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जीडीपी से 12 लाख करोड़ रुपये गायब हैः सुभाष गर्ग

देश के पूर्व वित्त सचिव से दावों पर चुप्पी साध गयी मोदी सरकार

सरकार की तरफ से कई बार सफाई

बिना डेटा के संशोधन किसका हुआ

असली विकास दर 2.6 प्रतिशत ही है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने एक साक्षात्कार के दौरान भारत के आधिकारिक जीडीपी आंकड़ों में कागजों पर आई खरबों रुपये की अचानक गिरावट को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। आम नागरिक के लिए जीडीपी देश का वित्तीय रिपोर्ट कार्ड होता है, जो सभी नागरिकों की कुल आय और सामूहिक संपत्ति को मापता है। जब सरकार ने हाल ही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत जीडीपी विकास दर का जश्न मनाया, तो इसे अर्थव्यवस्था की तेज गति का संकेत माना गया। हालांकि, गर्ग ने यह दावा करते हुए बहस छेड़ दी कि यदि बिना किसी डेटा संशोधन के मूल गणित को देखा जाए, तो वास्तविक विकास दर केवल 2.6 प्रतिशत के आसपास थी और आधिकारिक खातों से खरबों रुपये गायब हो गए हैं।

इस साक्षात्कार के वायरल होने और राजनीतिक हलकों में तूल पकड़ने के बाद सरकारी मंत्रियों और नौकरशाहों को स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा। गर्ग का कहना है कि इतने सारे सरकारी मंत्रियों, अर्थशास्त्रियों और सचिवों द्वारा लगातार दी जा रही सफाई खुद यह दर्शाती है कि कहीं न कहीं कोई बड़ी विसंगति है। गर्ग ने स्पष्ट किया कि वे अपने लेख और दिए गए बयानों पर पूरी तरह कायम हैं।

गर्ग के अनुसार, मूल मुद्दा यह है कि चालू कीमतों पर भारत की जीडीपी 86 लाख करोड़ रुपये से घटकर 80 लाख करोड़ रुपये कैसे रह गई—यानी 6 लाख करोड़ रुपये की सीधी कमी। उन्होंने बताया कि यह डेटा पहली बार फरवरी 2026 में जारी किया गया था, जिसे बाद में 5 जून और 31 अगस्त को संशोधित किया गया। 2023-2024 की नई श्रृंखला के संदर्भ में यह गिरावट बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये हो जाती है। गर्ग ने कहा कि सरकार ने आधिकारिक आंकड़ों से इस 12 लाख करोड़ रुपये के गायब होने का कोई स्पष्ट और संतोषजनक कारण नहीं बताया है।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह मानक वैश्विक आधार-वर्ष संशोधनों का हिस्सा है और धरातल पर मजबूत औद्योगिक उत्पादन दिख रहा है। भारत की आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए गर्ग ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था कमजोरियों का सामना कर रही है। नई तकनीक, ऊर्जा संक्रमण, डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में पर्याप्त निवेश नहीं हो रहा है। इसके साथ ही विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और शेयर बाजारों में विदेशी निवेशकों की रुचि घटी है, रुपया तेजी से कमजोर हो रहा है और राजकोषीय घाटा तथा कर्ज का स्तर ऊंचा बना हुआ है। गर्ग ने चेतावनी दी कि यदि सरकार 12 लाख करोड़ रुपये की इस विसंगति को सही ढंग से नहीं समझाती है, तो भविष्य में भारत के आर्थिक आंकड़ों और नंबरों पर वैश्विक विश्वास को गंभीर ठेस पहुंच सकती है।