मतदान में पुरानी नीति को बहाल रखने का समर्थन
बर्नः यूरोप के राजनीतिक और कूटनीतिक गलियारों से एक बेहद दिलचस्प और दूरगामी परिणाम वाला जनमत संग्रह सामने आया है, जिसने स्विट्जरलैंड की सदियों पुरानी तटस्थता नीति पर मुहर लगा दी है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण तनाव तथा यूरोपीय भू-राजनीतिक हालात में आए भारी बदलाव के बावजूद, स्विट्जरलैंड के मतदाताओं ने देश की पारंपरिक विदेश नीति में किसी भी तरह के कड़े बदलाव या संसोधन की मांग को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है।
हाल ही में संपन्न हुए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय जनमत संग्रह के दौरान भारी बहुमत यानी लगभग 70 प्रतिशत से अधिक स्विस नागरिकों ने इस बात के पक्ष में मतदान किया कि देश को अपनी तटस्थता के नियमों को और अधिक कड़ा या जटिल नहीं बनाना चाहिए। इस शानदार नतीजे से यह साबित हो गया है कि स्विट्जरलैंड की आम जनता अपनी ऐतिहासिक गुटनिरपेक्ष और तटस्थ पहचान को बनाए रखने के पक्ष में है।
यह जनमत संग्रह ऐसे समय में आयोजित किया गया था जब यूरोपीय देशों के बीच रूस की आक्रामकता को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। कुछ राजनीतिक समूहों और दक्षिणपंथी दलों की यह मांग थी कि स्विट्जरलैंड को अपनी तटस्थता की परिभाषा को और अधिक कठोर करना चाहिए ताकि देश किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद या आर्थिक प्रतिबंधों के दायरे में अनावश्यक रूप से न फंसे।
इसके विपरीत, अधिकांश स्विस मतदाताओं का यह मानना था कि मौजूदा तटस्थता नीति ही देश की शांति, सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि की सबसे बड़ी गारंटी है। सरकार और अधिकांश राजनीतिक दलों ने भी इसी बात पर जोर दिया था कि अधिक कड़े नियम लागू करने से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्विट्जरलैंड की मध्यस्थता करने की भूमिका कमजोर हो सकती है, जो ग्लोबल कूटनीति के लिहाज से नुकसानदायक साबित होता।
इस स्पष्ट और निर्णायक जनादेश के बाद अब यह तय हो गया है कि स्विट्जरलैंड अपनी अंतरराष्ट्रीय नीतियों में पारंपरिक लचीलेपन को बरकरार रखेगा, जिससे उसे दुनिया भर के देशों के बीच एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका निभाने में मदद मिलती रहेगी। यूरोपीय संघ और अन्य पश्चिमी देशों की नजरें इस जनमत संग्रह के परिणामों पर टिकी हुई थीं, क्योंकि इसका सीधा असर स्विट्जरलैंड द्वारा रूस के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों और भविष्य की रणनीतिक दिशा पर पड़ने वाला था। विश्लेषकों का मानना है कि इस भारी बहुमत ने एक बार फिर से इस बात की पुष्टि कर दी है कि स्विस नागरिक अपनी राजनीतिक और राष्ट्रीय पहचान के मामलों में पारंपरिक मूल्यों पर अडिग रहना पसंद करते हैं।