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महाराष्ट्र के चुनाव अधिकारी ने अधिकार मांगे

विवाद सामने आया तो शिकायतें भी आम होने लगी

जमीनी अफसरों के पास पहुंच नहीं है

मंजूरी के लिए काफी इंतजार होता है

ऐसे में समय पर काम पूरा नहीं होता

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन कार्यालय से जुड़े एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के सुचारू संचालन को लेकर चुनाव आयोग के सामने एक महत्वपूर्ण मांग रखी है। अधिकारी ने एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े मैदानी स्तर के कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों के लिए स्थानीय कर्मचारियों व अधिकारियों को अधिक अधिकार दिए जाने की वकालत की है। उनका तर्क है कि जब तक जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के पास स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की पर्याप्त शक्ति नहीं होगी, तब तक मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और सत्यापन का कार्य पूरी पारदर्शिता और गति के साथ पूरा नहीं किया जा सकता है।

यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब देश भर में एसआईआर प्रक्रिया और मतदाता सूचियों से नाम हटाने या जोड़ने के मामलों को लेकर पहले से ही काफी राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल मची हुई है। महाराष्ट्र के इस चुनाव अधिकारी का कहना है कि स्थानीय स्तर पर बूथ लेवल ऑफिसर्स और अन्य फील्ड स्टाफ को कई बार छोटी-छोटी मंजूरियों और दिशानिर्देशों के लिए उच्च स्तर पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे कार्यप्रणाली में देरी होती है। यदि स्थानीय कर्मचारियों को उनके अधिकार क्षेत्र के अनुसार अधिक वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां प्रदान की जाएं, तो वे जमीनी स्तर पर आने वाली अड़चनों को तुरंत दूर कर सकेंगे और प्रक्रिया को अधिक त्रुटिहीन बनाया जा सकेगा।

चुनाव आयोग के भीतर चल रही प्रशासनिक समीक्षा बैठकों के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है। अधिकारी का मानना है कि पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिए सबसे जरूरी है कि मैदानी अमले का मनोबल ऊंचा रहे और उनके पास जिम्मेदारी के साथ-साथ आवश्यक अधिकार भी हों। हालांकि, निर्वाचन आयोग के उच्च अधिकारियों ने इस मांग पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में प्रशासनिक सुधारों के तहत इस पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है।