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कतर ने फिर दी दी मध्यस्थता की सलाह

पूरी दुनिया पर इस युद्ध की आग की लपटें पहुंची है

दुबईः कतर ने एक बार फिर कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि मौजूदा ईरान युद्ध की भारी कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ रही है। इसके साथ ही कतर ने कूटनीतिक वार्ताओं और बातचीत के माध्यम से इस संघर्ष को तुरंत समाप्त करने की पुरजोर अपील की है। दोहा में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान, विदेश मंत्रालय के मीडिया और संचार विभाग के निदेशक इब्राहिम बिन सुल्तान इब्राहिम अल हाशमी ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव को कम करने और वार्ता में प्रगति हासिल करने के लिए कूटनीतिक संपर्क तथा उच्च-स्तरीय दौरे लगातार जारी हैं। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि कतर ईरानी पक्ष से जुड़े ताजा घटनाक्रमों और रुख की जानकारी प्राप्त करने के लिए उनकी यात्रा का स्वागत करने को पूरी तरह तैयार है।

पिछले सप्ताह विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसार ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले इस तनाव को असहनीय करार दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इस संघर्ष के कारण होने वाला व्यवधान केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दायरे में उर्वरक सामग्री, हीलियम और एल्यूमीनियम जैसी आवश्यक आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इस संकट को सुलझाने के लिए, दोहा प्रशासन होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते नौपरिवहन की स्वतंत्रता को बहाल करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है, जो वाशिंगटन और तेहरान के बीच किसी समझौते पर पहुंचने के व्यापक प्रयासों का एक अहम हिस्सा है।

फरवरी के अंत में ईरान पर संयुक्त रूप से किए गए अमेरिकी-इस्राइली हमलों के साथ शुरू हुए इस युद्ध ने खाड़ी देशों के निर्यात के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को गंभीर रूप से बाधित कर दिया है। यह स्थिति तब और विकट हो गई जब ईरान और अमेरिका दोनों ने इस सामरिक क्षेत्र में अपने-अपने नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दिए।

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान अल हाशमी ने सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए मक्का रक्षा गठबंधन का समर्थन किया, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस सैन्य समझौते में कतर के शामिल होने के बारे में बात करना अभी बहुत जल्दबाजी होगी। यह बयान रियाद में सोमवार को हुई एक आपातकालीन बैठक के बाद आया है, जिसमें तीनों देशों ने अपनी सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताओं को सक्रिय करने और सऊदी अरब में अपनी सैन्य क्षमताओं तथा बलों को तेजी से तैनात करने पर सहमति व्यक्त की थी। उल्लेखनीय है कि यह रणनीतिक गठबंधन 7 अगस्त को हस्ताक्षरित एक समझौते के तहत स्थापित किया गया था।