अब तो सरकार रोजगार चोरी भी करने लगी
खडगे और रमेश का बयान
आंकड़े कहते हैं रोजगार घट गये
राज्यों की आपत्तियों को नहीं सुना
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर वीबी-जी राम जी एक्ट को लेकर बेहद तीखा हमला बोला है। मुख्य विपक्षी दल ने नए कानून को सीधे तौर पर रोजगार चोरी करार दिया है और कहा है कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना को नष्ट करने की भारी कीमत अब देश के ग्रामीण मजदूरों को चुकानी पड़ रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने देश के केवल युवाओं पर ही नहीं, बल्कि यहां के मेहनतकश और गरीब मजदूरों पर भी अपनी नीतियों की लाठी चलाई है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, मोदी सरकार के कार्यकाल में मनरेगा को समाप्त कर दिया गया, जिससे लाखों परिवारों से उनका काम करने का अधिकार छिन गया। इसके स्थान पर वीबी-जी राम जी को थोप दिया गया, जिसने 50 प्रतिशत मजदूरों का रोजगार पूरी तरह से खत्म कर दिया।
खर्गे ने सरकार से तीखे सवाल पूछते हुए आगे कहा, क्या राज्यों को मनरेगा के लंबित पड़े 17,144 करोड़ रुपये के बकाए का भुगतान कर दिया गया है? क्या सूखा प्रभावित राज्यों को कोई विशेष सहायता पहुंचाई गई है? खरीफ की फसल की बुआई में 26.50 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है—क्या किसी को इसकी परवाह है? क्या केंद्र सरकार ने वीबी-जी राम जी के फंडिंग पैटर्न को लेकर कोई कदम उठाया है, जिसकी समीक्षा की मांग खुद बीजेपी शासित राज्यों ने की थी? जब देश का गरीब मजदूर सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है, तब मोदी सरकार उनकी न्यूनतम आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को भी छीन रही है और उनका मजाक उड़ा रही है।
वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की, जिसमें आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि सरकार के इस नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम के तहत रोजगार सृजन में भारी गिरावट आई है। जुलाई महीने में साल-दर-साल आधार पर रोजगार सृजन में 49.94 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है।
जयराम रमेश ने कहा, मोदी सरकार के वीबी-जी राम जी कानून का पहला महीना ही मनरेगा को नष्ट करने की भारी कीमत को उजागर कर रहा है। पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री ने बताया कि जुलाई 2026 में, जब से यह नया कानून लागू हुआ है, ग्रामीण रोजगार सृजन में पिछले साल यानी जुलाई 2025 की तुलना में भारी गिरावट आई है, जबकि तब मनरेगा लागू था।
रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने आंकड़े पेश किए और बताया कि काम के पर्सन-डेज़ (व्यक्ति-दिवस) में 49.94 प्रतिशत की गिरावट आई है, 51.45 प्रतिशत कम परिवारों को रोजगार मिला और लगभग 50 प्रतिशत कम रोजगार के अवसर सृजित हुए। रमेश ने कहा कि जब मोदी सरकार द्वारा मनरेगा को खत्म किया जा रहा था, तब कांग्रेस और पूरे विपक्ष ने बिल्कुल इसी बात की आशंका जताई थी जो आज सच साबित हो रही है।