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कुकी-ज़ो काउंसिल ने केंद्र को व्यापक आंदोलन की चेतावनी

आतंकवादियों ने नागा युवक की हत्या कर दी

राज्य में फिर से बिगड़ गया माहौल

विलय समझौते की शर्तों का उल्लेख

सरकार को दस अक्टूबर तक समय दिया

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : हाल ही में मणिपुर राज्य विभिन्न मोर्चों पर भारी तनाव, विरोध प्रदर्शन और प्रशासनिक उथल-पुथल से जूझ रहा है। राज्य में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति एक बार फिर गंभीर चर्चा का विषय बन गई है। 21 सितंबर को तामेंगलोंग जिले के तामेई अनुमंडल में संदिग्ध आतंकवादियों द्वारा 17 वर्षीय एनके विफेनबौ की बेरहमी से हत्या कर दी गई। स्कूल लौटते समय हुई इस घटना की संयुक्त जनजाति परिषद (जेटीसी) ने कड़ी निंदा करते हुए इसे आतंकवाद का बर्बर कृत्य करार दिया है।

मणिपुर और भारत के बीच 1949 के विलय समझौते को लेकर राष्ट्रीय क्रांतिकारी मोर्चा (एनआरएफ) द्वारा बुलाए गए 24 घंटे के बंद से जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। शैक्षणिक संस्थान, बैंक और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे तथा अंतर-राज्यीय परिवहन सेवाएं भी प्रभावित हुईं, हालांकि विमान सेवाएं सामान्य रहीं।

जातीय हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों को लेकर कुकी-जो काउंसिल (केजेडसी) ने केंद्र सरकार को 10 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम दिया है। काउंसिल ने प्रशासनिक और मानवीय चिंताओं, खाद्य पदार्थों की कमी, एनआईए की कार्रवाइयों और राजनीतिक समाधान पर स्पष्टता की मांग करते हुए व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी है।

दूसरी ओर, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के सेवानिवृत्त उप मुख्य अभियंता सजल कांति दास और उनकी पत्नी के खिलाफ लगभग ₹88.20 लाख की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया है। एजेंसी उनकी संपत्तियों और बैंक खातों की जांच कर रही है। राज्य में सुरक्षा, विद्रोही समूहों के बंद और प्रशासनिक असंतुलन ने आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।