यह भी अडाणी को फायदा पहुंचायेगाः गोहिल
सारा पैसा निजी कंपनी के लिए है
पचास फीसदी सिर्फ अन्वेषण के लिए
ओएनजीसी को यह काम दे दिया जाए
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार की 84,084 करोड़ रुपये की समुद्र मंथन योजना को निजी कंपनियों और विशेष रूप से अडाणी समूह को अनुचित वित्तीय लाभ पहुंचाने का माध्यम करार दिया है। पार्टी ने इस पूरी योजना को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग उठाई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल ने एक पत्रकार वार्ता में कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपतटीय (ऑफशोर) तेल और गैस अन्वेषण के पहले चरण के लिए 84,084 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर की है।
उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना के तहत अन्वेषण करने वाली निजी कंपनियों को कुल लागत का 50 प्रतिशत फंड सीधे तौर पर सरकारी खजाने से मुहैया कराया जाएगा। 2. प्रक्रियात्मक लाभ और संयुक्त उद्यम के व्यावसायिक पहलू गोहिल ने तंज कसते हुए कहा कि इस समुद्र मंथन से आम जनता को विष और अडाणी समूह को अमृत मिलने वाला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्यतः किसी भी अपतटीय अन्वेषण के लिए कंपनियों को पहले ब्लॉक खरीदने पड़ते हैं और फिर कठिन पर्यावरणीय व नियामक मंजूरियां लेनी पड़ती हैं। हालांकि, अडाणी समूह के पास पहले से ही सभी आवश्यक मंजूरियों के साथ तीन ब्लॉक तैयार स्थिति में मौजूद हैं, जिससे वे इस योजना का तुरंत और सबसे पहला लाभ उठाने की स्थिति में हैं।
गोहिल ने प्रणव अडाणी के सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए बताया कि अडाणी और वेलस्पन ने 2005 में एक संयुक्त उद्यम स्थापित किया था, जिसमें अडाणी समूह की 65 और वेलस्पन की 35 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि घाटे में चल रही इस उपक्रम कंपनी को नया जीवन देने और इसके व्यावसायिक भविष्य को चमकाने के लिए ही यह सरकारी नीति बनाई गई है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने पुरजोर मांग की कि समुद्र मंथन योजना के लिए आवंटित 84,084 करोड़ रुपये किसी भी निजी इकाई या कॉर्पोरेट घराने को देने के बजाय सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन को दिए जाने चाहिए। गोहिल ने देश में जारी भीषण बेरोजगारी और कृषि संकट के बीच जनता के करों के पैसों को निजी उद्योगपतियों की ओर मोड़े जाने की नीति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सार्वजनिक संपत्तियों और राष्ट्रीय संसाधनों के निजीकरण के प्रयासों का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रीय हित सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों को मजबूत करने में निहित है।