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इंसान के भोजन श्रृंखला की आदत बदली है आलू ने

मूल निवासियों की आनुवांशिक बनावट पर शोध

भोजन का मुख्य आधार बन गया यह

प्राचीन जीन में इसकी मौजूदगी मिली

पेरू के मूल निवासियों में यह क्षमता

राष्ट्रीय खबर

रांचीः हजारों वर्षों से आलू एंडीज की जीवनशैली और संस्कृति का एक अनिवार्य हिस्सा रहा है। एंडीज के मूल निवासी कार्बोहाइड्रेट से भरपूर इस फसल को पालतू बनाने और अपने मुख्य आहार में शामिल करने वाले दुनिया के सबसे पहले लोग थे। अब वैज्ञानिकों ने एक नए शोध में चौंकाने वाला खुलासा किया है कि इस प्राचीन फसल पर अत्यधिक निर्भरता ने इंसानी विकास को भी गहराई से प्रभावित किया है।

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हाल ही में प्रतिष्ठित जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, पेरू के आज के मूल निवासियों में स्टार्च को पचाने वाले जीन की प्रतियां (कॉपी) दुनिया की किसी भी अन्य ज्ञात आबादी की तुलना में सबसे अधिक हैं। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स और बफेलो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में यह बात सामने आई है कि प्राकृतिक चयन ने लगभग 6,000 से 10,000 साल पहले एंडीज के उन मूल निवासियों का पक्ष लिया, जिनके पास लार में पाए जाने वाले एमाइलेज जीन की संख्या बहुत अधिक थी। यह वही दौर था जब एंडीज के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में आलू की खेती की शुरुआत हुई थी।

यूसीएलए में नृविज्ञान की सह-प्रोफेसर और इस अध्ययन की सह-लेखिका अबिगेल बिघम के अनुसार, जो लोग एएमवाई1 जीन की अधिक प्रतियां रखते हैं, उनकी लार में एमाइलेज एंजाइम का उत्पादन अधिक होता है, जिससे वे स्टार्च को बहुत तेजी और कुशलता से पचा पाते हैं। अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने पेरू के एंडीज क्षेत्र में क्वेचुआ भाषा बोलने वाले लोगों से डीएनए के नमूने एकत्र किए और उनकी तुलना दुनिया भर की दर्जनों वर्तमान मानव आबादी के जीनोमिक डेटाबेस से की।

बफेलो विश्वविद्यालय के जैविक विज्ञान के प्रोफेसर और इस अध्ययन के सह-संपादक ओमर गोककुमेन ने बताया कि यद्यपि एएमवाई1 जीन की पहली नकल कम से कम 8,00000 साल पहले इंसानों में हुई थी, लेकिन नए निष्कर्ष इस बात के अत्यंत मजबूत प्रमाण देते हैं कि एंडीज में आलू की खेती शुरू होने के बाद इस जीन पर प्राकृतिक चयन की प्रक्रिया सक्रिय हुई। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि लगभग 10,000 साल पहले, जिन लोगों के पास इस जीन की 10 या उससे अधिक प्रतियां थीं, उन्हें प्रति पीढ़ी जीवित रहने या प्रजनन करने में 1.24 फीसद का लाभ मिला।

समय के साथ, जिन लोगों में इस जीन की प्रतियां कम थीं, वे आबादी से धीरे-धीरे बाहर होते गए, जबकि अधिक प्रतियों वाले लोग बने रहे। कई पीढ़ियों की इस प्राकृतिक प्रक्रिया के परिणामस्वरूप, आज पेरू के मूल निवासियों के पास औसतन 10 एएमवाई1 प्रतियां हैं, जो इस अध्ययन में शामिल अन्य 83 मानव आबादी की तुलना में लगभग दो से चार प्रतियां अधिक हैं। इस बात की पुष्टि के लिए शोधकर्ताओं ने पेरू के मूल निवासियों की तुलना मेक्सिको के माया समुदाय से भी की, जिनका आलू की खेती का कोई पुराना इतिहास नहीं है; माया समुदाय के पास औसतन केवल 6 प्रतियां पाई गईं। यह शोध इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि मानव शरीर और चयापचय प्रणालियां पिछले 10,000 वर्षों में बदलती हुई खाद्य परिस्थितियों और आहार के अनुसार लगातार विकसित होती रही हैं।

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