वैज्ञानिकों ने पहली बार खोजा जॉम्बी सेल्स
कैसे बची रहती है यह कोशिकाएं
कुछ सेनेसेन्स नामक अवस्था में
वे अंदर से सूजन को बढ़ाते हैं
राष्ट्रीय खबर
रांचीः सिडर्स-सिनाई हेल्थ साइंसेज यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने एक ऐसे प्रोटीन की खोज की है, जो हानिकारक उम्रदराज़ (ज़ॉम्बी) कोशिकाओं को प्रतिरक्षा प्रणाली की नज़र से बचने में मदद कर सकता है। यह प्रोटीन इन कोशिकाओं को शरीर से बाहर निकाले जाने के बजाय वहीं बनाए रखने में मदद करता है, जिससे शरीर में इनका संचय होता है और बुढ़ापे से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का विकास हो सकता है।
देखें इससे संबंधित वीडियो
सेल मेटाबॉलिज्म पत्रिका में प्रकाशित यह खोज, पीडी-एल2 नामक प्रोटीन की पहचान एक संभावित ऐसे लक्ष्य (target) के रूप में करती है, जिसे निशाना बनाकर इन हानिकारक कोशिकाओं को समाप्त करने वाले उपचार विकसित किए जा सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रोटीन एक ब्लड मार्कर (रक्त सूचक) के रूप में भी काम कर सकता है, जिससे इन कोशिकाओं का पता लगाने और निगरानी करने का रास्ता आसान हो सकता है।
अध्ययन के मुख्य और सह-संबंधित लेखक तथा सिडर्स-सिनाई में मेडिसिन के रिसर्च असिस्टेंट प्रोफेसर, सेलिम चैब ने कहा, हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि पीडी-एल2 उन कोशिकाओं को शरीर में बने रहने में मदद कर सकता है, जिन्हें सामान्य रूप से प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा हटा दिया जाना चाहिए था।
जैसे-जैसे कोशिकाएं पुरानी या क्षतिग्रस्त होती हैं, उनमें से कुछ सेनेसेन्स नामक अवस्था में प्रवेश कर जाती हैं। ये कोशिकाएं विभाजित होना बंद कर देती हैं लेकिन जीवित रहती हैं और नष्ट होने के बजाय ऊतकों में बनी रहती हैं। समय के साथ, ये जमा हो सकती हैं और ऐसे पदार्थों को छोड़ती हैं जो सूजन को बढ़ावा देते हैं और आसपास की कोशिकाओं के सामान्य कामकाज को बाधित करते हैं।
इन सेनेसेंट (ज़ॉम्बी) कोशिकाओं का जमाव कई ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा पाया गया है जो उम्र बढ़ने के साथ आम हो जाती हैं। यह समझना कि ये कोशिकाएं शरीर में क्यों बनी रहती हैं—विशेष रूप से तब जब प्रतिरक्षा प्रणाली को इन्हें हटा देना चाहिए—वैज्ञानिकों को इनके हानिकारक प्रभावों को कम करने के नए तरीके विकसित करने में मदद कर सकता है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि पीडी-एल2 प्रोटीन इन कोशिकाओं को प्रतिरक्षा प्रणाली की सफाई प्रक्रिया से बचाकर इस पूरे चक्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस प्रोटीन की भूमिका की जांच करने के लिए, वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला के चूहों पर प्रयोग किए, जिनमें पीडी-एल2 को या तो हटा दिया गया या ब्लॉक कर दिया गया। दोनों ही तरीकों से सेनेसेंट कोशिकाओं का जमाव कम हुआ और उनके द्वारा छोड़े जाने वाले सूजन संबंधी पदार्थों का स्तर भी नीचे आया।
यह लाभ केवल कोशिकीय स्तर तक सीमित नहीं था। पीडी-एल2 गतिविधि में कमी वाले चूहों में शर्करा (शुगर) को पचाने की क्षमता में सुधार देखा गया और उनकी ग्रिप स्ट्रेंथ (पकड़ की मजबूती) भी बेहतर हुई। इससे संकेत मिलता है कि इस प्रोटीन को निशाना बनाने से बुढ़ापे से प्रभावित होने वाले शारीरिक कार्यों में सुधार हो सकता है।
टीम ने मानव कोशिकाओं और ऊतकों का भी परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि पुरानी कोशिकाएं युवा कोशिकाओं की तुलना में अधिक पीडी-एल2 का उत्पादन करती हैं और कुछ मानव ऊतकों में उम्र के साथ इस प्रोटीन का स्तर बढ़ता है।
ये परिणाम इस संभावना को जन्म देते हैं कि पीडी-एल2 को ब्लॉक करने से प्रतिरक्षा प्रणाली को हानिकारक कोशिकाओं को पहचानने और उन्हें नष्ट करने में मदद मिल सकती है। अध्ययन के वरिष्ठ लेखक जेम्स किर्कलैंड ने कहा, यदि हम इस प्रोटीन को रोकने का कोई तरीका ढूंढ लेते हैं, तो हम प्रतिरक्षा प्रणाली को इन कोशिकाओं से छुटकारा पाने में मदद कर सकते हैं। हालाँकि, ये परिणाम आशाजनक हैं, लेकिन इंसानों पर इसका उपयोग करने से पहले अभी और शोध की आवश्यकता है।
#ZombieCells #AgingResearch #ImmuneSystem #CellMetabolism #HealthyAging #ज़ॉम्बीसेल्स #स्वास्थ्यशोध #प्रतिरक्षाप्रणाली #एंटीएजिंग #मेडिकलन्यूज