शोभा ओहटकर को मिली कर्मचारी चयन आयोग की कमान
ईमानदार और सख्त प्रशासनिक छवि को सम्मान दिया बिहार ने
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भारतीय पुलिस सेवा से रिटायर हुई हैं
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युवाओं की उम्मीदों की डोर उनके हाथों
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पूरे कार्यकाल में कार्यकुशलता की पहचान
दीपक नौरंगी
पटनाः बिहार सरकार ने प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए एक बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने 1990 बैच की सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी शोभा ओहटकर को बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इस नियुक्ति संबंधी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। शोभा ओहटकर पदभार ग्रहण करने की तिथि से लेकर अगले आदेश तक इस अत्यंत महत्वपूर्ण संस्थान की कमान संभालेंगी।
इस नियुक्ति के साथ ही, अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी, जो अब तक आयोग का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे, को इस जिम्मेदारी से कार्यमुक्त कर दिया गया है। गौरतलब है कि शोभा ओहटकर इसी वर्ष 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त हुई हैं। राज्य सरकार द्वारा सेवानिवृत्ति के ठीक बाद उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपना, उनकी प्रशासनिक कार्यकुशलता, बेदाग छवि और नेतृत्व क्षमता पर सरकार के गहरे भरोसे को प्रमाणित करता है।
मूल रूप से महाराष्ट्र के पुणे की रहने वालीं शोभा ओहटकर ने हैदराबाद से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की। अपनी मेधा के बल पर संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में अपना स्थान बनाया। अपने लंबे और गौरवशाली करियर के दौरान, शोभा ओहटकर ने अपनी छवि एक ईमानदार, अनुशासित और सख्त प्रशासनिक अधिकारी के रूप में स्थापित की है।
विशेष रूप से, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवा की महानिदेशक के रूप में उनके कार्यकाल को अत्यधिक प्रशंसनीय माना जाता है। उन्होंने विभाग में आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने, प्रशिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने और आपदा प्रबंधन की क्षमता को अत्याधुनिक बनाने में महती भूमिका निभाई। उनके पूरे करियर में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही हमेशा प्राथमिकता पर रही है।
बिहार कर्मचारी चयन आयोग राज्य का एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण संस्थान है। लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य और सरकारी नौकरियों में उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया सीधे तौर पर इसी आयोग पर टिकी होती है। आयोग की कार्यप्रणाली में निष्पक्षता और समयबद्धता किसी भी राज्य के सामाजिक-आर्थिक ढांचे के लिए अनिवार्य है।
ऐसे समय में जब युवाओं की निगाहें सरकारी भर्तियों पर टिकी होती हैं, शोभा ओहटकर जैसी अनुभवी और सख्त अधिकारी का नेतृत्व आयोग में भर्ती प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाएगा। राज्य सरकार का यह कदम योग्यता और कर्मठता को सम्मान देने की दिशा में एक सराहनीय पहल माना जा रहा है। अब सभी की नजरें शोभा ओहटकर के नेतृत्व में होने वाली आगामी भर्ती परीक्षाओं के सफल संचालन पर टिकी हैं।