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लुंगीवाला कहने पर विशेषाधिकार हनन नोटिस

जॉन ब्रिटान पर सुस्मिता देव की टिप्पणी से हंगामा

बीस मिनट से ज्यादा हंगामा चला

दक्षिण के सांसदों ने प्रदर्शन भी किया

भाषण के बीच लुंगीवाला कहा था

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः बुधवार को राज्यसभा की कार्यवाही भोजनावकाश से पहले केवल 21 मिनट ही चल पाई और इसे स्थगित करना पड़ा। यह हंगामा सीपीआई(एम) के सदस्य जॉन ब्रिटास के उस आरोप के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा कि इस हफ्ते की शुरुआत में कार्यवाही के दौरान भाजपा सांसद सुष्मिता देव ने उन्हें लुंगीवाला कहकर संबोधित किया था।

सदन के स्थगित होने के बाद, विपक्षी सांसदों ने संसद भवन के मुख्य प्रवेश द्वार यानी मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। विरोध दर्ज कराने के कई पुरुष सांसदों ने मुंडू (पारंपरिक दक्षिण भारतीय परिधान) पहना और विविधता में एकता के नारे लगाए।

सदन की मेज पर कागजात रखे जाने के बाद, श्री ब्रिटास ने इस मुद्दे को उठाया और इसे सदन की गरिमा तथा भारत की विविधता के सम्मान से जुड़ा मामला बताया। श्री ब्रिटास ने कहा, मैं भारी मन से यह मामला उठा रहा हूं। यह सदन की प्रतिष्ठा और सम्मान का सवाल है। मैं एक गर्वित भारतीय, एक गर्वित दक्षिण भारतीय और एक गर्वित मलयाली हूं। हमारा संविधान हमारी विविधता का जश्न मनाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सोमवार को जब वह आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 के खिलाफ एक सांविधिक प्रस्ताव पेश कर रहे थे, तब सुष्मिता देव अपनी सीट छोड़कर आईं और बार-बार उन पर फब्तियां कसते हुए उन्हें लुंगीवाला कहा। इस आरोप का विपक्षी सदस्यों ने समर्थन किया, जिनमें से कई सदस्यों ने कार्यवाही के दौरान मुंडू पहन रखा था। वहीं, सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जोर देकर कहा कि सुष्मिता देव को भी अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए।

सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने फैसले में कहा कि सदस्यों को ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए जिससे साथी सांसदों की भावनाएं आहत हों। उन्होंने कहा, हमारी संस्कृति अनूठी है और इसमें विभिन्न क्षेत्रीय संस्कृतियां शामिल हैं। हमारे सहयोगियों की सांस्कृतिक परंपराओं और क्षेत्रीय पहचान का कोई अनादर नहीं होना चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि चूंकि श्री ब्रिटास ने एक अन्य सदस्य पर आरोप लगाया है, इसलिए सुष्मिता देव को भी सुना जाना चाहिए।

दोपहर 2 बजे जब सदन की बैठक दोबारा शुरू हुई, तो उपसभापति हरिवंश ने सुष्मिता देव को बोलने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि वह असम से एक बंगाली हैं और उन्होंने विभिन्न राज्यों को देखा है जहां लोग अलग-अलग पोशाकें पहनते हैं। उन्होंने कहा, न तो मैंने और न ही किसी सदस्य ने किसी राज्य की पोशाक पर कोई लांछन लगाया है। सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने भी सभापति से सुष्मिता देव को अपनी बात रखने की अनुमति देने का आग्रह किया और कहा कि यदि दोनों सांसद चैंबर में आ जाएं तो गलतफहमी को दूर किया जा सकता है।