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जेलेंस्की से मिल युद्ध समाप्त करने की पहल की

देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर अपनी यात्रा पर कीव पहुंचे

रूसी तेल खरीद का विवाद नहीं है

यूक्रेन ने इस यात्रा की सराहना की

भारत से जो बन पड़ेगा वह करेंगे

कीवः विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए किसी भी तरह की मदद के लिए भारत की तत्परता को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका समाधान केवल संवाद और कूटनीति से ही संभव है, न कि किसी देश द्वारा रूसी तेल या अन्य उत्पादों की खरीद बंद करने से।

यूक्रेन के विदेश मंत्री अंद्री सिबीहा ने मॉस्को द्वारा जारी तीव्र ड्रोन हमलों के बीच कीव में जयशंकर की मौजूदगी को साहसिक बताया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने भी जयशंकर के साथ हुई मुलाकात के दौरान युद्ध समाप्त करने की प्रतिबद्धता के लिए भारत का आभार जताया। ज़ेलेंस्की ने तेहरान की मदद से बने शाहेद ड्रोनों का जिक्र करते हुए रूस-ईरान गठजोड़ की ओर इशारा भी किया।

विदेश मंत्री के साथ संयुक्त वक्तव्य में जयशंकर ने कहा, भारत लगातार यह मानता रहा है कि यह युद्ध का युग नहीं है और समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेंगे। अभी दो दिन पहले बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि अब अंतहीन युद्ध की जगह युद्ध के अंत को दी जानी चाहिए। यदि भारत किसी भी तरह से मददगार हो सकता है, तो हम तैयार हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्री ने भी मोदी के आह्वान का स्वागत करते हुए कूटनीति के लिए तैयार रहने की बात कही।

नये प्रतिबंधों के बाद भी रूसी तेल खरीदने के सवाल पर जयशंकर ने कहा कि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की चुनौतियों को समझना होगा। यह संघर्ष किसी के द्वारा तेल, एल्यूमिना या उर्वरक खरीदने या न खरीदने से हल नहीं होगा, बल्कि इसके लिए बातचीत आवश्यक है। दोनों पक्षों ने काला सागर में मर्चेंट शिपिंग पर हुए हमलों पर भी चर्चा की, जिसमें भारतीय नाविकों की मृत्यु हुई थी। जयशंकर ने कहा कि नागरिक जहाजों पर हमलों से ग्लोबल साउथ के कई देशों को ईंधन, उर्वरक और खाद्यान्न की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ज़ेलेंस्की ने भी कहा कि खाद्यान्न आपूर्ति रोकना पूरी तरह से अस्वीकार है।