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हरियाणा के प्रवासियों से जुड़ा बड़ा मुद्दा: संसद में उठे सवाल, जानें खाड़ी देशों में भारतीय कामगारों की सुरक्षा और पार्थिव शरीर लाने के नियम

चंडीगढ़: बेहतर भविष्य, रोजगार और अधिक आय की उम्मीद में प्रतिवर्ष लाखों भारतीय नागरिक खाड़ी देशों का रुख करते हैं। हरियाणा के भी महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, झज्जर, भिवानी, हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, नूंह और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में युवा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, कुवैत और ओमान जैसे देशों में कार्यरत हैं। किंतु इन सपनों के पीछे एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक तस्वीर उभरी है। संसद में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से 2025 के मध्य केवल सऊदी अरब और यूएई में ही 15,439 भारतीय नागरिकों की मृत्यु दर्ज की गई है।

🏛️ विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सांसद जयप्रकाश और सतपाल ब्रह्मचारी के सवाल पर दी जानकारी

यह विस्तृत और संवेदनशील जानकारी विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में प्रदान की।

हिसार से कांग्रेस सांसद जयप्रकाश ‘जेपी’ और सोनीपत से कांग्रेस सांसद सतपाल ब्रह्मचारी द्वारा संयुक्त रूप से पूछे गए तारांकित प्रश्न के उत्तर में सरकार ने यह ब्योरा दिया। सांसदों ने विदेशों में भारतीय नागरिकों की मृत्यु के कारण, कार्यस्थल की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, बीमा कवर, कानूनी सहायता और पीड़ित परिवारों को मिलने वाली सरकारी मदद के संबंध में स्पष्ट जवाब मांगा था।

📊 सऊदी अरब में सर्वाधिक 7,981 मौतें, यूएई दूसरे तो अमेरिका तीसरे स्थान पर

विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार बीते तीन वर्षों के दौरान अकेले सऊदी अरब में 7,981 भारतीय नागरिकों का निधन हुआ।

इनमें से 6,376 प्राकृतिक मौतें, 182 कार्यस्थल दुर्घटनाएं, 354 आत्महत्याएं, 29 आपराधिक घटनाएं तथा 1,040 अन्य कारणों से हुई मृत्यु शामिल हैं। वहीं, यूएई में इसी अवधि में 7,458 भारतीयों की मृत्यु दर्ज हुई, जिसमें 5,702 प्राकृतिक, 128 कार्यस्थल दुर्घटना, 511 आत्महत्या, 25 आपराधिक घटनाएं और 1,092 अन्य कारणों से हुई मौतें शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार 2,850 मौतों के साथ अमेरिका तीसरे स्थान पर है, जबकि कुवैत, ओमान, कतर, मलेशिया, इटली, ब्रिटेन और जर्मनी में भी उल्लेखनीय संख्या में भारतीयों की मृत्यु हुई है।

🌾 हरियाणा के हजारों परिवारों की सुरक्षा और आजीविका से जुड़ा है यह गंभीर विषय

हरियाणा के ग्रामीण एवं अर्न-शहरी अंचलों से हजारों युवा निर्माण, ट्रांसपोर्ट, इंजीनियरिंग और सर्विस सेक्टर में काम करने खाड़ी देशों में जाते हैं।

ऐसे में विदेशों में भारतीय कामगारों की मृत्यु और असुरक्षा के ये आंकड़े राज्य के हजारों परिवारों के जीवन और सुरक्षा से सीधे जुड़े हुए हैं। सांसदों ने संसद में कामगारों की प्रतिकूल कार्य परिस्थितियों, अत्यधिक मानसिक तनाव, सामाजिक सुरक्षा की कमी और मृत्यु के उपरांत पार्थिव शरीर को ससम्मान और बिना किसी विलंब के स्वदेश वापस लाने की प्रक्रियाओं पर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया।

🛠️ ‘मदद’ पोर्टल, 24×7 हेल्पलाइन और लेबर विंग से दूतावास दे रहे सहायता

विदेश मंत्रालय ने संसद को आश्वस्त करते हुए बताया कि विदेशों में संकटग्रस्त भारतीय नागरिकों की त्वरित सहायता हेतु भारतीय दूतावासों में 24 घंटे कार्यरत हेल्पलाइन, ‘मदद’ पोर्टल, सीपी-ग्राम्स (CPGRAMS), ई-माइग्रेट (e-Migrate), व्हाट्सएप और ई-मेल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

जिन देशों में भारतीय श्रमिकों की आबादी अधिक है, वहां भारतीय मिशनों में विशेष ‘लेबर विंग’ (Labor Wings) गठित किए गए हैं जो प्रवासियों की समस्याओं का निवारण करते हैं।

💰 ICWF फंड से आर्थिक मदद और ई-केयर पोर्टल से 48 घंटे में पार्थिव शरीर स्वदेश लाने की व्यवस्था

정부 ने बताया कि आपात स्थिति में फंसे भारतीयों को ‘इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड’ (ICWF) के माध्यम से कानूनी सहायता, चिकित्सा सुविधा, अस्थाई आवास, हवाई टिकट और पार्थिव शरीर को भारत भेजने तक का वित्तीय वहन किया जाता है।

मृतक के पार्थिव शरीर को शीघ्र लाने के लिए ‘ई-केयर क्लीयरेंस पोर्टल’ के जरिए 48 घंटे के भीतर एनओसी और अनुमति जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, ईसीआर (ECR) श्रेणी के श्रमिकों के लिए ‘प्रवासी भारतीय बीमा योजना’ (PBBY) के तहत 10 लाख रुपये तक का दुर्घटना व मृत्यु बीमा कवर प्रदान किया जाता है।

🛡️ महिला कामगारों के शोषण को रोकने के लिए 30 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा व कड़े नियम

विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि खाड़ी देशों तथा अन्य ईसीआर श्रेणी वाले 18 देशों में रोजगार हेतु जाने वाली महिला कामगारों के हितों की रक्षा के लिए कड़े नियम लागू हैं।

महिला कामगारों की भर्ती केवल अधिकृत सरकारी एजेंसियों के माध्यम से ही की जाती है तथा उनके लिए न्यूनतम आयु सीमा 30 वर्ष निर्धारित की गई है, ताकि मानव तस्करी, शारीरिक शोषण और अनधिकृत एजेंटों के जोखिमों को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।