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सुप्रीम कोर्ट ने टाटा स्टील का बकाया मांग रद्द कर दिया

जीएसटी अधिकारियों द्वारा की गयी कार्रवाई अदालत में खारिज

इनपुट क्रेडिट में गड़बड़ी का आरोप था

अदालत ने माना कहीं गड़बड़ी नहीं हुई

हजार करोड़ से अधिक की नोटिस रद्द

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने टाटा स्टील को एक बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिकारियों द्वारा जारी 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के कारण बताओ सह-मांग नोटिस को रद्द कर दिया है। यह नोटिस वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2022-23 के दौरान इनपुट टैक्स क्रेडिट के कथित गलत इस्तेमाल को लेकर जारी किया गया था।

रांची स्थित सेंट्रल टैक्स (ऑडिट) आयुक्त कार्यालय द्वारा 27 जून को टाटा स्टील को नोटिस भेजा गया था। इसमें कंपनी से पूछा गया था कि सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 74(1) के उल्लंघन के तहत उनसे 1,007,54,83,342 रुपये की वसूली क्यों न की जाए। टाटा स्टील ने शीर्ष अदालत में दलील दी कि सीजीएसटी अधिनियम की धारा 74 का इस्तेमाल केवल धोखाधड़ी, जानबूझकर गलत बयान देने या तथ्यों को छिपाने के मामलों में होता है। कंपनी ने कहा कि नोटिस में ऐसा कोई भी तथ्य साबित नहीं किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: न्यायमूर्ति जे.बी. पारडीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने माना कि टाटा स्टील की ओर से कर चोरी या अतिरिक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने की कोई जानबूझकर की गई कोशिश नहीं की गई थी। पीठ ने कहा कि केवल धारा 74 के तहत समय सीमा बढ़ाने के लिए तथ्यों को छिपाने जैसी अमूर्त बातें कहना पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा, विभाग द्वारा इस मामले को लोक लेखा समिति (PAC) के समक्ष उठाने से यह स्पष्ट होता है कि कर निर्धारण अधिकारी स्वयं कर चोरी या अंतर को लेकर आश्वस्त नहीं थे। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कारण बताओ नोटिस को रद्द कर दिया।