ती है।
हाल ही में कई बड़े और चौंकाने वाले घटनाक्रम सामने आए हैं। इनमें अमेरिका द्वारा ऑपरेशन हार्डबॉल के तहत जारी किया गया वह अभियोग भी शामिल है, जिसमें खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से लॉरेंस बिश्नोई के सीधे जुड़ाव को उजागर किया गया है। इसके अलावा, उसके आपराधिक सिंडिकेट द्वारा अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हालिया हमले की जिम्मेदारी लेने जैसे गंभीर मामलों के बाद भी बिश्नोई की कानूनी और प्रशासनिक स्थिति में कोई नरमी नहीं आई है। इन सबके मद्देनजर, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अगस्त 2026 में उसके आवाजाही पर लगे प्रतिबंध के आदेश को एक बार फिर से बढ़ा दिया है।
गौरतलब है कि 33 वर्षीय गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को 10 मई 2023 को दिल्ली या अन्य जेलों से स्थानांतरित करके अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल में लाया गया था। इस प्रकार, उसने इस अति-सुरक्षित (हाई-सिक्योरिटी) जोन में लगभग साढ़े तीन साल का समय बिता लिया है। जेल का यह विशेष हिस्सा उन खूंखार आतंकवादियों और बम धमाकों के दोषियों के लिए आरक्षित है, जिन पर अत्यधिक नजर रखी जाती है।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए लगातार चौथे विशेष आदेश के प्रावधानों के तहत, बिश्नोई को किसी भी परिस्थिति में जेल परिसर से बाहर ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके साथ ही, कानून व्यवस्था और सुरक्षा कारणों से अदालतों में उसकी पेशी से जुड़ी सभी कार्यवाही केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।