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ओडिशा कैंपस चुनाव में सत्ता को स्पष्ट बढ़त

विपक्ष बरकरार, कांग्रेस निराशाजनक और जेन जेड फैक्टर बेअसर

सोशल मीडिया के प्रचार का असर नहीं

बीजेडी का असर अब तक कायम दिखा

पारंपरिक चुनाव प्रचार का असर दिखा

प्रसन्न महांति

भुवनेश्वरः आठ साल बाद हुए ओडिशा कैंपस चुनाव में सत्ता और संगठन दोनों चले। 285 कॉलेजों के घोषित नतीजों में एबीवीपी ने 142 पर जीत दर्ज कर बढ़त ली, तो बीसीजेडी ने 121 पर जीत कर विपक्ष में रहते हुए भी अपनी पकड़ बरकरार रखी। एनएसयूआई सिर्फ 5 सीटों पर सिमट गई, जो कांग्रेस के लिए निराशाजनक प्रदर्शन है। जेन जेड फैक्टर का ज्यादा असर देखने को नहीं मिला। एबीवीपी ने 6 यूनिवर्सिटी में क्लीन स्वीप और 756 निर्विरोध जीत का दावा किया। बीजेपी में आर्यन महापात्रा, राजधानी में अभिनाश पाढ़ी, उत्कल में अभिराम मिश्रा, बेरहामपुर में कीर्तिबंत राणा अध्यक्ष बने।

बीसीजेडी के लिए सबसे बड़ी राहत रावेंशॉ और रमा देवी की जीत है। रावेंशॉ में बिस्वजीत साहू और रमा देवी महिला विश्वविद्यालय में सोनाली बेहरा अध्यक्ष बने। ये दोनों कैंपस ओडिशा की राजनीति की नर्सरी माने जाते हैं। सत्ता गंवाने के बाद बीजद के लिए यह 121 सीटें संजीवनी से कम नहीं।

एनएसयूआई का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। 5 कॉलेजों से आगे वह नहीं बढ़ पाई। उत्कल जैसे बड़े कैंपस में भी उसे छोटे पदों से संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में रील, मीम और इन्फ्लुएंसर कैंपेन का शोर खूब था, पर वोट जमीनी मुद्दों पर पड़ा। हॉस्टल, मेस, लाइब्रेरी, बस सुविधा और शिक्षकों से संपर्क ही निर्णायक रहा। साफ है – जेन जेड वोटर बूथ तक आया, पर वोट संगठन को दिया। रील पॉलिटिक्स फेल हो गई।

राजनीतिक मायने: भाजपा के लिए यह अगले 3 साल कैंपस पर नियंत्रण और कैडर तैयार करने का मौका है। बीजद के लिए यह नतीजा 2027 के पंचायत चुनावों में कार्यकर्ताओं में जोश भरेगा। कांग्रेस के लिए संदेश साफ है – ओडिशा में मुकाबला अब भाजपा बनाम बीजद है। और अपना स्थितिको मजबूत करनेकेलिए कांग्रेस्को खूब मेहनत करना होगा।