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बेहोश करने के बाद बाघिन की मौत हो गयी

महाराष्ट्र के अमरावती में बाघ की मौत से लोगों को राहत

चार लोगों को इसने मार डाला था

पिंजरे में सकुशल कैद किया गया था

बेहोश हालत में ही उसकी मौत हो गयी

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः महाराष्ट्र के अमरावती और वर्धा जिलों में पिछले तीन हफ्तों से दहशत का पर्याय बनी एक बाघिन को वन विभाग की विशेष टीम ने बेहोश (ट्रैंक्विलाइज) कर पकड़ लिया। हालांकि, नागपुर स्थित वन्यजीव बचाव केंद्र ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इस बाघिन ने बीते 24 घंटों में दो मौतों सहित कुल चार लोगों को अपना शिकार बनाया था।

अमरावती के उप वन संरक्षक (क्षेत्रीय) अर्जुन के.आर. के अनुसार, यह बाघिन मध्य अगस्त से ही वर्धा जिले के आष्टी तालुका से निकलकर अमरावती के वरुड़, मोर्शी और चांदूर बाजार तालुका में सक्रिय थी। इस दौरान उसने कई मवेशियों और ग्रामीणों पर जानलेवा हमले किए। अमरावती जिला सूचना कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में मृतकों की पहचान रामभाऊ भोयर (74 वर्ष): 17 अगस्त को नरसिंहपुर (वर्धा) में हमला। चरणदास इखे (55 वर्ष): 27 अगस्त को भंभोरा (मोर्शी) में शिकार बनाया। उर्मिला इवने (18 वर्ष): 6 सितंबर को सोनोरी (चांदूर बाजार) में मृत्यु। दिनेश आवरे (45 वर्ष): 7 सितंबर को शिरजगाँव कसबा (चांदूर बाजार) में हमला।

6 और 7 सितंबर के बीच महज 24 घंटों के भीतर दो ग्रामीणों की जान जाने से पूरे इलाके में जनआक्रोश फैल गया था। बिगड़ते हालात को देखते हुए वन विभाग ने हाई अलर्ट जारी किया और 24 घंटे गश्त, कैमरा ट्रैप, थर्मल ड्रोन व जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से व्यापक खोज अभियान शुरू किया। जिला प्रशासन और पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त सुरक्षा इंतजाम किए थे।

सोमवार को चांदूर बाजार तालुका के शिरजगाँव कसबा इलाके में वन विभाग की टीम ने तकनीकी उपायों से बाघिन को सुरक्षित रूप से बेहोश कर पिंजरे में कैद किया, जिससे क्षेत्र पर मंडराता बड़ा खतरा टल गया। लेकिन नागपुर ले जाते समय बाघिन की सांसें थम गईं। साथ मौजूद पशु चिकित्सकों की टीम ने उसे पुनर्जीवित करने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। अधिकारियों का कहना है कि मौत के सटीक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा।

वन विभाग ने सभी मृतक व्यक्तियों के परिजनों को तत्काल वित्तीय सहायता राशि प्रदान की है। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में अमरावती व वर्धा वन प्रभाग, मेलघाट टाइगर प्रोजेक्ट, अकोला वन विभाग, पुणे से आई विशेषज्ञ टीम, स्थानीय प्रशासन, पुलिस और स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।